loading...
देश लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

 14 Year Mumbai Boy Commit Suicide To Complete The Online Game Blue Whale Challenge

क्या कोई इंटरनेट गेम किसी की जान ले सकता है? अभी तक तो लगता था कि ऐसा नहीं हो सकता, लेकिन जब से ब्लू वेल (Blue Whale) नाम का गेम आया है, इसने दुनियाभर में 250 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है. इनमें अकेले रूस में 130 से ज्यादा मौतें हुई हैं. इसके अलावा पाकिस्तान और अमेरिका समेत 19 देशों में इस गेम की वजह से खुदकुशी के कई मामले सामने आए हैं.


अब इन जान गंवाने वाले लोगों की लिस्ट में अपने देश का भी नाम शामिल हो गया है. 30 जुलाई को मुंबई में जिस 14 साल के लड़के ने सातवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी थी, बताया जा रहा है कि वो ब्लू वेल गेम खेल रहा था. इस गेम की आखिरी स्टेज में प्लेयर को खुदकुशी करने के लिए कहा जाता है और उस लड़के ने खुदकुशी कर ली. इंडिया में अभी इस तरह का कोई और मामला नहीं आया है.


पायलट बनना चाहता था, गेम खेलने में जान गंवा दी

14 Year Mumbai Boy Commit Suicide To Complete The Online Game Blue Whale Challenge
14 साल के बच्चे ने सातवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक अंधेरी ईस्ट का रहने वाला मनप्रीत साहस 9वीं क्लास में पढ़ता था. शनिवार को उसने सातवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी. घर में वो अपने मम्मी-पापा और दो बड़ी बहनों के साथ रहता था. उसका सपना पायलट बनने का था और ट्रेनिंग के लिए रूस जाना चाहता था. जिस ब्लू वेल गेम को खेलते हुए उसने जान गंवाई, वो रूस में ही बनाया गया है.


इंटरनेट पर खोजा था छत से कूदने का तरीका

सुसाइड केस की जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि मनप्रीत ने छलांग लगाने से पहले इंटरनेट पर सर्च किया था कि छत से छलांग कैसे लगाई जाती है. मनप्रीत ने शुक्रवार को ही दोस्तों को बता दिया था कि वो सोमवार को स्कूल नहीं आएगा. 


शनिवार को छलांग लगाने से पहले मनप्रीत ने करीब 20 मिनट तक घर की छत पर बैठकर अपने दोस्तों से बात की. मनप्रीत ने गेम के आखिरी टास्क को लेकर छत से छलांग लगाने का भी जिक्र किया. उसने चैटिंग में लिखा कि अब आप लोग मुझे सिर्फ तस्वीरों में ही देखोगे, लेकिन किसी ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया. बाद में पता चला कि उसने खुदकुशी कर ली.


पड़ोसी ने कहा था, ‘नीचे उतरो’

जांच टीम में शामिल एक अफसर के मुताबिक मनप्रीत जब छलांग लगाने के लिए टेरेस पर गया था, तो दूसरी बिल्डिंग के एक शख्स ने उसे देख लिया था. उसने मनप्रीत से नीचे उतरने के लिए भी कहा था. पुलिस अधिकारी के मुताबिक मनप्रीत ने इस बात का जिक्र गेम के एडमिन से भी किया था, लेकिन एडमिन उसे आत्महत्या करने के लिए उकसाने में सफल रहा.


50 स्टेज में पूरा होता है गेम

द ब्लू वेल गेम को 2013 में रूस से फिलिप बुडेकिन ने बनाया था. इस खेल में एक एडमिन होता है, जो खेलने वाले को अगले 50 दिन तक बताते रहता है कि उसे आगे क्या करना है. अंतिम दिन खेलने वाले को खुदकुशी करनी होती है और उससे पहले एक सेल्फी लेकर अपलोड करनी होती है.
अजीबो-गरीब होते हैं टास्क


blue whale challenge
आत्महत्या के लिए छत से कूदने के लिए कहा जाता है.

 
गेम खेलने वाले को हर दिन एक कोड नंबर दिया जाता है, जो हॉरर से जुड़ा होता है. इसमें हाथ पर ब्लेड से F57 लिखकर इसकी फोटो अपलोड करने के लिए कहा जाता है. इसके अलावा हर रोज के खेल के लिए एक कोड होता है, जो सुबह चार बजे ही ओपन हो सकता है. 


इस गेम का एडमिन स्काइप के जरिए गेम खेलने वाले से बात करता रहता है. हर टास्क के पूरा होने पर हाथ में एक कट लगाने के लिए कहा जाता है और उसकी फोटो अपलोड करने को कहा जाता है. गेम का विनर उसे ही घोषित किया जाता है, जो अंतिम दिन जान दे देता है.


गेम छोड़ने पर मिलती है धमकी

अगर किसी ने एक बार गेम खेलना शुरू कर दिया, तो वो इसे बीच में नहीं छोड़ सकता. एक बार गेम शुरू हो जाने पर गेम खेलने वाले का फोन एडमिन हैक कर लेता है और फोन की सारी डिटेल उसके कब्जे में आ जाती है. अगर कोई बीच में गेम छोड़ना चाहे, तो एडमिन की तरफ से धमकी मिलती रहती है कि उसे या फिर उसके माता-पिता को जान से मार दिया जाएगा.


जेल में है गेम बनाने वाला

यह गेम 2013 में रूस में बना था, लेकिन सुसाइड का पहला मामला 2015 में आया था. इसके बाद गेम बनाने वाले फिलिप को जेल भेज दिया गया. जेल जाने के दौरान अपनी सफाई में फिलिप ने कहा था कि ये गेम समाज की सफाई के लिए है. जिन लोगों ने भी गेम की वजह से आत्महत्या की, वो बॉयोलॉजिकल वेस्ट थे.


ब्रिटेन में लॉन्च होने वाला है गेम

250 से अधिक मौतों के बाद भी इस गेम को दुनिया के किसी भी देश में बैन नहीं किया गया है. ये अभी तक ब्रिटेन में लॉन्च नहीं हुआ है, लेकिन अब वहां भी इसे लॉन्च करने की तैयारी चल रही है. ब्रिटिश वेबसाइट metro.co.uk के मुताबिक बेसिलडोन के वुडलैंड्स स्कूल के प्रिंसिपल डेविड राइट ने बच्चों के माता-पिता को आगाह करते हुए एक पत्र लिखा है. उन्होंने लिखा कि पुलिस की मदद से उन्होंने एक गेम का पता लगाया है, जिससे लोगों को सावधान रहने की जरूरत है. यह ब्लू वेल नाम का गेम है, जो कई सोशल मीडिया वेबसाइट्स पर खेला जाता है. इसमें खेलने वाले को आखिरी दिन जान देकर गेम जीतना होता है.


पोकेमॉन गो ने भी मचाया था हंगामा


pokemon go
2016 में पोकेमॉन गो बच्चों के साथ बड़ों में भी पॉपुलर हुआ था

पिछले साल गेम्स की दुनिया में पोकेमॉन गो ने हंगामा मचाया था. ये जानलेवा भले नहीं था, लेकिन बहुत सारे लोग काम-धाम छोड़कर पोकेमॉन पकड़ने के लिए निकल जाते थे. हालांकि, कुछ महीनों बाद इसके क्रेज में कमी आ गई है. भारत में अब भी ये गेम आधिकारिक तौर पर लॉन्च नहीं हुआ है.




