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What-is-the-Impact-of-GST-in-Manufacturing-Sector

एक समान कर वाला जीएसटी लागू होने में अब ज्यादा वक्त नहीं रह गया है। जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स 1 जुलाई से लागू हो जाएगा। जीएसटी एक ऐसा टैक्स है, जो टैक्स के भारी जाल से मुक्ति दिलाएगा।



जीएसटी आने के बाद बहुत सी चीजें सस्ती हो जाएंगी, जबकि कुछ जेब पर भारी भी पड़ेंगी। जीएसटी काउंसिल की 16वीं बैठक में 66 वस्तुओं की टैक्स दरों में संशोधन करने का फैसला किया गया है। आइए देखते हैं जीएसटी लागू होने से किन चीजों पर पड़ेगा असर-


1. सोना होगा महंगा

Gold

पूरे देश को एक बाजार बनाने वाली कर व्यवस्था यानी जीएसटी लागू होने के बाद देश के ज्यादातर हिस्सों में सोना महंगा हो सकता है। सोने पर इस समय 1 फीसदी उत्पाद शुल्क और राज्यों द्वारा 1 फीसदी वैट लगाया जाता है। इन दरों को ध्यान में रखते हुए, सोना और स्वर्ण आभूषणों पर 3 फीसदी टैक्स लगाने का फैसला किया गया है।



2. कपड़े होंगे सस्ते

सभी तरह के कपड़ों पर पांच फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा, जबकि 1,000 रुपये तक के परिधानों पर 5 फीसदी की निम्न दर से जीएसटी लागू होगा। वर्तमान में इस पर 7 फीसदी की दर से कर लगता है। एक हजार रुपये से अधिक मूल्य के कपड़ों पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा।



3. जूते-चप्पल सस्ते

500 रुपये से कम के फुटवियर पर 5 पर्सेंट जीएसटी लगाने का फैसला लिया गया है, जबकि पहले 500 रुपये तक के चप्पल जूतों पर 9.5 फीसदी लगता था। मतलब पहले 5 00 के जूते पर करीब 48 रुपये टैक्स लगता था, अब 25 रूपए टैक्स देना होगा। 500 रुपये से ज्यादा कीमत के फुटवेयर पर 18 पर्सेंट टैक्स लगेगा। पहले करीब 23 फीसदी लगता था।




4. बिस्किट सस्ता

बिस्किट पर जीएसटी स्लैब 18 फीसदी पर तय किया गया है। पहले 1 रुपए किलो तक मूल्य वाले बिस्किट पर औसतन 2.6 फीसदी, जबकि इससे अधिक दाम के बिस्किट पर 23.11 फीसदी की दर से कर लगाया जाता था।



5. अनाज, चीनी, चाय और कॉफी होगी सस्ती

GST Daily GOODS

चीनी, खाद्य तेल, नार्मल टी और कॉफी पर जीएसटी के अंतर्गत 5 फीसद की दर से टैक्स लगेगा, मौजूदा समय में यह दर 4 से 6 फीसद है। जीएसटी काउंसिल ने अनाजों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा है, यानी इन पर कोई कर नहीं लगेगा। इसी तरह गेहूं, चावल सहित अनाज जैसी आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी से छूट दी गई है।




6. हेयर ऑयल, साबुन होगा सस्ता

जीएसटी काउंसिल की ओर से तय की गई दरों के मुताबिक, जीएसटी के अंतर्गत 18 फीसद की दर से टैक्स लगेगा। यह मौजूदा दर से काफी कम है। इस समय हेयर ऑयल और साबुन पर 28 फीसद की दर से टैक्स लगता है।



7. मीट, दूध और दही सस्ते

मीट, दूध, दही, ताजी सब्जियां, शहद, गुड़, प्रसाद, कुमकुम, बिंदी और पापड़ को जीएसटी दायरे से बाहर रखा गया है। इसके कारण ये चीजें सस्ती होंगी क्योंकि जीएटी लागू होने के बाद इन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, जबकि अब तक इन उत्पादों पर वैट लगता था।




8. कोयला हो जाएगा सस्ता

जीएसटी आने के बाद कोयला सस्ता हो जाएगा। काउंसिल ने कोयले पर जीएसटी की दर 5 फीसद तय की है। आपको बता दें कि यह दर मौजूदा समय में 11.7 फीसद है। कोयले के सस्ते होने से बिजली उत्पादन की लागत भी कम होगी।




9. आइसक्रीम सस्ती

प्रोसेस्ड फूड, कनफेक्शनरी उत्पाद और आइसक्रीम पर टैक्स की दर 18 फीसदी होगी जो पहले 22 फीसदी थी। पहले 1 रु की आइसक्रीम पर 22 रु टैक्स देना होता था अब 1 रुपये के आइसक्रीम पर 18 रुपये टैक्स देना होगा।




10. शैंपू, परफ्यूम महंगे

नहाने के शैंपू, परफ्यूम और मेक अप के उत्पादों पर 28 फीसदी टैक्स देना होगा जबकि इस पर अभी 22 फीसदी टैक्स लगता था। यानी 1 रुपये के शैंपू पर अभी 22 रुपये टैक्स लगता था अब 28 फीसदी लगेगा।




