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 Narak Chaturdarshi ;Choti Diwali

नरक चतुर्दशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है. इसे यम चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी या रूप चौदस भी कहते हैं. यह पर्व नरक चौदस और नरक पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है. आमतौर पर लोग इस पर्व को छोटी दीवाली भी कहते हैं. इस बार यह पर्व बुधवार 18 अक्‍टूबर को मनाया जाएगा. 


Yamraj; Yama; Narak Chaturdarshi ;Choti Diwali 

इस दिन यमराज की पूजा करने और व्रत रखने का व‍िधान है. ऐसी मान्‍यता है कि इस दिन जो व्‍यक्ति सूर्योदय से पूर्व अभ्‍यंग स्‍नान यानी तिल का तेल लगाकर अपामार्ग (एक प्रकार का पौधा) यानी कि चिचिंटा या लट जीरा की पत्तियां जल में डालकर स्नान करता है, उसे यमराज की व‍िशेष कृपा म‍िलती है. नरक जाने से मुक्ति म‍िलती है और सारे पाप नष्‍ट हो जाते हैं. 


स्‍नान के बाद सुबह-सवेरे राधा-कृष्‍ण के मंदिर में जाकर दर्शन करने से पापों का नाश होता है और रूप-सौन्‍दर्य की प्राप्ति होती है. माना जाता है कि महाबली हनुमान का जन्म इसी दिन हुआ था इसीलिए बजरंगबली की भी विशेष पूजा की जाती है.


Bajrangbali;Hanuman;Narak Chaturdarshi ;Choti Diwali

नरक चतुर्दशी के दिन पूजा करने की व‍िध‍ि

 Narak Chaturdarshi ;Choti Diwali

- नरक से बचने के लिए इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर में तेल की मालिश करके स्‍नान किया जाता है.
- स्‍नान के दौरान अपामार्ग की टहनियों को सात बार सिर पर घुमाना चाहिए.
- टहनी को सिर पर रखकर सिर पर थोड़ी सी साफ मिट्टी रखें लें.
- अब सिर पर पानी डालकर स्‍नान करें.
- इसके बाद पानी में तिल डालकर यमराज को तर्पण दिया जाता है.
- तर्पण के बाद मंदिर, घर के अंदरूनी हिस्‍सों और बगीचे में दीप जलाने चाहिए.



यम तर्पण मंत्र

यमय धर्मराजाय मृत्वे चान्तकाय च |
वैवस्वताय कालाय सर्वभूत चायाय च ||


स्‍नान और दीपदान का मुहूर्त

 Narak Chaturdarshi ;Choti Diwali

इस बार नरक चतुर्दशी बुधवार 18 अक्‍टूबर को मनाई जाएगी. अभ्यंग स्नान का मुहूर्त सूर्योदय से पूर्व और चंद्रमा के उदय रहते हुए सुबह 04:47 से सुबह 06:27 तक रहेगा. इसकी अवधि 1 घंटे 40 मिनट रहेगी. यम दीपदान का पूजन मुहूर्त शाम 6 से शाम 7 बजे तक रहेगा. यम दीपदान के लिए चार बत्ती वाला मिट्टी का दीपक घर के मुख्य द्वार पर रखना चाहिए.


नरक चतुर्दशी के दिन कैसे करें हनुमान जी की पूजा?

 Bajrangbali;Hanuman;Narak Chaturdarshi ;Choti Diwali

मान्‍यता के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन भगवान हनुमान ने माता अंजना के गर्भ से जन्‍म लिया था. इस दिन भक्‍त दुख और भय से मुक्ति पाने के लिए हनुमान जी की पूजा-अर्चनाा करते हैं. इस दिन हनुमान चालीसा और हनुमान अष्‍टक का पाठ करना चाहिए. 


नरक चतुर्दशी को क्‍यों कहते हैं रूप चतुर्दशी?

 

मान्‍यता के अनुसार हिरण्‍यगभ नाम के एक राजा ने राज-पाट छोड़कर तप में विलीन होने का फैसला किया. कई वर्षों तक तपस्‍या करने की वजह से उनके शरीर में कीड़े पड़ गए. इस बात से दुखी हिरण्‍यगभ ने नारद मुनि से अपनी व्‍यथा कही. नारद मुनि ने राजा से कहा कि कार्तिक मास कृष्‍ण पक्ष चतुर्दशी के दिन शरीर पर लेप लगाकर सूर्योदय से पूर्व स्‍नान करने के बाद रूप के देवता श्री कृष्‍ण की पूजा करें. ऐसा करने से फिर से सौन्‍दर्य की प्राप्ति होगी. राजा ने सबकुछ वैसा ही किया जैसा कि नारद मुनि ने बताया था. राजा फिर से रूपवान हो गए. तभी से इस दिन को रूप चतुर्दशी भी कहते हैं. 


क्‍यों मनाई जाती है छोटी दीवाली?