सोर्स:लल्लनटॉप.कॉम
loading...

हिमानी बहुगुणा


हिमानी बहुगुणा

चंडीगढ़ के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला छात्र जो कि एक एवरेज स्टूडेंट रहा हो अब वह गूगल में नौकरी करने जा रहा है और हर महीने उसकी तनख्वाह 12 लाख रुपए होगी। हम बात कर रहे हैं सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंड्री स्कूल से अभी आईटी स्ट्रीम से बारहवीं करने वाले हर्षित शर्मा की। 


हर्षित अपनी इस कामयाबी पर काफी खुश है लेकिन उसे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि उसके जैसे एक एवरेज छात्र को गूगल में नौकरी मिली है। हर्षित ने कहा कि मैं बता नहीं सकता कि मैं कैसा महसूस कर रहा हूं। मुझे ऐसा लग रहा है कि जैसे मेरा सपना पूरा हो गया है। मेरी मेहनत रंग लाई है।


फिलहाल शुरुआत में एक साल हर्षित को ट्रेनिंग पर रखा जाएगा और उसके लिए उसे हर महीना 4 लाख रुपए सैलरी दी जाएगी। ट्रेनिंग खत्म होने के बाद हर्षित को हर महीने 12 लाख रुपए सैलरी मिलेगी। गूगल द्वारा हर्षित को ग्राफिक डिज़ाइनर के तौर पर नियुक्त किया गया है।


 चंडीगढ़ न्यूज़लाइन से अपनी इस कामयाबी की बात करते हुए हर्षित ने कहा कि जब वह दस साल का था तब से ही उसका झुकाव ग्राफिक डिज़ाइनिंग सीखने की तरफ हो गया था। इसके बाद उसने निर्णय किया कि वह गूगल में नौकरी करेगा और तब से ही उसने अपने सपने को सच करने के लिए मेहनत करना शुरु कर दिया। हर्षित शर्मा ने गुप्त रूप से अपने एक अंकल से ग्राफिक डिज़ाइनिंग की ट्रेनिंग लेने लगा। हर्षित 7 अगस्त को गूगल में ट्रेनिंग करने के लिए कैलिफोर्निया जाएगा।



हर्षित ने कहा कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे गूगल द्वारा चुना जाएगा। मैंने अपने अंकल रोहित शर्मा से ग्राफिक डिज़ाइनिंग सीखना शुरु किया था। धीरे-धीरे यह मेरा जुनून बन गया और फिर मैं गूगल में नौकरी पाने का सपना देखने लगा। आज मुझे जो भी कुछ मिला है वो केवल मेरे अंकल की वजह से मिला है क्योंकि मैंने कभी भी ग्राफिक डिज़ाइनिंग सीखने के लिए किसी इंस्टीट्यूट में दाखिला नहीं लिया जो कुछ भी सीखा अपने अंकल से सीखा है। वहीं हर्षित के गूगल में जाने से खुश उसके स्कूल के प्रिंसीपल इंद्र बेनीवाल ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं और मुझे हर्षित पर काफी गर्व है।




सोर्स:जनसत्ता
loading...

missile man Dr.APJ Abdul Kalam inspiration to young scientist


भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की बदौलत भारत आज परमाणु महाशक्ति बन गया है। पहले परमाणु परीक्षण से लेकर मिसाइल टेक्नोलॉजी के जनक डॉ. कलाम अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन आज भी उनके दिखाए रास्ते पर चलकर दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइल बनाने में जुटे हैं


missile 


दरअसल, भारतीय वैज्ञानिक एक ऐसी मिसाइल पर काम कर रहे हैं, जो भगवान श्री कृष्ण के सुदर्शन चक्र की तरह अपने लक्ष्य को भेदकर वापस आ जाएगी। भारतीय वैज्ञानिकों को कई मायनों में सफलता भी मिल चुकी है। 

missile 


बता दें कि इस बेहतरीन मिसाइल को तैयार करने का श्रेय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को दिया गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति के पुराने नोट्स इस मिसाइल के निर्माण में काफी मदद कर रहे हैं।


वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर सबकुछ ठीक रहा तो ब्रम्होस सीरीज की आने वाली मिसाइलें लक्ष्य भेदकर वापस लौटने वाली दुनिया की पहली मिसाइल बन जाएगी। आपको बता दें कि भारत के पास अभी तक सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली अग्नि-5 की मारक क्षमता 6000 किमी है, यानी इसकी जद में आधी दुनिया है। 

brahmos missile 


ब्रह्मोस एरोस्पेस के सीईओ के अनुसार, पूरी दुनिया के पास अभी तक ऐसी मिसाइलें हैं, जो लक्ष्य भेदने के साथ वहीं पर समाप्त हो जाती हैं। लेकिन हम ठीक वैसी मिसाइल बना रहे हैं, जैसे सुदर्शन चक्र दुश्मन पर वार कर वापस लौट आता था।




सोर्स:लाइव इंडिया

loading...

 At Reliance AGM, Mukesh launches JioPhone which is effectively free

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ पचास तरह के काम करती है. लेकिन फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का सबसे जाना-पहचाना इंट्रो यही है कि वो जियो की मालिक है. तो जब रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के मालिक मुकेश अंबानी कंपनी की सालाना जनरल बॉडी मीटिंग में बोलने खड़े हुए, पब्लिक कान की फ्रीक्वेंसी ‘जियो’ शब्द सेट कर के सुनने लगी.


अंबानी ने भी निराश नहीं किया. डाटा खपा-खपा कर अघा चुके लोगों के लिए उनका नया वरदान था, JioPhone. अब तक जीयो की Volte सर्विस के लिए आपके पास एक स्मार्ट फोन होना ज़रूरी था. JioPhone एक फीचर फोन होगा. आम भाषा में सादा फोन. जैसा स्मार्ट फोन के आने से पहले एक ज़माने में मोबाइल हुआ करता था.


इससे पहले आप चप्पल झाड़कर लाइन में लगने के लिए तैयार हों, जान लीजिए कि JioPhone है क्या बलाः

# JioPhone सितंबर से मिलना शुरू होगा. इसके लिए प्रीबुकिंग 24 अगस्त से शुरू हो जाएगी.


# जियो की तरह ही JioPhone भी फ्री ऑफर के साथ आता है. आपको फोन खरीदने के लिए 1500 रुपए सेक्योरिटी डिपॉज़िट के तौर पर देने है. कंपनी 3 साल बाद इसे वापस कर देगी.


# जियो फोन पर वॉइस कॉल हमेशा के लिए मुफ्त रहेंगे.


# JioPhone 153 रुपए में अनलिमिटिड डाटा का ऑफर आएगा.


# जियो फोन को आप टीवी से जोड़ पाएंगे. इसमें ऐसा जुगाड़ होगा कि स्मार्ट टीवी से भी जुड़ जाए और पुराने डिब्बा टीवी से भी.



सोर्स:लल्लनटॉप
loading...

 india china tension modi govt to constructing 73 roads along china border

भारत और चीन के बीच लगातार तल्खियां बढ़ती जा रही हैं. सीमा पर हरकतें करने के साथ चीन और वहां की मीडिया भारत पर दबाव बनाने के लिए लगातार प्रोपेगेंडा भी कर रहा है. ऐसे में हर भारतीय के जेहन में सवाल उठना लाजमी है कि क्या भारत सरकार चीन को नियंत्रित करने के लिए क्या कर रहा है? 