11. मोटरसाइकिल सस्ती

युवाओं में मोटरसाइकिल का बहुत क्रेज है। जीएसटी में मोटरसाइकिलें भी कुछ सस्ती हो सकती हैं। इन पर टैक्स की दर करीब एक फीसदी कम होकर 28 फीसदी रह जाएगी।




12. विमान यात्रा सस्ती

Airlines

एक जुलाई से जीएसटी के लागू होने के बाद इकोनॉमी क्लास में विमान यात्रा सस्ती हो जाएगी। इकनॉमी श्रेणी के किराये के लिए जीएसटी दर पांच फीसदी तय की गई है। अभी यह छह फीसदी है। हालांकि, बिजनेस श्रेणी में विमान से यात्रा महंगी होगी। इसके लिए कर की दर 12 फीसदी तय की गई है, जो अभी तक 9 फीसदी थी।



13. स्मार्ट फोन सस्ता

Smartphones

स्मार्टफोन भी जीएसटी में सस्ता हो जाएगा। इन पर अभी 13.5 फीसदी टैक्स लगता है। जीएसटी में इन पर 12 फीसदी कर लगाने का प्रस्ताव है। मतलब 5 हजार के स्मार्टफोन पर अभी 675 रुपये टैक्स लगता है। नई व्यवस्था में 6 रुपये टैक्स देना होगा।




14. ऐप टैक्सी सेवा सस्ती

जीएसटी के तहत उबर और ओला जैसी ऐप आधारित टैक्सी सेवा देने वाली कंपनियों से टैक्सी की बुकिंग करना सस्ता हो जाएगा। एक जुलाई से लागू होने वाली इस नई कर व्यवस्था के तहत इस तरह की सेवाएं पांच फीसदी दर की श्रेणी में आएंगी। अभी ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं से टैक्सी बुक करने पर छह फीसदी का कर लगता है।



15. मोबाइल बिल महंगा

टेलिकॉम सेवाएं जीएसटी के अंतर्गत महंगी होंगी। सरकार ने इसे 18 फीसदी कर के दायरे में रखा है। फिलहाल मोबाइल बिल पर 15 फीसदी टैक्स लगता है।




16. बीमा कवर महंगा

बीमा पॉलिसी लेना आगामी एक जुलाई महंगा हो जाएगा। जीएसटी परिषद ने इस पर 18 फीसदी की दर से टैक्स लेने का फैसला लिया है। फिलहाल बीमा क्षेत्र पर सेवा कर, उपकर के साथ 15 फीसदी है।




17. रेस्तरां में खाना होगा महंगा

Restaurant

एक जुलाई से रेस्टोरेंट में खाना महंगा हो जाएगा। अभी आपके खाने के पूरे बिल पर वैट लगाकर 11 फीसदी टैक्स लगता है। जीएसटी में इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है। यानी नॉन-एसी रेस्तरां में फूड बिल पर 12फीसदी टैक्स यानी 1फीसदी ज्यादा लगेगा। इसी तरह शराब लाइसेंस और एसी वाले रेस्तरां में खाने पर 18फीसदी टैक्स यानी 7फीसदी ज्यादा लगेगा। इसके अलावा लग्जरी रेस्तरां में 28फीसदी टैक्स रेट लागू होगा यानी 17फीसदी महंगा पड़ेगा।



18. कार महंगी

जीएसटी के तहत सभी कारों पर 28 फीसदी का टैक्स लगाया गया है, वहीं छोटी कारों पर एक फीसदी का सेस तो एसयूवी और अन्य लग्जरी कारों पर 15 फीसदी तक का सेस लगाया गया है। ऑटो क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, इस कदम से छोटी कारों की लागत बढ़ेगी और इसका बोझ ग्राहकों को उठाना पड़ेगा।




19. स्लीपर क्लास का टिकट सस्ता


ट्रांसपोर्टेशन पर पांच फीसदी की दर से जीएसटी लगाने का निर्णय हुआ है। ट्रेन में जनरल डिब्बे, स्लीपर और जनरल बस में यात्रा करने पर अब भी कोई सर्विस टैक्स नहीं लगेगा। पहले स्लीपर क्लास के टिकट पर 2 रु. सर्विस टैक्स लगता था। वहीं एसी में ट्रेन का सफर या एसी बसों में यात्रा पर 5 फीसदी सर्विस टेक्स देना होगा।



20. टूर पैकेज महंगा

जीएसटी के लागू होने के बाद टूर एंड ट्रैवल थोड़ा महंगा हो जाएगा। GST में टूर एंड ट्रैवल पर 18फीसदी टैक्स लगेगा। अभी 15फीसदी लगता है, यानी टैक्स रेट 3फीसदी बढ़ जाएगा। अगर पहले 1 हजार का टूर पैकेज था तो उस पर 15 रुपये टैक्स लगता था , जो अब बढ़कर 18 रुपये हो जाएगा।



21. घर सजाना थोड़ा सस्ता

किचन सामान पर 11.5 फीसदी, लाइट फिटिंग पर अब 7.25 फीसदी टैक्स लगेंगे।



22. कॉयर मैट्रेस, कॉटन पिलो

1 जुलाई से बेड पर आराम के सामान सस्ते हो जाएंगे। पहले किसी गद्दे की कीमत अगर 1 हजार थी तो उस पर 35 रुपये टैक्स लगता था अब सिर्फ 18 रुपये टैक्स लगेंगे।