 Narak Chaturdarshi ;Choti Diwali

नरक चतुर्दशी को छोटी दीवाली भी कहा जाता है. दरअसल, यह पर्व दीवाली से एक दिन पहले मनाया जाता है और इस दिन भी घर में दीपक जलाने का व‍िधान है.



 सोर्स:NDTV
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ram-rahim-sold-expensive-vegetables-one-papaya-for-rs-5000-and-one-chilly-for-rs-1000 

दो साध्वियों से रेप करने के जुर्म में गुरमीत राम रहीम अब सलाखों के पीछे पहुंच चुका है लेकिन उसकी कारगुजारियां लगातार सामने आ रही हैं जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक राम रहीम अपने भक्तों को भगवान के नाम पर फंसा लेता था और मन मुताबिक दामों पर सब्जी बेचता था। 


एक हरी मिर्च एक हजार रुपए की, एक छोटा बैंगन एक हजार रुपए का। बैंगन का साइज बड़ा हो तो उसकी कीमत दो हजार हो जाती थी। मटर के पांच दानों का पैक एक हजार रुपए तक मिलता है। अगर आपने आधा किलो मटर लिया होता तो लाखों में उसकी कीमत होती। इतना ही नहीं राम रहीम अपने अंधभक्तों को 5000 रुपए में एक पपीता बेचता था। 



दरअसल, सिरसा में राम रहीम का डेरा करीब 800 एकड़ में फैला है, जिसके बड़े हिस्से में खेती की जाती है। इन खेतों में उगने वाली सब्जियों को राम रहीम अपने भक्तों को सोने के दाम पर बेचता था। बाबा दो टमाटर के लिए दो हजार लेता था। भक्तों में अंधभक्ति ऐसी थी कि बाबा के बाग की सब्जी का स्वाद हर कोई चखना चाहता था।



परिवार के एक सदस्य को भी हजारों की कीमत का मटर का एक दाना मिलता तो वो खुद को धन्य समझता। राम रहीम की सब्जी किसी भी कीमत पर खरदीने के पीछे का कारण था कि भक्त कहते थे हमारे पिता ने अपने हाथ से इस सब्जियों को उगाया है। इन्हें खाने से हमें कोई बीमारी नहीं होगी।



बता दें कि जब इंडिया टीवी की टीम जब राम रहीम के पैतृक गांव राजस्थान के श्रीगंगानगर के हनुमान गढ़ का गुरसर मोडिया गांव में पहुंची थी तब यह खुलासा हुआ कि इसके बर्थ सर्टिफिकेट इस शख्स का नाम हरपाल लिखा है। पिता मग्गर सिंह और मां नसीब कौर।



जन्म की तारीख - 10 जुलाई 1967, लेकिन गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां 15 अगस्त के दिन अपना बर्थडे मनाता था। अब प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर ये ढोंगी देश के राष्ट्रीय पर्व पर अपना जन्मदिन क्यों मनाता था।



इस शख्स से जुड़ा एक और दस्तावेज है। ये है दसवीं परीक्षा का रिजल्ट। मैट्रिक की परीक्षा में गणित के विषय में फेल होने के कारण इसे सप्लिमेंट्री लगा था। क्या इत्तेफाक है कि जो शख्स हिसाब में इतना कमजोर था, उसकी दुनिया में अरबों का हिसाब-किताब चल रहा है।




सोर्स:खबर इंडिया टीवी
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shraadh 

पुरखों को श्रद्धा से याद किया जाने वाला पितृ पक्ष छत्तीसगढ़ में 'पितर पाख' नाम से जाना जाता है। पितर पाख 5 सितंबर से शुरू होकर 19 सितंबर सर्व पितृमोक्ष अमावस्या तक मनाया जाएगा। जिस तिथि को पूर्वजों की मृत्यु हुई है, उसी तिथि को नदी-तालाबों में स्नान करके पितरों को जल अर्पित करके उनके नाम पर ब्राह्मणों को भोज करने की परंपरा निभाई जाएगी।


पहले दिन पितर बैसकी की परंपरा निभाएंगे

महामाया मंदिर के पुजारी पं.मनोज शुक्ला के अनुसार पितर पाख के पहले दिन को पितर बैसकी कहा जाता है। पितर हिन्दी तथा बैसकी छत्तीसगढ़ी शब्द है। इसका तात्पर्य पितर को बिठाना होता है। छत्तीसगढ़ की प्रचलित परंपरानुसार घर की बहुएं सुबह सबसे पहले घर की देहरी (दहलीज) व दरवाजे को गोबर से लीपती हैं, जिसे ओरी लीपना कहते हैं। उसके बाद चाँवल के आंटे से सुंदर चौक (रंगोली) पूरकर बीच मे पीढ़ा रखती हैं।