हाल के दिनों के रक्षा और गृह मंत्रालय के हवाले से मीडिया में छपी खबरों पर गौर करेंगे तो पता चलता है कि भारत सरकार कई ऐसे काम कर रही है, जिससे चीन अपनी हदें न पार कर सके. एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज दुनिया की दूसरे ताकतवर देशों को अपने साथ खड़े करने में लगे हैं, ताकि कूटनीतिक तरीके से चीन पर दबाव बनाया जा सके. दूसरी तरफ भारत सरकार चीन से सटे इलाकों में कई तैयारियां भी कर रही हैं. आइए उन तैयारियों पर एक नजर डालते हैं.



चीन को उसी के प्लान से मात देने की तैयारी

चीन की लगातार कोशिश रही है कि वह बॉर्डर इलाके में इतनी सुविधाएं बना ले ताकि उसके जवान भारत की सीमा तक आसानी से पहुंच सकें. इसके लिए वह लगातार सीमावर्ती इलाकों में सड़क निर्माण करवा रहा है. पिछले कुछ समय से चीन चुंबी घाटी में सड़कें बनाने में जुटा है. उसी को भारतीय सैनिकों ने रोक दिया.


 इसी बात को वह पचा नहीं पा रहा है. चीन जिस जगह सड़के बनाने पर अड़ा हुआ है, वह मैक मोहन लाइन के मुताबिक भारत के क्षेत्र में पड़ता है, पर चीन 1914 के इस समझौते को मानता ही नहीं और उसे अपना हिस्सा बताता है.




चीन के इसी तरीके को अपनाते हुए भारत ने भी उसे जवाब देने का फैसला किया है. भारत सरकार अब चीन सीमा के आसपास 73 सड़कें बनवाने जा रही है. पहले भारत की रणनीति थी कि अगर बॉर्डर इलाके वीरान होंगे तो युद्ध जैसे हालात बनने पर चीनी सेना को भारतीय सीमा में घुसने में मुश्किलें होंगी. 


वहीं चीन ठीक इससे उलट बॉर्डर इलाकों में जानबूझकर सड़कें बनवाता रहा. भारत ने उसकी रणनीति को भांपते हुए सड़कें बनवाने का फैसला किया है, ताकि युद्ध की दशा में इन सड़कों के माध्‍यम से आसानी से आवागमन हो सके. गृह राज्‍यमंत्री किरण रिजिजू ने मंगलवार को लोकसभा में इस बात की जानकारी दी.




रक्षा मंत्रालय के खर्चे से बनेंगी 46 सड़कें

किरण रिजिजू ने बताया है कि चीन के बॉर्डर इलाकों में रक्षा मंत्रालय के खर्च से 46 सड़कों का निर्माण कराया जाएगा. वहीं 27 सड़कों का निर्माण गृह मंत्रालय करवाएगा. किरण रिजिजू ने अपने जवाब में कहा कि 30 सड़कों का निर्माण लगभग-लगभग पूरा भी हो चुका है.




पांच साल पहले ही बन जानी थीं सड़कें

इन 73 सड़कों का निर्माण साल 2012-13 तक हो जाना था. निर्माण में हुई देरी पर किरण रिजिजू ने बताया कि ये इलाके काफी ऊंचाई पर हैं. साथ ही यहां बीहड़, कठिन इलाके और प्राकृतिक आपदाओं के चलते भूमि अधिग्रहण को लेकर खासा परेशान सामने आ रही थी. उन्‍होंने बताया कि सैन्‍य अधिकारियों के साथ मुलाकात के बाद इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है.



मालूम हो कि जम्मू-कश्मीर से लेकर अरूणाचल प्रदेश तक भारत और चीन की सीमा की लंबाई 3,488 किलोमीटर है. इसका 220 किलोमीटर लंबा खंड सिक्किम में आता है. पिछले दिनों चीनी और पाकिस्तानी मीडिया ने भारतीय फौजियों पर हमले का भ्रम फैला रहा है.



सोर्स:NDTV
loading...

The Indian Independence | India-Pakistan Partition

ये दाग़ दाग़ उजाला, ये शब-गज़ीदा सहर,
वो इंतज़ार था जिसका, ये वो सहर तो नहीं.

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने इन लाइनों से जिस दर्द को बयां करने की कोशिश की है वो इससे कहीं बड़ा है. वाकई 15 अगस्त की सुबह वो सुबह नहीं रही होगी जिसके लिए देश के युवाओं ने अपना सबकुछ न्यौछावर किया था. भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, आज़ाद ने इस भारत के सपने तो नहीं देखे होंगे.


 सोचिए उस दर्द की तासीर जिसने गुझियों की थाली और सेवइयों के डोंगों की अदला-बदली रोक दी. जिसने हर शाम नुक्कड़ पर मिलने वाले दोस्तों की यारियां छीन लीं. जिसने मुसलमान भाइयों से उनकी हवेलियां हथिया लीं. जिसने हिन्दुओं के लिए लाहौर की गलियों की रोशनी ख़त्म कर दी.


हम ये शब्द लिख-पढ़ रहे हैं, मगर हज़ारों परिवारों ने ये सब सहा है. क्या आप नहीं सोचते कि ये सब क्यों हुआ. कैसे हुआ. कब हुआ. हम सब जानते हैं कि 15 अगस्त को देश आज़ाद हुआ. लेकिन देश के बंटवारे का ज़हरीला फैसला 18 जुलाई 1947 को ले लिया गया था.

 
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम

18 जुलाई 1947 को भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम को स्वीकृति मिली. इसकी नींव माउंटबेटन योजना ने रखी थी. इसमें देश की आज़ादी के बदले अंग्रेज़ों ने इसके दो टुकड़े करने की ठानी थी. इस काम के लिए चुना गया था लंदन के वकील सर सिरिल रेडक्लिफ को. 


वो रेडक्लिफ जो कभी भारत नहीं आए थे. जिन्हें न यहां की संस्कृति की जानकारी थी न तहज़ीब का इल्म था. जो सिर्फ एक नक्शे पर लकीर खींचने आ रहे थे. उन्हें नहीं पता था कि वो दुनिया का बेहद स्याह फैसला लेने जा रहे हैं. 


इस बंटवारे के तहत हिन्दू बहुल इलाके भारत में और मुस्लिम बहुल इलाके पाकिस्तान में शामिल किए जाने थे. देश के कई राज्यों को आज़ादी दी गई कि वो अपना पाला चुन लें. अधिकतर राज्यों ने धर्म के आधार पर देश चुना. विभाजन के बाद पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र में नए सदस्य के रूप में शामिल किया गया और भारत ने ब्रिटिश भारत की कुर्सी संभाली.



The Indian Independence Act 1947 Act received the royal assent
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम पर 18 जुलाई 1947 को मुहर लगी.


कौन लोग शामिल थे?

अंग्रेज़ों ने फूट डालो-राज करो की नीति के तहत 1906 में मुस्लिम लीग को मान्यता दे दी. उस समय लीग के लगभग सभी सदस्य मुसलमानों के ऊंचे तबके से आते थे. इसी तरह 1915 में बनी हिन्दू महासभा भी हिन्दुओं के ऊंचे तबके की बपौती थी. 