23. लेदर से बने बैग सस्ते

चमड़े के बने बैग पर इस समय टैक्स और वैट मिलाकर 3.5 फीसदी टैक्स देना होता है। एक जुलाई से इस पर 28 फीसदी टैक्स देना होगा। अगर कोई बैग 2 हजार रु का है तो उस पर अभी 7 रुपये टैक्स लगते हैं अब 56 रुपये लगेंगे।



24. मोबाइल फोन महंगे

मोबाइल फोन पर जीएसटी में 12 फीसदी टैक्स रहेगा। इससे ज्यादातर राज्यों में मोबाइल हैंडसेट पर टैक्स 4-5 फीसदी बढ़ जाएगा। अभी करीब 6 फीसदी टैक्स लगता है। अगर एक मोबाइल अभी 5 हजार का है तो उस पर 3 रुपये टैक्स लगता है 1 जुलाई के बाद 6 रुपये टैक्स देना पड़ेगा।



25. नैपकिन, टिश्यू पेपर सस्ता

नैपकिन और टिश्यू पेपर पर इस समय एक्साइज, वैट और एंट्री टैक्स मिलाकर 3.5 फीसदी टैक्स लगता है। जीएसटी लागू होने के बाद 18 फीसदी टैक्स लगेगा। मतलब अगर कोई नैपकिन 3 रुपये का है तो उस पर अभी करीब 91 रुपये टैक्स देना होता है अब सिर्फ 54 रुपये देने होंगे।




सोर्स:TopYaps 
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10 नवंबर यानी कल आप देशभर के तमाम बैंकों में अपने 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बदल सकेंगे। इसके लिए आपको बैंक में एक फॉम भरना होगा। जिसमें आपका पर्सनल डिटेल होगा। इसके साथ ही आपको अपने साथ आधार, पैन या फिर वोटर कार्ड भी ले जाना होगा। जिसके आपको 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बदलवाते वक्त पेश करना होगा।


बैंक जाते वक्त इन बातों को रखें ध्यान...

-एक आदमी एक दिन में सिर्फ चार हजार रुपए के 500,1000 के नोट बदल सकता है

-कैश का ट्रांजैक्शन सिर्फ कैश काउंटर पर होगा

- बैंक मैनेजर की केबिन या दूसरी किसी जगह लेन देन हुआ तो बैंक मैनेजर पर कार्रवाई होगी

-एक्सचेंज के लिए आपको अपना आईडी प्रूफ देना होगा (फार्म )


-बैंको में सुबह 10 बजे से नोट बदले जा सकेंगे

-दूसरे आदमी के खाते में रकम जमा करने के लिए खातेदार का अधिकृत करना जरुरी होगा

-दूसरे व्यक्ति के खाते में रकम जमा करने के लिए जमाकर्ता को अपना आईडी औऱ फोन नंबर देना होगा

-अपने खाते में पुराने नियमों के हिसाब से कितनी भी रकम जमा की जा सकती है















सोर्स:न्यूज़ २४ 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान कर दिया है कि आज आधी रात से अब तक चलन में मौजूद रहे 500 और 2000 रुपए के नोट नहीं चलेंगे. लोगों के मन में सवाल है कि इनकी जगह क्या आएगा, तो हम आपको दिखाए देते हैं दोनों नए नोटों की तस्वीरें. अब से यही वाले नोट लेना:



500 रुपए का नया नोट





2000 रुपए का नया नोट




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आज रात से 500 और 1000 के नोट बंद, जानें अब क्या करें










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काले धन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा कदम उठाया है, जिसके बारे में किसी ने सोचा तक नहीं. देश के नाम संबोधन में पीएम ने जो बातें कहीं, उसकी कुछ खास बातें:

1. अब से 500 और 1000 रुपए के नोट अब नहीं चलेंगे.

2. 50 दिनों में यानी 10 नवंबर से 30 दिसंबर तक 500 और 1000 रुपए के नोट बैंकों और डाकघरों के पास जमा कराने होंगे.

3. हालांकि अस्पताल, ट्रेन या श्मशान जैसी कुछ जगहों पर पुराने नोट इस्तेमाल करने के लिए 1-3 दिन तक की ढील दी गई है.

4. 09-10 नवंबर को कुछ एटीएम बंद रहेंगे। शुरु में कुछ दिनों तक हर रोज 2000 रुपए से ज्यादा नहीं निकाले जा सकेंगे.

5. 09 नवंबर को सभी बैंक पब्लिक के कामों के लिए बंद रहेंगे.

6. चेक, डेबिट-क्रेडिट कार्ड या ऑनलाइन पेमेंट पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

7. 500 और 2000 रुपए के नए नोट आएंगे.

8. 25 नवंबर तक 4000 रुपए के नोट बदले जा सकेंगे. 25 नवंबर के बाद इसकी सीमा बढ़ जाएगी.