पीढ़ा के दोनों ओर के चौक में कुम्हड़ा, रखिया व दुधमोंगरा के फूल को सजाती हैं। इसके बाद फूलों से सजे सुसज्जिात पीढ़ पर एक लोटा में पानी, दातून व कुशा रखा जाता है। फिर श्रद्घापूर्वक पितरों के निमित्त धूप (गाय के गोबर से बने कंडे को जलाकर चावल, गाय का घी व देसी गुड़) देते हैं। इस तरह से पितर पाख के पहले दिन ही पितर देवताओं को नेवता देकर स्वागत किया जाता है।



सात पीढ़ियों के निमित्त भोजन

पं.शुक्ला बताते हैं कि घर का मुखिया सात पीढ़ी के पितरों के निमित्त तरोई के सात पत्तों में पूड़ी, बड़ा आदि भोज्य पदार्थो को पितर देवताओं को भोग लगाते हैं। फिर घर के मुंडेर पर कौओं के लिए तथा गौ माता, कुत्ते के लिए भी भोजन निकाला जाता है। यथाशक्ति ब्राह्मणो को भोजन कराकर पितरो के पसंद की सामग्री,वस्त्र आदि दान किया जाता है।



पितर पक्ष की खास तिथियां

# पिता का श्राद्घ अष्टमी और और माता का नवमी को।

# जिन परिजनों की मृत्यु दुर्घटना या आत्महत्या से उनका श्राद्ध चतुर्दशी को।

# साधु और संन्यासियों का श्राद्घ द्वाद्वशी को।

# जिनकी मृत्यु तिथि पता नहीं उनका श्राद्ध अमावस्या कों


तारीख श्राद्ध तिथियां

5 पूर्णिमा

6 प्रतिपदा

7 द्वितीया

8 तृतीया

9 चतुर्थी

10 पंचमी

11 षष्ठी

12 सप्तमी

13 अष्टमी

14 नवमी

15 दशमी

16 एकादशी

17 द्वादशी/ त्रयोदशी

18 चतुर्दशी

19 सर्व पितृ अमावस्याश्राद




सोर्स:नयी दुनिया
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gurmeet ram rahim


डेरा सच्चा सौदा चीफ राम रहीम को बलात्कार का दोषी करार दिया गया है. सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने राम रहीम को जेल भेज दिया है.


हम आपको बता दें कि इस पूरे मामले का आधार बना एक गुमनाम खत. ये पत्र 13 मई 2002 को तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी को लिखा गया था. इस गुमनाम चिट्ठी में पीड़ित लड़की ने डेरे के अंदर हो रहे गुनाहों का पूरा लेखा जोखा लिखा है. पूरी चिट्ठी ये है -


माननीय प्रधानमंत्री जी,

श्री अटल बिहारी वाजपेयी [भारत सरकार]

विषय - डेरे के महाराज द्वारा सैकड़ों लड़कियों से बलात्कार की जांच करें.

श्रीमान जी,

बता दें कि मैं पंजाब की रहने वाली हूं और अब पांच साल से डेरा सच्चा सौदा सिरसा (हरियाणा, धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा) में साधु लड़की के रूप में कार्य कर रही हूं. मेरे जैसी यहां सैकड़ों लड़कियां भी डेरे में 16 से 18 घंटे सेवा करती हैं. हमारा यहां शारीरिक शोषण किया जा रहा है. साथ में डेरे के महाराज गरुमीत सिं द्वारा योनिक शोषण [बलात्कार] किया जा रहा है. मैं बीए पास लड़की हूं. मेरे परिवार के सदस्य महाराज के अंध श्रद्धालु हैं, जिनकी प्रेरणा से मैं डेरे में साधु बनी थी.



dera sachcha saudaधर्म की आड़ में यौन शोषण


साधु बनने के दो साल बाद एक दिन महाराज गुरमीत की प्रेमाशया साधु गुरजोत ने रात के 10 बजे मुझे बताया कि महाराज ने गुफा (महाराज के रहने के स्थान) में बुलाया है. मैं क्योंकि पहली बार वहां जा रही थी. मैं बहुत खुश थी. यह जानकर कि आज खुद परमात्मा ने मुझे बुलाया है. गुफा में ऊपर जाकर जब मैंने देखा महाराज बेड पर बैठे हैं. हाथ में रिमोट है, सामने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही है. बेड पर सिरहाने की ओर रिवॉल्वर रखा हुआ है. मैं ये सब देख कर हैरान रह गई… मेरे पांव के नीचे की ज़मीन खिसक गई. यह क्या हो रहा है. महाराज ऐसे होंगे, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था. महाराज ने टीवी बंद किया व मुझे साथ बिठाकर पानी पिलाया और कहा कि मैंने तुम्हें अपनी खास प्यारी समझकर बुलाया है. मेरा यह पहला दिन था. महाराज ने मेरे को बाहों में लेते हुए कहा कि हम तुझे दिल से चाहते हैं. तुम्हारे साथ प्यार करना चाहते हैं क्योंकि तुमने हमारे साथ साधु बनते वक्त तन मन धन सब सतगुरु के अर्पण करने को कहा था. सो अब ये तन मन हमारा है. मेरे विरोध करने पर उन्होंने कहा कि कोई शक नहीं हम ही खुदा हैं. जब मैंने पूछा कि यह खुदा का काम है, तो उन्होंने कहाः

1. श्री कृष्ण भगवान थे, उनके यहां 360 गोपियां थीं. जिनसे वह हर रोज़ प्रेम लीला करते थे. फिर भी लोग उन्हें परमात्मा मानते हैं. यह कोई नई बात नहीं है.