मुस्लिम लीग और हिन्दू महासभा-आरएसएस अपने-अपने ‘राष्ट्रों’ पर नियंत्रण स्थापित करना चाहती थीं. कांग्रेस और राष्ट्रीय स्वाधीनता आंदोलन का लक्ष्य आज़ादी पाना था. एक देश के लिए लक्ष्य अलग-अलग होंगे तो राहें मुश्किल ही होंगी. इसके बाद पंडित नेहरू ने 1937 में मुस्लिम लीग के सदस्यों को उत्तरप्रदेश की सरकार में शामिल करने से इनकार कर दिया. 


इस इनकार ने चोट का काम किया. लीग में गुस्सा बढ़ रहा था. 1945 में शिमला सम्मेलन हुआ. इसमें वायसराय लॉर्ड वेवैल के साथ देश के बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया. हालांकि यह सम्मेलन विफल रहा था. जिन्ना भी इस सम्मेलन में शामिल थे. ये वही जिन्ना हैं जिन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता पर जोर देते हुए मुस्लिम लीग के साथ लखनऊ समझौता करवाया था. लेकिन कांग्रेस से नाख़ुशी के बाद जिन्ना ने अलग देश की मांग कर ली. क्योंकि उन्हें लगने लगा कि भारत में मुसलमानों के साथ परायों जैसा बर्ताव हो रहा है.


जसवंत सिंह ने अपनी किताब ‘जिन्ना: इंडिया पार्टीशन इंडिपेंडेंस’ में जिन्ना को एक धर्मनिरपेक्ष नेता बताया है. उनका कहना है कि जिन्ना को अकारण ही खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.



nehru jinnah
एक मीटिंग में नेहरू, माउंटबेटेन और जिन्ना.


किसने विरोध किया?

विभाजन के लिए कई नेता तैयार नहीं थे. लेकिन निज़ामों ने विरोध करने वालों की एक न सुनी. आजादी के पूर्व तक बाबा साहेब अंबेडकर राजनीति में नहीं थे. दलितों के उत्‍थान के लिए लगातार काम रहे थे. लेकिन उनकी नज़र सियासत पर थी. वे लगातार भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस और उनके बड़े नेताओं महात्‍मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू की गलत और सही नीतियों की आलोचना कर रहे थे. मुस्‍लिम लीग के मोहम्‍मद अली जिन्‍ना को भी उन्‍होंने नहीं बख्‍शा था. उन्होंने विभाजन का कड़ा विरोध किया था. वो देश को अखंड देखना चाहते थे. उन्होंने इस मुद्दे पर एक किताब ‘थॉट्स ऑन पाकिस्तान’ भी लिखी.


क्या बंटा?

ब्रिटिश भारत की संपत्ति को दोनों देशों के बीच बांटा गया. माउंटबेटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपये देने की सलाह दी थी. भारत सरकार इसे टालती रही लेकिन गांधीजी ने अनशन कर यह राशि पाकिस्तान को दिलाई. इस वजह से कई लोग गांधी की आलोचना करते रहे हैं.


बंटवारे के बाद क्या हुआ

विभाजन के बाद कई महीनों तक दोनों नए देशों के बीच लोगों की आवाजाही हुई. भारत से कई मुसलमानों ने डर और अपने मुल्क की चाहत में पलायन किया तो पाकिस्तान से हिन्दुओं और सिखों ने अपना घर छोड़ दिया. जो नहीं छोड़ना चाह रहे थे उन्हें हालातों ने मजबूर कर दिया. 


लूटपाट, हत्याएं, बलात्कार जैसी तमाम घटनाओं ने इस तारीख को लोगों के ज़ेहन में काली स्याही पोत दी. कुछ अपनी दोस्ती रिश्तेदारी भूल गए, कुछ इसे बचाने के लिए जान से गए. बहन-बेटियों की लूट हुई. जिसका दंश लोग अबतक भूल नहीं पाए हैं. सीमा रेखाएं तय होने के बाद लगभग 1.45 करोड़ लोगों ने सीमा पार करके अपने ‘नए देश’ में शरण ली.


1951 की विस्थापित जनगणना के अनुसार विभाजन के बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गए और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए. पंजाब और लाहौर ने सबसे ज़्यादा दर्द सहा. आज भी न जाने कितनी कहानियां अनसुनी हैं. 


आज भी न जाने कितनी दास्तानों को लफ़्ज़ नहीं मिल सके. आंकड़ों की मानें तो इस बंटवारे में 20 लाख लोगों की जान गई. लेकिन ये सिर्फ आंकड़ा है. ट्रेनों में लाशों का जत्था, मोहल्लों में आगजनी और गांवों के पलायन में गई जानों की ठीक गिनती कर पाना नामुमकिन है.

pinjar 



फिल्मों में विभाजन

इस त्रासदी पर देश-दुनिया पर कई उपन्यास लिखे गए. कहानियां गढ़ी गईं. फिल्में-डॉक्युमेंट्री बनाई गईं. यशपाल की ‘झूठा सच’, भीष्म साहनी की ‘तमस’, अमृता प्रीतम की ‘पिंजर’, खुशवंत सिंह की ‘ट्रेन टू पाकिस्तान’ और सलमान रुश्दी की ‘मिडनाइट्स चिल्ड्रन’ (आधी रात की सन्तानें) में जो दर्द दिखाने की कोशिश हुई है वो एक नमूना भर है. 


पिंजर को फिल्म और तमस को दूरदर्शन का धारावाहिक भी बनाया गया. इसके अलावा ‘गरम हवा’, दीपा मेहता की ‘अर्थ’ (ज़मीन), कमल हसन की ‘हे राम’ भी भारत के विभाजन को दिखाती है. एक पंजाबी लड़की की जबरन मुसलमान के साथ शादी, लाहौर के ज़मीदार का भारत आकर पैसे-पैसे को तरसना, अपने एक साल के बच्चे को खो देना, पूरा का पूरा परिवार क़त्ल हो जाना, और ऐसे न जाने कितने हालात उस वक़्त एक साथ गुज़र रहे थे. इन सब को किसी फ़िल्म में समेट पाना मुमकिन ही नहीं है.


आखिर में भारत भूषण अग्रवाल की ये लाइनें पढ़िए-

तुमने सारे ठाठ इस आधार पर बनाए थे
कि एक की विजय
और दूसरे की पराजय होगी
तुमने दुनिया के लोगों को
या तो शत्रु समझा
या फिर मित्र
यानी तुम दो की सत्ता में विश्वास करते रहे
यह भूलकर
कि यह विभाजन दुनिया का नहीं
तुम्हारे मन का अपना है.