अगर आपने रात 12 बजे से पहले ATM से 100-100 रुपए के नोट निकाल लिए तो आप खुशकिस्मत रहेंगे और आने वाले कुछ दिनों में आपको कोई दिक्कत नहीं होगी.







सोर्स :लल्लनटॉप 
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नई दिल्ली । सॉफ्टवेयर कंपनियों टीसीएस और इन्फोसिस, फार्मा कंपनियों सन फार्मा और ल्युपिन व प्राइवेट लेंडर्स एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक ने इस साल forbes इंडिया की सुपर 50 सूची में जगह बनाई है। वहीं टाटा मोटर्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर को झटका लगा है, जो इस साल सूची से बाहर हो गई हैं। 


ये नई कंपनियां जुड़ी दूसरे साल जारी हुई forbes की इस सूची में इन्फोसिस, मारुति सुजुकी, भारत फोर्ज, एलंबिक फार्मा, जिलेट इंडिया, एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस, कंसाई नेरोलैक और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस सहित 14 नई कंपनियों ने जगह बनाई है।

ये कंपनियां हुई बाहर forbes  की इस सूची से टाटा मोटर्स, एचयूएल, एमआरएफ, ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन, फाइजर, डॉ रेड्डीज लैब्स, ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स, एचडीएफसी और कोटक महिंद्रा बैंक सहित ये कंपनियां बाहर हो गईं।



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केंद्र सरकार ने सोमवार को 7वें पे-कमीशन का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इससे केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों को अगस्त से ही बढ़ा हुआ वेतन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। कैबिनेट ने 29 जून को सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दी थी। अभी करीब 47 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 53 लाख पेंशनधारियों को इससे लाभ होगा।

हालांकि नोटिफिकेशन के बाद काफी हद तक सवालों के जवाब मिल जाएंगे, लेकिन फिर भी कुछ मसलों पर कर्मचारी संगठनों और सरकार में अभी बातचीत होनी है। इस सबके पीछे तृतीय और चतुर्थ श्रेणियों के कर्मचारियों की हड़ताल की धमकी के बाद सरकार द्वारा न्यूनतम वेतनमान बढ़ाने की मांग को स्वीकार कर करीब 33 लाख कर्मचारियों को लिखित में आश्वासन देना है। सरकार ने इसके लिए एक समिति के गठन की बात भी कही है, जो चार महीनों में सभी संबंधित पक्षों से बात करके अपनी रिपोर्ट देगी। इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार न्यूनतम वेतनमान को बढ़ाने का फैसला लेगी।

7वें वेतन आयोग को मंजूरी के समय वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान की खास बातें:

1. पे बैंड एवं ग्रेड पे की वर्तमान प्रणाली समाप्‍त कर दी गई है और आयोग की सिफारिश के अनुरूप एक नई वेतन संरचना (पे मैट्रिक्‍स) को मंजूरी दी गई है। अब से कर्मचारी के दर्जे का निर्धारण पे मैट्रिक्स में उसके स्‍तर के आधार पर होगा, जबकि अभी तक ग्रेड पे के अनुसार इसका निर्धारण होता था। अलग-अलग वेतन संरचनाएं असैन्‍य (सिविलयन), रक्षा कार्मिकों और सैन्य नर्सिंग सेवा के लिए तैयार की गई हैं। इन संरचनाओं के पीछे सिद्धांत और तर्क एक समान हैं।

2. सभी वर्तमान स्‍तरों को नये ढांचे में समाहित कर दिया गया है। कोई नया स्‍तर शुरू नहीं किया गया है और न ही किसी स्‍तर को हटाया गया है। वेतन संरचना के हर स्‍तर पर न्‍यूनतम वेतन तय करने के लिए सुव्यवस्थीकरण के सूचकांक को मंजूरी दी गई है, जो वरिष्ठता क्रम में हर कदम पर बढ़ती भूमिका, जिम्मेदारी और जवाबदेही पर निर्भर करता है।

3. न्‍यूनतम वेतन को 7000 रुपये से बढ़ाकर 18000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। न्‍यूनतम स्‍तर पर किसी भी नवनियुक्‍त कर्मचारी का शुरुआती वेतन अब 18000 रुपये होगा, जबकि नवनियुक्‍त ‘क्‍लास I’ अधिकारी का शुरुआती वेतन 56100 रुपये होगा। यह 1:3.12 के संकुचन अनुपात को दर्शाता है, जिससे यह पता चलता है कि सीधी भर्ती वाले किसी भी ‘क्‍लास I’ अधिकारी का वेतन न्‍यूनतम स्‍तर पर न‍वनियुक्‍त कर्मचारी के वेतन से तीन गुना अधिक होगा।

4. वेतन एवं पेंशन में संशोधन के उद्देश्‍य से 2.57 का फिटमेंट फैक्‍टर वेतन संरचनाओं में शामिल सभी स्‍तरों पर लागू होगा। प्रचलित दर पर डीए को शामिल करने के बाद सभी सरकारी कर्मचारियों/पेंशनभोगियों के वेतन/पेंशन में 1 जनवरी, 2016 को कम से कम 14.29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हो जाएगी।