2. यह कि हम चाहें तो इस रिवॉल्वर से तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ाकर दाह संस्कार कर सकते हैं. तु्म्हारे घर वाले हर प्रकार से हमारे पर विश्वास करते हैं व हमारे गुलाम हैं. वह हमारे से बाहर जा नहीं सकते, यह तेरे को अच्छी तरह पता है.

3. यह कि हमारी सरकार में बहुत चलती है. हरियाणा व पंजाब के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री हमारे चरण छूते हैं. राजनितक हमसे समर्थन लेते हैं, पैसा लेते हैं और हमारे खिलाफ कभी नहीं जाएंगे. हम तुम्हारे परिवार से नौकरी लगे सदस्यों को बर्खास्त करवा देंगे. सभी सदस्यों को मरवा देंगे और सबूत भी नहीं छोड़ेंगे, ये तुझे अच्छी तरह पता है कि हमने पहले भी डेरे के प्रबंधक को वजीर चंद खत्म करवा दिया था, जिनका आज तक अता-पता ना है. ना ही कोई सबूत बकाया है. जो कि पैसे के बल पर हम राजनीतिक व पुलिस और न्याय को खरीद लेंगे. इस तरह मेरे साथ मुंह काला किया और पिछले तीन माह में 20-30 दिन बाद किया जा रहा है.



anonymous letter 
इस गुमनाम चिट्ठी में है राम रहीम की पूरी करतूत


आज मुझको पता चला कि मेरे से पहले जो लड़कियां रहती थीं उन सबके साथ मुहं काला किया गया है. डेरे में मौजूद 35-40 साधु लड़की 35-40 वर्ष की उम्र से अधिक हैं जो शादी की उम्र से निकल चुकी हैं उन्होंने परिस्थितियों से समझौता कर लिया है. इनमें ज्यादा लड़कियां बीए, एमए, बीएड पास हैं. घरवालों के कट्टर अंधविश्वासी होने के कारण नरक का जीवन जी रही हैं.

हमें सफेद कपड़े पहनना, सिर पर चुन्नी रखना, किसी आदमी की तरफ आंख ना उठाकर देखना, आदमी से पांच-दस फुट की दूरी पर रहना महाराज का आदेश है. हम दिखाने में देवी हैं, मगर हमारी हालत वेश्या जैसी है. मैंने एक बार अपने परिवार वालों को बताया कि यहां डेरे में सब कुछ ठीक नहीं है तो मेरे घर वाले गुस्से में कहने लगे कि अगर भगवान के पास रहते हुए ठीक नहीं है, तो ठीक कहां है.


anonymous letter
राम रहीम को सजा दिलवाने में यही चिट्ठि आधार बनी


तेरे मन में बुरे विचार आने लग गए हैं. सतगुरु का सिमरन किया कर. मैं मजबूर हूं. यहां सतगुरु का आदेश मानना पड़ता है. यहां कोई भी दो लड़कियां आपस में बात नहीं कर सकती, घर वालों को टेलीफोन मिलाकर बात नहीं कर सकतीं. घरवालों का हमारे नाम फोन आए तो हमें बात करने का महाराज के आदेशानुसार हमें हुकुम ना है. यदि कोई लड़की किसी डेरे की इस सच्चाई के बारे में बात करती है तो महाराज का हुकुम है कि उसका मुहं बंद कर दो.


पिछले दिनों जब बठिण्डा (पंजाब) की लड़की साधु ने जब महाराज की काली करतूतों का सभी लड़कियों के सामने खुलासा किया तो कई साधु लड़कियों ने मिलकर उसे पीटा.


एक कुरुक्षेत्र जिले की एक साधु लड़की जो घर आ गई है, उसने घर वालों को सब कुछ सच बता दिया है. उसका भाई बड़ा सेवादार था. जो कि सेवा छोड़कर डेरे से नाता तोड़ चुका है. संगरूर जिले की एक लड़की जिसने घर आ कर पड़ोसियों को डेरे की काली करतूतों के बारे में बताया तो डेरे के सेवादार गुंडे बंदूकों से लैस लड़की के घर आ गए. घर के अंदर कुण्डी लगाकर धमकी दी और भविष्य में किसी से कुछ न बताने को कहा. इस प्रकार कई लड़कियां जिला मानसा (पंजाब) फिरोजपुर, पटियाला, लुधियाना की है जो घर जाकर भी चुप है क्योंकि उन्हें जान का खतरा है. इस प्रकार जिला सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, हनुमानगढ़, मेरठ की कई लड़कियां जो कि डेरे की गुंडागर्दी के आगे कुछ नहीं बोल रहीं.