सोर्स:लल्लनटॉप
loading...

rakshabandhan schedule according to hindu mythology is this rakshabandhan schedule according to hindu mythology is this


भाई-बहन के प्रेम का त्यौहार माना जाना वाला पर्व रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाएगा। यह तिथि आगामी सात अगस्त को पड़ रही है। लेकिन भारतीय काल गणना के अनुसार इस बार भाई-बहन के लिए यह पर्व मनाने का शुभ मुहूर्त काफी कम समय का है। इसका एक कारण इस श्रावण पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण पड़ना भी है। 


बता दें कि सोमवार 10 जुलाई से श्रावण (सावन) मास आरंभ हो रहा है। यह मास विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी है। इस बार सावन में पांच सोमवार भी पड़ रहे हैं। वहीं सावन के आखिरी सोमवार 7 अगस्त को रक्षाबंधन है। 



लेकिन इसी दिन चंद्र ग्रहण भी पड़ेगा। ऐसे में भद्रा और सूतकों के चलते राखी बांधने के लिये बहिनों को केवल दो घंटे 45 मिनट का समय ही शुभ रहेगा। मथुरा के ज्योतिषाचार्य पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया 6 अगस्त रविवार की रात्रि 10 बजकर 29 मिनट से भद्रा लग जायेंगी। जो 7 अगस्त रक्षाबंधन के दिन सुबह 11 बजकर 7 मिनट तक रहेंगी। 



वहीं इसी दिन दोपहर के 1 बजकर 52 मिनट से सूतक लग जाएंगे। ऐसे में बहिनों को इसी समयावधि दो घंटा 45 मिनट ही राखी बांधने के लिए शुभ रहेगा। इस दिन रात्रि में 10 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक पूरे भारत में चंद्रग्रहण दिखेगा। 




सोर्स:अमरउजाला
loading...

 at the age of 99 released from prison

99 वे साल का एक कैदी आज जेल से आजाद हुआ। वह बिना सहारे चलने की स्थिति में नहीं था। जेल से बाहर उसे ना तो कोई लेने आया और ना ही उसके चेहरे पर आजादी की खुशी नजर आ रही थी। बस उसने इतना ही बोला, बाबूजी धीरे चलना। शायद उसका मतलब था कि जोश में एेसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे बुढ़ापा जेल में कटे।


कोटा सेंट्रल जेल से आज 99 साल का रामचंद्र रिहा हुआ। बारां जिले के बापचा थाना इलाके में कान्याखेडी गांव में मामूली विवाद के दौरान हुई हत्या के मामले में रामच्रंद को उम्र कैद की सजा मिली थी। 11 साल तक फरारी काटने के बाद रामचंद्र गिरफ्तार हुआ था।


इसके बाद न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा के 16 साल उसने सेंट्रल जेल में कैदियों के बीच काटे। यहां आकर उसने खुद को अच्छे व्यवहार में ढाला और आज इसकी बदौलत रिहा भी हो गया।


खुली जेल के 60 कैदियों में सबसे उम्रदराज था ये...


 at the age of 99 released from prison
रामचंद्रPC: amar ujala

रामचंद्र के अच्छे व्यवहार को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे खुली जेल में शिफ्ट कर दिया। वर्ष 2015 से खुली जेल में दो साल के अच्छे आचरण और उम्र को देखते हुए जेल प्रशासन ने उसे रिहाई के लिए प्रयास शुरू किए, जिसमें उन्हे सफलता मिली। पांच महीने पहले ही उसकी रिहाई के आदेश महानिदेशालय पुलिस से कोटा जेल प्रशासन को मिले।


कोटा खुली जेल में लगभग 60 कैदी अपने गुनाहों की सजा काट रहे हैं, जिसमें यह उम्रदराज कैदी रामचंद्र एक था। उम्र का बड़ा हिस्सा रामचंद्र ने जेल में गुजारा है, लेकिन रिहाई ने जेल के अनुभव के साथ बड़ा संदेश इस बुजुर्ग को देने के लिए मजबूर कर दिया। अपने गुनाह की माफी तो रामचंद्र मांग रहा है।



 सोर्स:अमरउजाला
loading...

patwatoli-village-engineers

जहां एक तरफ बिहार में 12वीं के नतीजों में हुई धांधली ने वहां की शिक्षा व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी। वहीं, उसी राज्य में ही एक गांव ऐसा भी है, जहां के बच्चे अपनी मेहनत के बलबूते पर अपना मुकाम हासिल कर रहे हैं। बिहार के गया जिले का पटवाटोली गांव बुनकरों की एक बस्ती है। यह गांव बिहार ही नहीं, देशभर में हर साल चर्चा का विषय बना रहता है।



पटवाटोली गांव बुनकरों की आबादी के लिए जाना जाता है। 1992 से यह गांव ‘IIT हब’ बनकर उभरा है। यहां की 10 हजार की आबादी में से अब तक 300 से ज्यादा इंजीनियर निकल चुके हैं। इनमें से कई दुनिया के अलग-अलग देशों की बड़ी कंपनियों में उंचे पदों पर कार्य कर रहे हैं।


IIT


इस साल इस गांव के 20 छात्रों ने आईआईटी परीक्षा में कामयाबी हासिल की है। कई बच्चों के माता-पिता ने खुद भूखे पेट रहकर अपने बच्चों को पढ़ाया है। आज वह अपने बच्चों की सफलता से फुले नहीं समां रहे हैं।



patwatoli-village-engineers


मूलभूत सुविधाओं से परे अपना जीवन यापन कर रहे इस गांव के बच्चों को इंजीनियर बनने की प्रेरणा जीतेंद्र प्रसाद से मिली। जीतेंद्र प्रसाद सबसे पहले ऐसे व्यक्ति थे, जो पटवाटोली से 1992 में आईआईटी में सिलेक्ट हुए। जितेंद्र प्रसाद 2000 में नौकरी करने अमेरिका चले गए।



उनकी इसी सफलता ने पटवाटोली के छात्रों में इंजीनियर बनने की ललक जगाई कि मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। बच्चों के परिवारवालों ने भी प्रसाद की कामयाबी को देख अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना शुरू किया। शिक्षा के महत्व को जाना।


patwatoli-village-engineers




पूर्व इंजीनियर छात्र भी भविष्य में इंजीनियर बनने की चाह रखने वाले बच्चों की सहायता करते हैं। इसी दिशा में पटवाटोली के पूर्व इंजीनियरिंग छात्रों ने मिलकर नवप्रयास नाम से एक संस्था बनाई, जो IIT की परीक्षा देने वाले छात्रों को पढ़ाई में मदद करती है।


patwatoli-village-engineers

इस पटवाटोली गांव ने आर्थिक मंदी का दौर भी देखा है। आर्थिक तंगी के बावजूद भी तब से लेकर अब तक अभाव में रहने वाले पटवाटोली गांव के बच्चे लगातार अपने इलाके का नाम रौशन कर रहे हैं और कई अन्य बच्चों को भी प्रेरित कर रहे हैं।




सोर्स:TopYaps
loading...