5. वेतन वृद्धि की दर को 3 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। उच्‍च मूल वेतन की बदौलत कर्मचारी भविष्‍य में लाभान्वित होंगे, क्‍योंकि भविष्‍य में उनके वेतन में जो वार्षिक वृद्धि होगी वह वर्तमान के मुकाबले 2.57 गुना ज्‍यादा होगी।

6. कैबिनेट ने स्‍तर 13ए (ब्रिगेडियर) के लिए सुव्यवस्थीकरण सूचकांक में वृद्धि कर और स्‍तर 12ए (ले.कर्नल), 13 (कर्नल) और 13ए (ब्रिगेडियर) में अतिरिक्‍त स्‍तर (स्‍टेज) सुनिश्चित करके रक्षा संबंधी वेतन संरचना को और बेहतर कर दिया है, ताकि संबंधित स्तरों के अधिकतम पायदान पर संयुक्त सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के समकक्षों के साथ समता लाई जा सके।

7. रक्षा और संयुक्त सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) कार्मिकों समेत विभिन्‍न कर्मचारियों पर असर डालने वाले कुछ अन्‍य निर्णय भी लिए गए हैं, जिनमें निम्‍नलिखित शामिल हैं।
• ग्रेच्‍युटी की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है। जब भी डीए 50 प्रतिशत बढ़ जाएगा तब ग्रेच्‍युटी की सीमा 25 प्रतिशत बढ़ जाएगी।
• असैन्‍य एवं रक्षा कार्मिकों के लिए अनुग्रह राशि एकमुश्त मुआवजे के भुगतान हेतु एक आम व्यवस्था की गई है, जो उनके परिजनों को देय होगा और इसके तहत वर्तमान दरों को विभिन्‍न श्रेणियों के लिए 10-20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25-45 लाख रुपये कर दिया गया है।
• रक्षा बलों के कर्मियों की विभिन्न श्रेणियों के लिए सैन्य सेवा वेतन की दरें 1000, 2000, 4200 एवं 6000 रुपये से संशोधित करके क्रमश: 3600, 5200, 10800 एवं 15500 रुपये कर दी गई हैं।

8. कैबिनेट ने आवास निर्माण से जुड़ी अग्रिम राशि को 7.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने संबंधी आयोग की सिफारिश को भी मंजूरी दे दी है। कर्मचारियों को कोई दिक्‍कत न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए 4 ब्‍याज मुक्‍त अग्रिमों को बरकरार रखा गया है, जिनमें चिकित्सा इलाज के लिए अग्रिम, टूर/स्‍थानांतरण के लिए टीए, मृतक कर्मचारियों के परिवार के लिए टीए और एलटीसी शामिल हैं। अन्‍य सभी ब्‍याज मुक्‍त अग्रिमों को समाप्‍त कर दिया गया है।

9. कैबिनेट ने केंद्र सरकार कर्मचारी समूह बीमा योजना (सीजीईजीआईएस) में किए जाने वाले मासिक अंशदान में भारी वृद्धि करने की सिफा‍रिश को भी न मानने का निर्णय लिया है, जैसी कि आयोग ने सिफारिश की थी।

10. आयोग ने कुल मिलाकर 196 वर्तमान भत्‍तों पर गौर किया और इन्‍हें तर्कसंगत बनाने के उद्देश्‍य से 51 भत्‍तों को समाप्‍त करने और 37 भत्‍तों को समाहित करने की सिफारिश की है।

11. सातवें सीपीसी द्वारा लगाए गए अनुमान के मुताबिक, वर्ष 2016-17 में इसकी सभी सिफारिशों पर अमल से अतिरिक्‍त वित्‍तीय बोझ 1,02,100 करोड़ रुपये का पड़ेगा। इसके अलावा वर्ष 2015-16 के दो महीनों के लिए वेतन एवं पेंशन से जुड़ी बकाया राशि के भुगतान हेतु 12,133 करोड़ रुपये का अतिरिक्‍त बोझ वहन करना पड़ेगा।





सोर्स:NDTV 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काली कमाई करने वालों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि या तो वे 30 सितंबर तक गहने और जमीन-जायदाद सहित अपनी काली कमाई घोषित कर दें क्योंकि इसके बाद उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


प्रधानमंत्री ने यहां तक कहा कि चैन की नींद सोने के लिए ऐसे लोगों को आगे बढ़ना चाहिए वरना उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है। प्रधानमंत्री ने आभूषण निर्माताओं के ही एक कार्यक्रम में ऐसे लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘मुझे पता है कि लोग थैलियां भर-भरकर इन आभूषण निर्माताओं के पास आते हैं। लेकिन उनके लिए आखिरी मौका 30 सितंबर तक है, इसके बाद सभी दरवाजे बंद हो जाएंगे।


कर चोरी करने वाले कई सारे लोग पहले भी जेल जा चुके हैं और उस पाप को नहीं करना चाहता हूं जो 30 सितंबर के बाद मुझे करना पड़ेगा।’ एक जून से शुरू की गई आय घोषणा योजना (आईडीएस) के तहत काली कमाई करने वालों को 30 सितंबर तक अपनी संपत्तियां घोषित करने, कर चुकाने और इसके बाद 45 प्रतिशत जुर्माना भरने का मौका दिया गया है। जो लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा पाएंगे उन्हें सख्त कार्रवाई के अलावा जेल की सजा भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।