अतः आप से अनुरोध है कि इन सब लड़कियों के साथ-साथ मुझे भी मेरे परिवार के साथ मार दिया जाएगा, अगर मैं इसमें अपना नाम लिखूंगी… क्योंकि मैं चुप नहीं रह सकती और न ही मरना चाहती हूं जनता के सामने सच्चाई लाना चाहती हूं. अगर आप प्रेस के माध्यम से किसी भी एजेंसी से जांच करवाएं तो डेरे में मौजूद 40 से 50 लड़कियां जो कि भय और डर में हैं पूरा विश्वास दिलाने के उपरांत सच्चाई बताने को तैयार हैं.


हमारा डॉक्टरी मुआयना किया जाए ताकि हमारे अभिभावकों को व आपको पता चल जाएगा कि हम कुमारी देवी साधू हैं या नहीं. अगर नहीं तो किसके द्वारा बर्बाद हुई हैं.”




 सोर्स:ichowk 
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 Janmashtami ;lord krishna

हिन्दुओं के लिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार का बहुत महत्व है. जन्माष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. श्रीकृष्ण को धरती पर भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना गया है. 


हिन्दू कैलेंकर के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के आठवें दिन यानि अष्टमी पर मध्यरात्रि में हुआ था. वैसे तो पूरे भारत में ही जन्माष्टमी का बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि वृन्दावन में इस पर्व की अलग ही रौनक देखने को मिलती है.


यदि आपके जीवन में संघर्ष बहुत ज्यादा है, धन की कमी की वजह से आप परेशान हैं तो कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर अपने भाग्य को बदलने के लिए तैयार हो जाइये. 



कान्हा को 5 चीजें अर्पित करिए भगवान कृष्ण की कृपा से आपके जीवन की सारी परेशानी दूर हो जाएगी और जल्द ही उन्नति के रास्ते खुल जाएंगे.


1- तुलसी दल- भगवान कृष्ण को तुलसी दल बहुत प्रिय है, इसलिए भोग लगाते समय कान्हां को तुलसी दल अवश्य अर्पित करें.

2- माखन मिसरी- माखन-मिसरी बाल गोपाल को बहुत पंसद है, माखन मिसरी का भोग लगाने से कान्हा बहुत प्रसन्न होते हैं.


3- पीले फल- पीले रंग के फल प्रसाद के रूप में कृष्ण जी को अर्पित से धन-दौलत की प्राप्ति होती है और भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं.

4- मोरपंख- मोरपंख भगवान कृष्ण के मुकुट में अवश्य लगाएं, इससे कृष्ण जी की विशेष कृपा आपको प्राप्त होगी.

5- पीले वस्त्र- पीतांबरी कान्हां को बहुत प्रिय है, इसलिए अपने कान्हा जी को पीले वस्त्र अवश्य अर्पित करें आपकी मनोकामना पूरी होगी.



किन बातों का रखें ख्याल

- ये पांच चीजें आप अपने घर के मंदिर में या किसी ऐसे मंदिर में जा कर अर्पित कर सकते हैं, जहां कान्हा का जन्मदिन पूरे भक्ति भाव से मनाया जा रहा हो.

- स्नान करके साफ वस्त्र पहन धारण करके ही भगवान कृष्ण की प्रतिमा को स्पर्श करें.

- भगवान कृष्ण को अर्पित की जाने वाली सभी चीजों में पहले गंगा जल छिड़कर पवित्र कर लें.

- सभी चीजें दाहिने हाथ से भगवान कृष्ण को अर्पित करें.

- तुलसी दल, माखन मिसरी और पीले फल प्रसाद के रूप में ज्यादा से ज्यादा लोगों को अवश्य बांटें


जन्माष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त 

स्मार्त संप्रदाय के अनुसार जन्माष्टमी 14 अगस्त को मनाई जाएगी तो वहीं वैष्णव संप्रदाय के 15 अगस्त को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा. 


जन्माष्टमी 2017
14 अगस्त
निशिथ पूजा: 12:03 से 12:47
निशिथ चरण के मध्यरात्रि के क्षण है: 12:25 बजे

15 अगस्त पराण: शाम 5:39 के बाद
अष्टमी तिथि समाप्त: 5:39


||जन्माष्टमी की ढेर सारी शुभकामनाएं!||





सोर्स:आजतक
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 Janmashtami 2017


भारत सहित पूरे विश्व में हिंदू संप्रदाय के लोग कृष्ण जन्माष्टमी इस बार 14 अगस्त मनाएंगे। भगवान श्री कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में यह त्योहार मनाया जाता है। 


पुराणों के मुताबिक भगवान श्री कृष्ण ने भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अवतार लिया था। इसके बाद से इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा। इस त्योहार को भारत में हीं नहीं बल्कि विदेश में भी हिंदू संप्रदाय के लोग पूरी आस्था के साथ मनाते हैं।