What-is-the-Impact-of-GST-in-Manufacturing-Sector

एक समान कर वाला जीएसटी लागू होने में अब ज्यादा वक्त नहीं रह गया है। जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स 1 जुलाई से लागू हो जाएगा। जीएसटी एक ऐसा टैक्स है, जो टैक्स के भारी जाल से मुक्ति दिलाएगा।



जीएसटी आने के बाद बहुत सी चीजें सस्ती हो जाएंगी, जबकि कुछ जेब पर भारी भी पड़ेंगी। जीएसटी काउंसिल की 16वीं बैठक में 66 वस्तुओं की टैक्स दरों में संशोधन करने का फैसला किया गया है। आइए देखते हैं जीएसटी लागू होने से किन चीजों पर पड़ेगा असर-


1. सोना होगा महंगा

Gold

पूरे देश को एक बाजार बनाने वाली कर व्यवस्था यानी जीएसटी लागू होने के बाद देश के ज्यादातर हिस्सों में सोना महंगा हो सकता है। सोने पर इस समय 1 फीसदी उत्पाद शुल्क और राज्यों द्वारा 1 फीसदी वैट लगाया जाता है। इन दरों को ध्यान में रखते हुए, सोना और स्वर्ण आभूषणों पर 3 फीसदी टैक्स लगाने का फैसला किया गया है।



2. कपड़े होंगे सस्ते

सभी तरह के कपड़ों पर पांच फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा, जबकि 1,000 रुपये तक के परिधानों पर 5 फीसदी की निम्न दर से जीएसटी लागू होगा। वर्तमान में इस पर 7 फीसदी की दर से कर लगता है। एक हजार रुपये से अधिक मूल्य के कपड़ों पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा।



3. जूते-चप्पल सस्ते

500 रुपये से कम के फुटवियर पर 5 पर्सेंट जीएसटी लगाने का फैसला लिया गया है, जबकि पहले 500 रुपये तक के चप्पल जूतों पर 9.5 फीसदी लगता था। मतलब पहले 5 00 के जूते पर करीब 48 रुपये टैक्स लगता था, अब 25 रूपए टैक्स देना होगा। 500 रुपये से ज्यादा कीमत के फुटवेयर पर 18 पर्सेंट टैक्स लगेगा। पहले करीब 23 फीसदी लगता था।




4. बिस्किट सस्ता

बिस्किट पर जीएसटी स्लैब 18 फीसदी पर तय किया गया है। पहले 1 रुपए किलो तक मूल्य वाले बिस्किट पर औसतन 2.6 फीसदी, जबकि इससे अधिक दाम के बिस्किट पर 23.11 फीसदी की दर से कर लगाया जाता था।



5. अनाज, चीनी, चाय और कॉफी होगी सस्ती

GST Daily GOODS

चीनी, खाद्य तेल, नार्मल टी और कॉफी पर जीएसटी के अंतर्गत 5 फीसद की दर से टैक्स लगेगा, मौजूदा समय में यह दर 4 से 6 फीसद है। जीएसटी काउंसिल ने अनाजों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा है, यानी इन पर कोई कर नहीं लगेगा। इसी तरह गेहूं, चावल सहित अनाज जैसी आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी से छूट दी गई है।




6. हेयर ऑयल, साबुन होगा सस्ता

जीएसटी काउंसिल की ओर से तय की गई दरों के मुताबिक, जीएसटी के अंतर्गत 18 फीसद की दर से टैक्स लगेगा। यह मौजूदा दर से काफी कम है। इस समय हेयर ऑयल और साबुन पर 28 फीसद की दर से टैक्स लगता है।



7. मीट, दूध और दही सस्ते

मीट, दूध, दही, ताजी सब्जियां, शहद, गुड़, प्रसाद, कुमकुम, बिंदी और पापड़ को जीएसटी दायरे से बाहर रखा गया है। इसके कारण ये चीजें सस्ती होंगी क्योंकि जीएटी लागू होने के बाद इन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, जबकि अब तक इन उत्पादों पर वैट लगता था।




8. कोयला हो जाएगा सस्ता

जीएसटी आने के बाद कोयला सस्ता हो जाएगा। काउंसिल ने कोयले पर जीएसटी की दर 5 फीसद तय की है। आपको बता दें कि यह दर मौजूदा समय में 11.7 फीसद है। कोयले के सस्ते होने से बिजली उत्पादन की लागत भी कम होगी।




9. आइसक्रीम सस्ती

प्रोसेस्ड फूड, कनफेक्शनरी उत्पाद और आइसक्रीम पर टैक्स की दर 18 फीसदी होगी जो पहले 22 फीसदी थी। पहले 1 रु की आइसक्रीम पर 22 रु टैक्स देना होता था अब 1 रुपये के आइसक्रीम पर 18 रुपये टैक्स देना होगा।




10. शैंपू, परफ्यूम महंगे

नहाने के शैंपू, परफ्यूम और मेक अप के उत्पादों पर 28 फीसदी टैक्स देना होगा जबकि इस पर अभी 22 फीसदी टैक्स लगता था। यानी 1 रुपये के शैंपू पर अभी 22 रुपये टैक्स लगता था अब 28 फीसदी लगेगा।




11. मोटरसाइकिल सस्ती

युवाओं में मोटरसाइकिल का बहुत क्रेज है। जीएसटी में मोटरसाइकिलें भी कुछ सस्ती हो सकती हैं। इन पर टैक्स की दर करीब एक फीसदी कम होकर 28 फीसदी रह जाएगी।




12. विमान यात्रा सस्ती

Airlines

एक जुलाई से जीएसटी के लागू होने के बाद इकोनॉमी क्लास में विमान यात्रा सस्ती हो जाएगी। इकनॉमी श्रेणी के किराये के लिए जीएसटी दर पांच फीसदी तय की गई है। अभी यह छह फीसदी है। हालांकि, बिजनेस श्रेणी में विमान से यात्रा महंगी होगी। इसके लिए कर की दर 12 फीसदी तय की गई है, जो अभी तक 9 फीसदी थी।



13. स्मार्ट फोन सस्ता

Smartphones

स्मार्टफोन भी जीएसटी में सस्ता हो जाएगा। इन पर अभी 13.5 फीसदी टैक्स लगता है। जीएसटी में इन पर 12 फीसदी कर लगाने का प्रस्ताव है। मतलब 5 हजार के स्मार्टफोन पर अभी 675 रुपये टैक्स लगता है। नई व्यवस्था में 6 रुपये टैक्स देना होगा।




14. ऐप टैक्सी सेवा सस्ती

जीएसटी के तहत उबर और ओला जैसी ऐप आधारित टैक्सी सेवा देने वाली कंपनियों से टैक्सी की बुकिंग करना सस्ता हो जाएगा। एक जुलाई से लागू होने वाली इस नई कर व्यवस्था के तहत इस तरह की सेवाएं पांच फीसदी दर की श्रेणी में आएंगी। अभी ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं से टैक्सी बुक करने पर छह फीसदी का कर लगता है।



15. मोबाइल बिल महंगा

टेलिकॉम सेवाएं जीएसटी के अंतर्गत महंगी होंगी। सरकार ने इसे 18 फीसदी कर के दायरे में रखा है। फिलहाल मोबाइल बिल पर 15 फीसदी टैक्स लगता है।




16. बीमा कवर महंगा

बीमा पॉलिसी लेना आगामी एक जुलाई महंगा हो जाएगा। जीएसटी परिषद ने इस पर 18 फीसदी की दर से टैक्स लेने का फैसला लिया है। फिलहाल बीमा क्षेत्र पर सेवा कर, उपकर के साथ 15 फीसदी है।




17. रेस्तरां में खाना होगा महंगा

Restaurant

एक जुलाई से रेस्टोरेंट में खाना महंगा हो जाएगा। अभी आपके खाने के पूरे बिल पर वैट लगाकर 11 फीसदी टैक्स लगता है। जीएसटी में इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है। यानी नॉन-एसी रेस्तरां में फूड बिल पर 12फीसदी टैक्स यानी 1फीसदी ज्यादा लगेगा। इसी तरह शराब लाइसेंस और एसी वाले रेस्तरां में खाने पर 18फीसदी टैक्स यानी 7फीसदी ज्यादा लगेगा। इसके अलावा लग्जरी रेस्तरां में 28फीसदी टैक्स रेट लागू होगा यानी 17फीसदी महंगा पड़ेगा।