आयकर विभाग ने पैन नंबर के बिना 90 लाख से अधिक हस्तांरण के जरिये चोरी-छिपे मोटी रकम के लेनदेन की पहचान की है। जांच के दौरान विभाग अब तक ऐसे सात लाख लोगों को पत्र भेजकर उनसे लेनदेन का ब्योरा मांग चुका है।

पीएम मोदी ने घरों और मंदिरों से महत्वाकांक्षी स्वर्ण एकत्रीकरण योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सोना रखने वाले अपने आभूषण का प्रयोग साल में दो से पांच बार ही कर पाते हैं। इससे बेहतर है कि अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकार को ऋण के रूप में दे दें।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से स्वर्ण को सामाजिक हैसियत से जोड़ लिया गया है। एक अनुमान के अनुसार देशभर के मंदिरों और घरों में बीस हजार टन सोना रखा हुआ है। आभूषण पर उत्पाद शुल्क लगाए जाने  जिसका देशभर में विरोध हुआ था, का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिये मुद्दे का समाधान कर लेंगे। उन्होंने उद्योग जगत की रत्न और आभूषण के लिए अलग मंत्रालय की मांग को भी खारिज किया।






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न्‍यूयॉर्क। रेवेन्‍यू के मामले में दुनिया की बड़ी कंपनियों की ताजा फॉर्च्‍यून 500 लिस्‍ट में भारत की सात कंपनियों को भी शामिल किया गया है। ग्‍लोबल रैंकिंग में रिटेल चेन कंपनी वालमार्ट सबसे ऊपर है। भारतीय कंपनियों में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की रैंक सबसे ज्‍यादा 161वीं है। 2016 की लिस्‍ट में से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ओएनजीसी को बाहर कर दिया गया है। इसके स्‍थान पर प्राइवेट सेक्‍टर की जेम्‍स एंड ज्‍वेलरी कंपनी राजेश एक्‍सपोर्ट को पहली बार शामिल किया गया है, इसकी रैंक 423 है।
सात भारतीय कंपनियों में से चार सार्वजनिक क्षेत्र की जबकि तीन प्राइवेट सेक्‍टर की हैं। प्राइवेट सेक्‍टर में रिलायंस टॉप पर है इसके बाद टाटा मोटर्स और राजेश एक्‍सपोर्ट का स्‍थान है। सार्वजनिक क्षेत्र में इंडियन ऑयल सबसे आगे उसके बाद एसबीआई, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्‍तान पेट्रोलियम का स्‍थान है।
इंडियन ऑयल की रैंक 161 है और इसका रेवेन्‍यू 54.7 अरब डॉलर है (पिछले साल रैंक 119 थी), जबकि आरआईएल अब 215वें स्‍थान (पिछले साल 158वीं रैंक थी) पर है। भारत पेट्रोलियम 280 स्‍थान से खिसककर 358वें स्‍थान पर पहुंच गई है और हिंदुस्‍तान पेट्रोलियम 327 की जगह अब 367वें स्‍थान पर है। हालांकि, टाटा मोटर्स और एसबीआई ने अपनी स्थिति में सुधार किया है। टाटा मोटर्स की इस साल रैंक 226 है, जो कि पिछले साल 254 थी। इसी प्रकार एसबीआई की रैंक पिछले साल की 260 से सुधरकर इस साल 232 हो गई है।
ओवरऑल लिस्‍ट में सबसे ऊपर वालमार्ट है इसका रेवेन्‍यू 482,130 मिलियन डॉलर है, इसके बाद दूसरे स्‍थान पर स्‍टेट ग्रिड (329,601 मिलियन डॉलर) और तीसरे स्‍थान पर चाइना नेशनल पेट्रोलियम (299,271 मिलियन डॉलर) हैं। चौथे स्‍थान पर सिनोपेक ग्रुप (294,344 मिलियन डॉलर), पांचवें स्‍थान पर रॉयल डच शेल (272,156 मिलियन डॉलर), छठवें स्‍थान पर एक्‍सन मोबाइल (246,204 मिलियन डॉलर), सातवें स्‍थान पर फॉक्‍सवैगन (236,600 मिलियन डॉलर), टोयोटा मोटर आठवें स्‍थान पर (236,592 मिलियन डॉलर), नौवें स्‍थान पर एप्‍पल (233,715 मिलियन डॉलर) और दसवें स्‍थान पर बीपी (225,982 मिलियन डॉलर) हैं। फॉर्च्‍यून ने कहा है कि 2015 में दुनिया की 500 बड़ी कंपनियों ने 27.6 लाख करोड़ डॉलर का रेवेन्‍यू जनरेट किया और इन्‍होंने 1.5 लाख करोड़ डॉलर का प्रॉफि‍ट कमाया।