Happy Janmashtami  


बताया जाता है कि भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को आधी रात में अत्याचारी मामा कंस के विनाश के लिए भगवान श्री कृष्ण ने मथुरा में अवतार लिया था। इसलिए इस दिन मथुरा में काफी हर्षोउल्लास से जन्माष्टमी मनाई जाती है। दूर-दूर से लोग इस दिन मथुरा आते हैं।



 इस दिन मथुरा नगरी पूरे धार्मिक रंग में रंगी होती है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण के मंदिरों को खास तौर पर सजाया जाता है और झांकियां सजाई जाती हैं। इसके अलावा मंदिरों में रासलीला का आयोजन भी किया जाता है। नीचे दिए गए वीडियो के मुताबिक 5 हजार 243 वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण मध्य रात्रि में इस धरती पर अवतरित हुए थे।



जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने का भी विधान है। इस दिन व्रत रखने का हिंदू धर्म में काफी महत्व बताया गया है। बताया जाता है कि इस दिन व्रत रखने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। 



स्कंद पुराण के मुताबिक जो मनुष्य जानते हुए भी इस दिन व्रत नहीं रखता, वह जंगल में सृप होता है। लेकिन जो व्यक्ति विधि के अनुसार और पूरी आस्था के साथ इस दिन व्रत रखते हैं, उनके पास हमेशा लक्ष्मी स्थिर रहती है और बिगड़ते काम बन जाते हैं।



क्या है व्रत विधि- व्रत की पूर्व रात्रि को हल्का भोजन करना चाहिए और इस दिन शारीरिक संबंध भी नहीं बनाने चाहिए। व्रत के दिन सुबह स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद जल, फल, कुश लेकर व्रत का संकल्प करें। संकल्प करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और पूजन करें। पूजा में देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंदू, यशोदा, लक्ष्मी का नाम लेना ना भूलें।




सोर्स:जनसत्ता
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इस फिल्म में शाहरुख हॉकी प्लेयर और कोच बने थे, वहीं "सुल्तान" में सलमान ने कुश्ती प्लेयर और कोच का रोल किया था.


01. जयदीप साहनी को इस कहानी का आइडिया न्यूज़पेपर की एक छोटी सी स्टोरी से आया था. वे अख़बार पढ़ रहे थे और उसमें भारतीय महिला हॉकी टीम के 2002 के राष्ट्रमंडल खेलों में जीतने की बड़ी खबर को एक छोटी सी जगह में लगाया गया था जो अख़बार के पीछे के पन्नों में कहीं दबा दी गई थी.


 उन्हें हैरानी हुई कि कॉमनवेल्थ गेम्स जितनी बड़ी जीत को फ्रंट पेज पर जगह क्यों नहीं दी गई. यही 2004 में एशिया कप में हुआ जिसमें भारतीय महिला टीम जीती थी. यही जीतें अगर पुरुष टीमों ने हासिल की होती तो जरूर उन्हें पहले पेज पर लगाया जाता. इस गैर-बराबरी को देखने के बाद ‘चक दे! इंडिया’ का जन्म हुआ.


02. इस फिल्म के लिखे जाने की प्रक्रिया ‘बंटी और बबली’ (2005) की शूटिंग के दौरान शुरू हुई. तब फिल्म के रीटिंग सेशन खत्म हुए थे. यशराज फिल्म्स की रानी मुखर्जी और अभिषेक बच्चन स्टारर इस फिल्म को भी जयदीप साहनी ने ही लिखा था. वे प्रोड्यूसर आदित्य चोपड़ा के साथ बैठे थे कि आदि ने पूछा तुम आगे क्या करने की सोच रहे हो? तब जयदीप ने बताया कि कई बरसों से उनके दिमाग में एक कहानी है. इसमें लड़कियों की की एक हॉकी टीम होती है, उनके कोच होते हैं, उनका सपोर्ट स्टाफ होता है और कैसे बिना मोटिवेशन के खेलते-खेलते उन्हें प्रेरणा मिलती है और वे एक के बाद एक मैच जीतती जाती हैं. 


जयदीप ने आधे-एक घंटे में इस कहानी को सुनाया. उन्होंने कहा कि ये कहानी हर किसी को जाननी ही चाहिए. आदि ने अंत में कहा कि चलो इसे करते हैं. उन्होंने भी कहा कि ये फिल्म बननी ही चाहिए. उसके बाद जयदीप ने रिसर्च करनी शुरू की. हॉकी कैंप्स में गए. स्टेडियम्स में गए. टीमों के साथ रुके.


bunty aur babli
यशराज की फिल्म “बंटी और बबली” के पोस्टर में अमिताभ, ऐश्वर्या और अभिषेक बच्चन.