18. कार महंगी

जीएसटी के तहत सभी कारों पर 28 फीसदी का टैक्स लगाया गया है, वहीं छोटी कारों पर एक फीसदी का सेस तो एसयूवी और अन्य लग्जरी कारों पर 15 फीसदी तक का सेस लगाया गया है। ऑटो क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, इस कदम से छोटी कारों की लागत बढ़ेगी और इसका बोझ ग्राहकों को उठाना पड़ेगा।




19. स्लीपर क्लास का टिकट सस्ता


ट्रांसपोर्टेशन पर पांच फीसदी की दर से जीएसटी लगाने का निर्णय हुआ है। ट्रेन में जनरल डिब्बे, स्लीपर और जनरल बस में यात्रा करने पर अब भी कोई सर्विस टैक्स नहीं लगेगा। पहले स्लीपर क्लास के टिकट पर 2 रु. सर्विस टैक्स लगता था। वहीं एसी में ट्रेन का सफर या एसी बसों में यात्रा पर 5 फीसदी सर्विस टेक्स देना होगा।



20. टूर पैकेज महंगा

जीएसटी के लागू होने के बाद टूर एंड ट्रैवल थोड़ा महंगा हो जाएगा। GST में टूर एंड ट्रैवल पर 18फीसदी टैक्स लगेगा। अभी 15फीसदी लगता है, यानी टैक्स रेट 3फीसदी बढ़ जाएगा। अगर पहले 1 हजार का टूर पैकेज था तो उस पर 15 रुपये टैक्स लगता था , जो अब बढ़कर 18 रुपये हो जाएगा।



21. घर सजाना थोड़ा सस्ता

किचन सामान पर 11.5 फीसदी, लाइट फिटिंग पर अब 7.25 फीसदी टैक्स लगेंगे।



22. कॉयर मैट्रेस, कॉटन पिलो

1 जुलाई से बेड पर आराम के सामान सस्ते हो जाएंगे। पहले किसी गद्दे की कीमत अगर 1 हजार थी तो उस पर 35 रुपये टैक्स लगता था अब सिर्फ 18 रुपये टैक्स लगेंगे।



23. लेदर से बने बैग सस्ते

चमड़े के बने बैग पर इस समय टैक्स और वैट मिलाकर 3.5 फीसदी टैक्स देना होता है। एक जुलाई से इस पर 28 फीसदी टैक्स देना होगा। अगर कोई बैग 2 हजार रु का है तो उस पर अभी 7 रुपये टैक्स लगते हैं अब 56 रुपये लगेंगे।



24. मोबाइल फोन महंगे

मोबाइल फोन पर जीएसटी में 12 फीसदी टैक्स रहेगा। इससे ज्यादातर राज्यों में मोबाइल हैंडसेट पर टैक्स 4-5 फीसदी बढ़ जाएगा। अभी करीब 6 फीसदी टैक्स लगता है। अगर एक मोबाइल अभी 5 हजार का है तो उस पर 3 रुपये टैक्स लगता है 1 जुलाई के बाद 6 रुपये टैक्स देना पड़ेगा।



25. नैपकिन, टिश्यू पेपर सस्ता

नैपकिन और टिश्यू पेपर पर इस समय एक्साइज, वैट और एंट्री टैक्स मिलाकर 3.5 फीसदी टैक्स लगता है। जीएसटी लागू होने के बाद 18 फीसदी टैक्स लगेगा। मतलब अगर कोई नैपकिन 3 रुपये का है तो उस पर अभी करीब 91 रुपये टैक्स देना होता है अब सिर्फ 54 रुपये देने होंगे।




सोर्स:TopYaps 
loading...

Diamond-used-to-sold-out-openly-at-this-indian-market-cover


दुनिया के बहुत से खूबसूरत और संपन्न शहरों के बारे में आप जानते ही होंगे, पर क्या आप जानते हैं कि प्राचीन समय में दुनिया का सबसे संपन्न और खूबसूरत शहर अपने भारत में ही था? यदि नहीं, तो आज हम आपको बता रहें हैं भारत के इस प्राचीन शहर के बारे में जिसके अवशेष आज भी इस शहर की खूबसूरती और संपन्नता के सबूत बने हुए हैं।



भारत प्राचीन काल से ही संपन्न रहा है, भारत को अन्य देशों के लोग “सोने की चिड़िया” यू ही नहीं बुलाते थे। असल में भारत का इतिहास बेहद संपन्न रहा है। इसी क्रम में आज हम आपको बता रहें हैं एक ऐसे राज्य के बारे में जोकि अपने समय में विश्व का सबसे समृद्ध राज्य था और यहां लोग दूर-दूर से इसकी खूबसूरती और भव्यता को देखने के लिए आते थे, तो आइए जानते हैं इस शहर के बारे में।


Diamond used to sold out openly at this indian market


विश्व में सबसे ज्यादा खूबसूरत और संपन्न भारत के इस शहर का नाम “हम्पी” है। आज भले ही यह शहर खंडर में तब्दील हो गया हो पर आज से 500 वर्ष पहले इस शहर में करीब 5 लाख लोग रहते थे और यह शहर इतना ज्यादा शक्तिशाली था कि 300 वर्षों तक इस पर आक्रमण करने की हिम्मत किसी भी देश में नहीं हुई। बहुत से लोगों का मानना है कि हम्पी ही रामायण काल का “किष्किंधा” नामक राज्य था।


Diamond used to sold out openly at this indian market



14 वीं शताब्दी में यह शहर दक्षिण भारत के विजयनगर राज्य की राजधानी बना था। सन् 1509 से 1529 तक यहां के राजा कृष्णदेव राय ने शासन किया था। इस शहर में स्थित विरुपाक्ष मंदिर के सामने ही हीरों का बाजार खुलेआम लगता था और देश विदेश के लोग यहां हीरे खरीदने के लिए आते थे। सन् 1565 में हुए ताली कोटा नामक युद्ध में इस शहर का विनाश हो गया था।



इस शहर को 6 महीने तक लूटा गया था और उसके बाद में इस शहर को आग लगा दी गई थी। इस शहर के बचे अवशेषों पर रिसर्च करने के लिए आज भी आर्कियोलॉजिस्ट आते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस शहर की जमीन के अंदर में आज भी यहां का मूल राजभवन दफन है, इसलिए आर्कियोलॉजिस्ट विभाग के अधिकारी जगह-जगह पर खुदाई का कार्य भी करते रहते हैं।




सोर्स:वाह गज़ब 

loading...

12th-topper-varshil-shahs-interesting-decision-be-a-monk-wants-to-send-message-of-peace-across-the-world 12th-topper-varshil-shahs-interesting-decision-be-a-monk-wants-to-send-message-of-peace-across-the-world


हर एक छात्र के आंखों में परीक्षाओं में बेहतर अंक हासिल कर डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, आईएएस आदि बनने के ख्वाब होते हैं. कुछ छात्रों का यह सपना पूरा भी हो जाता है लेकिन कुछ छात्र ऐसे भी होते हैं जो टॉप करने के बाद दुनिया में कुछ अलग ही बनने के सपने देखते हैं.