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नई दिल्ली। रेल यात्रा के दौरान अब आपको खराब और बिना पसंद का खाना खाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। आईआरसीटीसी आपके लिए रेडी टू ईट सर्विस शुरू करने जा रही है जिसके तहत आपको मनपसंद खाना मिलेगा वो भी बाजार से आधे दाम पर। सूत्रों के मुताबिक रेडी टू ईट मेन्यू में चिकन बिरयानी 50 रुपए, राजमा चावल 40 रुपए, मटर पनीर 45 रुपए, वेजिटेबल बिरयानी 40 रुपए, लेमन राइस 35 रुपए और उपमा 40 रुपए में मिलेंगे।
अक्टूबर से शुरू होगी सर्विस, 32 रुपए मिलेगा खाना 
रेडी टू ईट सर्विस को शुरू करने के लिए आईआरसीटीसी ने डीआरडीओ के साथ रिटोर्ट टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौता किया है। रिटोर्ट टेक्नोलॉजी के जरिए खाना 6 महीने तक ताजा रखा जा सकता है। इस स्कीम की औपचारिक शुरुआत अक्टूबर से की जाएगी, लेकिन लोगों में इसके प्रचार की शुरुआत हो गई है। सर्विस के प्रचार के दौरान चिकन बिरयानी हो या दाल चावल या फिर राजमा चावल सब कुछ 32 रुपए में दिया जा रहा है। लेकिन ये दाम सिर्फ सर्विस के प्रोमोशन के लिए है।

आईआरसीटीसी अपने खजाने से करेगी भरपाई
आईआरसीटीसी यात्रियों को सस्ता रेडी टू ईट खाना देने जा रही है जिसकी भरपाई अपने खजाने से करेगी। दिलचस्प ये है कि रेलवे का दावा है कि यात्री किरायों पर वो भारी सब्सिडी देती है, जिसमें कटौती की जरूरत है। वहीं आईआरसीटीसी यात्रियों को रेडी टू ईट खाने के लिए सब्सिडी दे रही है। हालांकि कंपनी के मुताबिक शुरुआती 6 महीनों के बाद अगर डिमांड बढ़ती है तो खाने के दाम बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।



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अब वो दिन दूर नहीं, जब मध्यवर्गीय व्यक्ति भी हवाई मार्ग से दिल्ली से आगरा या बरेली तक का सफर कर सकेंगे, वह भी महज ढाई हजार रुपये में। दरअसल, केंद्र सरकार चाहती है कि बड़े शहरों को छोटे शहरों से जोड़ने के लिए हर हफ्ते कम से कम तीन उड़ानें शुरू की जाएं।
500 किलोमीटर की इन उड़ानों का किराया ढाई हजार रुपये रखने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें न सिर्फ कर में छूट देंगी बल्कि विमानन कंपनियों को क्षेत्रीय हवाई सेवा कोष से सब्सिडी भी मुहैया कराएंगी। केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री, पी अशोक गजपति राजू ने शुक्रवार को क्षेत्रीय हवाई सेवा योजना (आरसीएस) को जारी करते हुए बताया कि इस योजना का मसौदा मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है।

इस पर सभी हितधारकों से तीन सप्ताह के भीतर प्रतिक्रिया मंगायी गई है। उन प्रतिक्रियाओं का अध्ययन और उस पर कार्यान्वयन के लिए एक सप्ताह का वक्त तय किया गया है। इसके बाद (एक महीने में) क्षेत्रीय सेवा योजना को लागू कर दिया जाएगा और इसके मुताबिक छोटे शहरों को बड़े शहरों से जोड़ने के लिए हवाई जहाज उड़ान भरने लगेंगे।

उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य 35 करोड़ लोगों को सस्ते हवाई सफर से जोड़ना है। क्षेत्रीय स्तर पर सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों को हफ्ते में कम से कम तीन और अधिक से अधिक सात फ्लाइट ऐसे हवाई अड्डों से शुरू करनी होंगी, जहां विमान सेवाओं का विस्तार बहुत कम है। सात से ज्यादा उड़ानों पर सरकार सब्सिडी नहीं देगी।

क्या है सरकार की योजना


राजू के मुताबिक, इन मार्गों पर उड़ान भरने के लिए एटीएफ पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के साथ-साथ विमान सेवा पर सर्विस टैक्स में छूट मिलेगी। राज्य सरकारें भी एटीएफ पर वैट में छूट देंगी। इसके अलावा वे हवाई अड्डे को रियायती दर पर बिजली-पानी देंगी।

इन उड़ानों की सीटों पर केन्द्र की तरफ से क्षेत्रीय हवाई सेवा कोष (आरसीएस फंड) से सब्सिडी भी मिलेगी। हालांकि विमान की सभी सीटों पर सब्सिडी नहीं दी जाएगी। 13 सीट वाले छोटे विमानों की नौ सीटों पर सरकार छूट देगी, वहीं 80 सीट वाले विमानों की 40 सीटों पर सब्सिडी मिलेगी।

क्षेत्रीय स्तर पर सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों को अन्य सीटें बाजार भाव से बेचने की छूट रहेगी। यानी सरकार उन्हीं सीटों की कीमत तय करेगी, जिन पर वह छूट दे रही है। इस कवायद के जरिए सरकार शुरूआत में ऐसे तीस हवाई अड्डों पर क्षेत्रीय सेवा शुरू करेगी, जहां उड़ान भरने लायक सभी सुविधाएं हैं। इनमें ही आगरा, बरेली, कानपुर और इलाहाबाद के हवाई अड्डे शामिल हैं। बाद में वैसे हवाई अड्डों पर भी सेवा शुरू होगी जहां सुविधाएं जुटायी जानी बाकी हैं।