03. इसी दौरान हॉकी कोच का किरदार कबीर खान लिखा गया. फिल्म में शाहरुख ने इसे निभाया था. कबीर पर पाकिस्तान के खिलाफ जानबूझकर भारत को हरवाने के आरोप लगते हैं और उसकी जिदंगी तबाह हो जाती है. बहुत बरस बाद उसे लड़कियों की हॉकी टीम का कोच बनाया जाता है और वो उन्हें विनिंग टीम बनाता है. 


फिल्म में कबीर पर जो झूठे आरोप लगे कुछ वैसा ही असल में हॉकी प्लेयर मीर रंजन नेगी के साथ भी 1982 के एशियाई खेलों में हुआ था. इसी फिल्म में वो सलाहकार भी थे और छोटे से रोल में खुद नजर भी आए. हालांकि वे और जयदीप दोनों ही इससे इनकार करते रहे कि फिल्म में कोच का कैरेक्टर उन पर बेस्ड नहीं है.
 





04.चक दे इंडिया’ से पहले डायरेक्टर शिमित अमीन ने रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘अब तक छप्पन’ बनाई थी जिसमें नाना पाटेकर ने एनकाउंटर स्पेशलिस्ट का रोल किया था. इस फिल्म में शिमित का ट्रीटमेंट प्रोड्यूसर आदि को याद रह गया था. ऐसे में जब ‘चक दे इंडिया’ के लिए डायरेक्टर ढूंढ़ने की बात आई तो आदि ने जयदीप से कहा कि इसे तो ‘अब तक छप्पन’ वाले से ही बनवाना ठीक रहेगा. फिर शिमित फाइनल हुए. जयदीप हालांकि शिमित को पहले से जानते थे और उनके दोस्त थे.



शाहरुख से सीन डिसकस करते हुए डायरेक्टर शिमित अमीन. (फोटोः यशराज) 
शाहरुख से सीन डिसकस करते हुए डायरेक्टर शिमित अमीन. (फोटोः यशराज)


05. ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में फिल्म का वर्ल्ड कप फाइनल मैच शूट किया जाना था. डायरेक्टर शिमित चाहते थे कि स्टेडियम पूरा भरा हुआ दिखे और दर्शकों की बड़ी संख्या चीयर कर रही हो. ये शूट लगातार पांच रातों तक चलना था. 


अब दिक्कत ये थी कि स्टेडियम भरने के लिए लोग नहीं थे. ऐसे में शाहरुख ने कहा कि स्टेडियम भरने के लिए वे उनके स्टारडम का इस्तेमाल कर सकते हैं. उसके बाद फिल्म की टीम ने सिडनी में प्रचार कर दिया कि शाहरुख वहां ओलंपिक हॉकी स्टेडियम में आने वाले हैं. लोग बड़ी संख्या में उन्हें देखने आए. और लगातार पांच रात आए. 


वे शाहरुख को देखने के लिए वहां आठ-आठ घंटे बैठे रहते थे. शाहरुख भी मैच के बीच-बीच में स्टे़डियम में दर्शकों के आगे चक्कर लगाते थे, दर्शकों को वेव करते थे. जब उनके दृश्यों की शूटिंग नहीं भी हो रही होती थी, तब भी वे ऐसा करते थे.



 फिल्म के क्लाइमैक्स में शाहरुख.
फिल्म के क्लाइमैक्स में शाहरुख.


06. वर्ष 2008 में ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ जैसी ऑस्कर विनिंग फिल्म से डेब्यू करने वाली फ्रीडा पिंटो ने भी ‘चक दे! इंडिया’ में एक हॉकी प्लेयर के रोल के लिए ऑडिशन दिया था. लेकिन उनका सलेक्शन नहीं हुआ.


फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' में फ्रीडा.
फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ में फ्रीडा.


07. फिल्म में अंत में भारतीय महिला हॉकी टीम वर्ल्ड कप जीत जाती है. लेकिन जब जयदीप साहनी इसकी स्क्रिप्ट लिख रहे थे तो एकदम आखिर तक उन्होंने तय नहीं किया था कि उनकी कहानी में क्या भारतीय लड़कियां जीतेंगी या नहीं! उन्हें सूझ ही नहीं रहा था. वे जीतने-हारने के बजाय कहानी को आगे बढ़ाते गए और ऐसा करते-करते कहानी अंत में वहां पहुंच जाती है जहां शूटआउट से फैसला होता है.


'चक दे इंडिया' के एक सीन में प्लेयर लड़कियों को गेम समझाते हुए कोच कबीर खान. (फोटोः य़शराज फिल्म्स)
‘चक दे इंडिया’ के एक सीन में प्लेयर लड़कियों को गेम समझाते हुए कोच कबीर खान. (फोटोः य़शराज फिल्म्स)


08. रिलीज से पहले मेकर्स ने एक वीडियो बनाया था जिसमें फिल्म की हॉकी टीम वाली लड़कियों को दिखाया जाता है जिन्हें शाहरुख का कैरेक्टर ट्रेनिंग देता है. इस वीडियो में वो गाना भी रखा गया – “एक हॉकी दूंगी मैं रख के”. 