कुछ ऐसे ही छात्रों में शुमार है 17 वर्षीय वार्शिल शाह का नाम. वार्शिल अहमदाबाद के मध्यम परिवार से आते हैं उन्होंने हाल ही में गुजरात बोर्ड द्वारा आयोजित 12वीं कक्षा की परीक्षा 99.9 फीसदी अंक हासिल कर सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है.



वार्शिल देश के बेहतरीन कॉलेजों में दाखिला लेकर अपना बेहतर करियर बना सकते हैं लेकिन उन्होंने अपने आगे के करियर की डगर खुद ही चुनी है.



वार्शिल ने किसी कॉलेज में एडमिशन लेने कि बजाए जैन भिक्षु बनने का फैसला किया है. वह आगामी आठ जून को जैन भिक्षु बनने के लिए दीक्षा लेने वाले हैं.



इस बारे में जानकारी देते हुए वार्शिल के चाचा नयनभाई सुठारी ने कहा कि दीक्षा कार्यक्रम गांधीनगर में आयोजित किया जाएगा. वैसे तो परीक्षा परिणाम उसकी उम्मीदों के अनुरूप है, लेकिन दुनिया में शांति की स्थापना के लिए यही रास्ता बेहतर है.



वार्शिल तीन साल पहले मुनि श्री कल्याण रत्न विजय जी के संपर्क में आया था. इसके बाद वह आध्यात्म की राह पर मुड़ गया. वार्शिल सफलता के लिए कड़ी मेहनत की बजाए शांत दिमाग से काम करना पसंद करता है. वह दीक्षा लेने के लिए अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने का इंतजार था.



पेशे से आयकर अधिकारी वार्शिल के पिता जिगरभाई और मां अमीबेन शाह अपने बेटे के इस फैसले से काफी खुश हैं. इतना ही नहीं वार्शिल की बड़ी बहन जैनिनी भी अपने भाई के फैसले के साथ है.



गौरतलब है कि 27 मई को आए गुजरात हायर सेकंडरी एजुकेशन बोर्ड के परीक्षा परिणाम में वार्शिल ने टॉप किया है.



सोर्स:इंडिया.कॉम
loading...

India's most powerful rocket GSLV Mark-3 India's most powerful rocket GSLVmark-3


 देश का सबसे ताकतवर और अब तक का सबसे भारी उपग्रह प्रक्षेपण रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 अपनी पहली उड़ान के लिए तैयार है। यह श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से सोमवार को शाम 5.28 बजे प्रक्षेपित किया जाएगा। यह ऐतिहासिक प्रक्षेपण चार टन श्रेणी के उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की दिशा में भारत के लिए नए अवसर खोलेगा।


 
वैज्ञानिक इस लॉन्चिंग को स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़े बदलाव लाने वाले मिशन के तौर पर देख रहे हैं। इसरो के पूर्व अध्यक्ष और मौजूदा सलाहकार के. राधाकृष्णन ने कहा कि यह प्रक्षेपण बड़ा मील का पत्थर है क्योंकि इसरो प्रक्षेपण उपग्रह की क्षमता 2.2-2.3 टन से करीब दोगुना करके 3.5-04 टन कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज अगर भारत को 2.3 टन से अधिक के संचार उपग्रह का प्रक्षेपण करना हो तो हमें विदेश जाना पड़ता है। 



जीएसएलवी मार्क-3 के कामकाज शुरू करने के बाद हम संचार उपग्रहों के प्रक्षेपण में आत्मनिर्भर हो जाएंगे और हमें विदेशी ग्राहकों को लुभाने में भी सफल होंगे। 2000 में मंजूर जीएसएलवी मार्क-3 कार्यक्रम से करीबी रूप से जुड़े रहे राधाकृष्णन ने कहा कि यह भविष्य में इसरो का मजबूत प्रक्षेपण यान होने वाला है। इस अभियान के सफल होने से चार टन वजनी उपग्रहों का प्रक्षेपण करने वाले देशों की कतार में भारत भी शामिल हो जाएगा। इस सफलता से हम विदेशी उपभोक्ताओं को आकर्षित करने में सफल होंगे।



साकार होगी अंतरिक्ष में मानव भेजने की योजना

India's most powerful rocket GSLVmark-3 

जीएसएलवी मार्क-3 की कल्पना करने वाले पूर्व इसरो चेयरमैन के. कस्तूरीरंगन ने कहा कि यह रॉकेट भविष्य में भारतीयों को अंतरिक्ष में ले जाने वाला यान साबित होगा। उल्लेखनीय है कि इसरो अंतरिक्ष में मानव भेजने की योजना पहले ही तैयार कर चुका है। यदि सरकार उसे तीन से चार अरब डॉलर तक राशि की मंजूरी देती है तो वह अंतरिक्ष में दो-तीन सदस्यीय चालक दल को भेजेगा। यदि यह योजना साकार होती है तो भारत रूस, अमेरिका और चीन के बाद चौथा ऐसा देश होगा जिसका एक मानवीय अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम भी होगा।



भारत के लिए क्यों अहम है यह प्रयोग

तेजी से बदलते साइबर सुरक्षा के माहौल में भारत को तुरंत पूरी तरह से नई इंटरनेट सुविधा की आवश्यकता है। संचार क्रांति के इस दौर में देश ऑप्टिकल फाइबर, कॉपर आधारित टेलीफोन और मोबाइल सेलुलर सेवाओं पर ही निर्भर नहीं रह सकता। मौजूदा समय में उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा संचार का एक मजबूत और सुरक्षित रूप है। इसरो चेयरमैन ए. एस. किरण कुमार ने कहा कि नए रॉकेट से नए संचार उपग्रहों के साथ यह एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रयोग है।



जीएसएलवी मार्क-3 की खासियत

India's most powerful rocket GSLVmark-3 

- इसरो द्वारा विकसित किया गया यह अत्याधुनिक उपग्रह प्रक्षेपण रॉकेट है।
- इसकी वहनीय क्षमता मौजूदा जीएसएलवी मार्क-2 की दो टन की क्षमता से दोगुना है।
- यह दो ठोस, एक द्रव नोदक कोर और एक क्रायोजेनिक चरण वाला तीन चरणों का रॉकेट है।
- इसका वजन पांच पूरी तरह से भरे बोइंग जम्बो विमान या 200 हाथियों के बराबर है।
- यह भविष्य का स्वदेशी रॉकेट है जो भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में ले जाएगा।



जीसैट-19 की खूबियां

- अकेला जीसैट-19 पुराने किस्म के 6-7 संचार उपग्रहों के बराबर काम करेगा।
- जीसैट-19 का वजन तीन टन से अधिक है जो किसी हाथी के बराबर है।
- भारत में बना और प्रक्षेपित होने वाला अब तक का सबसे भारी उपग्रह है।
- आयतन के हिसाब से भारत में बना यह सबसे बड़ा उपग्रह है।
- पहली बार इसमें स्वदेशी लीथियम आयन बैटरियों का इस्तेमाल किया गया है।
- पहली बार नए तरीके की मल्टीपल फ्रीक्वेंसी बीम का भी प्रयोग हुआ है।
- इससे इंटरनेट की गति और कनेक्टिविटी दोनों बढ़ जाएगी।
- हीट पाइप, फाइबर ऑप्टिक जायरो, माइक्रो-मैकेनिकल सिस्टम्स एक्सीलेरोमीटर से लैस है।




सोर्स:अमरउजाला

loading...

योगदान देने वाला व्यक्ति

Blogger द्वारा संचालित.