लोगों का रिएक्शन लेने के लिए इस वीडियो को मल्टीप्लेक्स वालों के यहां भेजा गया. साथ ही मेकर्स ने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को भी दिखाया. मल्टीप्लेक्स वालों ने ये वीडियो वापस भेज दिया और कहा कि थियेटर में लोग इसे देखकर हूटिंग कर रहे हैं और इस गाने में लड़कियों की मजाक उड़ा रहे हैं. प्रदर्शकों का फीडबैक था कि इस गाने को चलाना बंद कर दो नहीं तो ये फिल्म देखने कोई नहीं आएगा.


 जयदीप साहनी का मानना था कि लोगों ने इस वीडियो को पसंद इसलिए नहीं किया क्योंकि वे ये स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि शाहरुख खान की प्लेयर लड़कियां ऐसी कैसी हो सकती हैं. उनके मन में ग्लैमरस हीरोइन्स की कल्पना थी. हालांकि कुछ महीनों बाद जब फिल्म रिलीज हुई तो उन्हीं सब दर्शकों ने इन्हीं सब लड़कियों को बहुत ज्यादा पसंद किया.


09. जब फिल्म रिलीज हुई तो राइटर जयदीप अमेरिका के ऐले में थे क्योंकि वहां भी उसकी स्क्रीनिंग हो रहे थी. उन्होंने ओपनिंग के दिन मुंबई में प्रोड्यूसर यश चोपड़ा को फोन किया. यश जी ने धीमे स्वर में कहा, “बेटा कोई आया ही नहीं.” यानी कि फिल्म देखने लोग नहीं आ रहे. फोन के दूसरी तरफ जयदीप चुप हो गए. यश चोपड़ा ने फिर उनसे कहा कि फिल्म को चाहे एक आदमी भी न देखने आए लेकिन मुझे इस पर गर्व है कि मेरे स्टूडियो का नाम ऐसी फिल्म के साथ जुड़ा हुआ है. हालांकि दूसरे दिन फिल्म हाउसफुल हो गई और लोगों में इसका क्रेज़ बहुत बढ़ गया.



यश चोपड़ा, आदित्य चोपड़ा और जयदीप साहनी. (फोटोः यशराज फिल्म्स व अन्य)
यश चोपड़ा, आदित्य चोपड़ा और जयदीप साहनी. (फोटोः यशराज फिल्म्स व अन्य)



10. बताया जाता है कि इस फिल्म की रिलीज के बाद देश में हॉकी स्टिक्स की बिक्री 30 परसेंट तक बढ़ गई थी.


11. सलमान खान को भी इस फिल्म में कबीर खान का लीड रोल ऑफर किया गया था. दरअसल जब स्क्रिप्ट लिखी जा रही थी तब प्रोड्यूसर आदित्य चोपड़ा, डायरेक्टर शिमित और राइटर जयदीप के बीच चर्चा होती चल रही थी और उनके ज़ेहन में हॉकी कोच के रोल में शाहरुख खान ही थे. लेकिन पहला ड्राफ्ट लिखने के बाद जब शाहरुख को अप्रोच किया गया तो उन्होंने कहा कि उनके पास डेट्स नहीं हैं और वो ये प्रोजेक्ट नहीं कर पाएंगे. ऐसे में प्रोड्यूसर आदि ने सलमान खान के साथ इस रोल के लिए मीटिंग की थी. हालांकि आखिर वो रोल सलमान ने नहीं किया. बाद में शाहरुख ने फिल्म साइन कर ली.


फिल्म 'सुल्तान' में रेस्लर के रोल में सलमान खान.
फिल्म ‘सुल्तान’ में रेस्लर के रोल में सलमान खान.

12. चक दे इंडिया एंथम’ को भी सोच-समझकर बनाया गया था. प्रोड्यूसर आदित्य चोपड़ा की अपने डायरेक्टर और कंपोजर्स से मांग थी कि वे एक ऐसा गाना जरूर बनाएं जो स्पोर्ट्स एंथम बन जाए क्योंकि भारत में राष्ट्रगान तो है लेकिन स्पोर्ट्स एंथम नहीं है. बाद में ऐसा ही हुआ. 


चक दे इंडिया” हॉकी ही क्या भारत के बाकी खेलों में खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के लिए प्रमुख गाना बन गया. भारतीय क्रिकेट टीम ने जब 2011 में वर्ल्ड कप जीता तो विराट कोहली ने दर्शकों के सामने इसे गाया. जब 2015 के वर्ल्ड कप में भारत ने साउथ अफ्रीका को हराया तो दर्शक ‘चक दे इंडिया’ के नारे लगा रहे थे. इसके अलावा क्रिकेट और की मैचों में ये अनिवार्य रूप से बजता ही है.







सोर्स:लल्लनटॉप
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