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सातवें वेतन आयोग के चलते केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाली सैलरी का इंतजार जल्द ही खत्म हो जाएगा। सूत्रों की मानें तो सरकार इसी हफ्ते या अगले हफ्ते सातवें वेतन आयोग का नोटिफिकेशन जारी कर सकती है। अगर ऐसा हो जाता है तो देश के करीब 47 लाख केन्द्रीय कर्मचारियों और 54 लाख पेंशनधारियों को 1 अगस्त से ही बढ़ी हुई सैलरी बढ़ने लगेगी।


आपको बता दें कि सरकार इस बात को पहले ही साफ कर चुकी है कि वह एरियर का भुगतान इसी साल करेगी। सूत्रों की मानें तो अगस्त की सैलरी जो कर्मचारियों के अकाउंट में सितंबर में आएगी वह नए पे कमीशन के हिसाब से ही आएगी। कुछ वर्कर्स यूनियन के लीडर की कुछ मांगें हैं, जिन पर सरकार की उन लीडर्स के साथ बातचीत चल रही है।



कर्मचारियों की मांग है कि न्यूनतम सैलरी 26000 कर दी जाए, लेकिन सरकार न्यूनतम सैलरी 22-23 हजार तक ही रखना चाहती है। यह सातवां वेतन आयोग 1 जनवरी 2016 से लागू किया जा रहा है। दशहरे से पहले सभी लोगों को अकाउंट में एरियर आ जाने की संभावना है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि एरियर पूरा एक साथ मिलेगा या फिर किश्तों में मिलेगा।






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shopping




सस्ते सेल का मौसम आ गया है। ग्राहकों को लुभाने के लिए इस साल रिटेल स्टोर्स, मॉल और ब्रांड्स ने अपना सेल सीजन जल्दी शुरु कर दिया है। सेल में 50 से लेकर 80 फीसदी तक  डिस्काउंट दिया जा रहा है। ऑफलाइन के साथ साथ ऑनलाइन रिटेलर भी सेल के लिए मैदान में उतर गए हैं जिसमें फायदा हो रहा है ग्राहकों का।


मॉनसून आते ही सेल का सिलसिला शुरू गया है। देश के सभी बड़े शहरों में सेल की शुरुआत हो चुकी है। इन सेल में वैसे तो आपको कई चीजों पर डिस्काउंट मिल जाएगा लेकिन सबसे ज्यादा क्रेज है कपड़े और एक्सेसरीज के लिए। इसीलिए कपड़े और एक्सेसरीज अलग-अलग ब्रांड्स और स्टोर्स पर 50 फीसदी से 80 फीसदी तक डिस्काउंट दे रहे हैं।


जारा, वेरा मोडा, यूसीबी, ली, बीबा जैसे बड़े ब्रांड्स अपनी प्रोडक्ट पर बड़े डिस्काउंट दे रहे हैं तो पैंटालून, लाइफस्टाइल, शॉपर्स स्टॉप, ब्रैंड फैक्ट्री, रिलायंस ट्रेंड्स जैसे मल्टी ब्रांड रिटेल स्टोर्स अंब्रेला डिस्काउंट का फायदा दे रहे हैं। वहीं मॉल्स भी अपने यहां सैकड़ों ब्रांड्स पर विकेंड फ्लैट डिस्काउंट दे रहे हैं।

मजे की बात ये है कि सेल के इन मौसम में ऑनलाइन और ऑफलाइन कंपनियां एक दूसरे से होड़ कर रही है और इसका फायदा मिल रहा है ग्राहकों को। हमेशा की तरह ऑनलाइन सेल में डिस्काउंट का फीगर इस बार भी बड़ा है। अपनी एंड ऑफ सीजन सेल में मिंत्रा 80 फीसदी तक की छूट दे रहा है। वहीं जबॉन्ग अपनी बिग ब्रैंड सेल में 70 फीसदी तक छूट दे रहा है।


वहीं घूमने फिरने का प्लान है तो हवाई सफर भी इन दिनों डिस्काउंट पर मिल रहा है। देश की लगभग सभी बड़ी एयरलाइंस ने मॉनसूनल सेल लगा रखी है। इंडिगो 800 से 1000 रुपये में हवाई टिकट दे रही है। वहीं गोएयर भी 849 में टिकट ऑफर कर रही है तो एयर एशिया 786 रुपये में हवाई यात्रा का ऑफर दे रही है। यानि इस सेल सीजन में आपके पास शॉपिंग करने के ढेर सारे मौके हैं और वो भी भारी डिस्काउंट पर।





सोर्स:IBNखबर
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100%FDI



इस सप्ताह के पहले ही दिन यानी की सोमवार को मोदी सरकार ने सबसे अहम फैसला ले लिया। ये फैसला है, रक्षा क्षेत्र सहित कई क्षेत्रों में 100% एफडीआई का। यकीनन यह फैसला सरकार की ओर से बहुत ही हिम्मत के साथ लिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे देश में रोजगार के कई अवसर पैदा होंगे और नौकरियां बरसेंगी। आइए जानते हैं कैसे बरसने वाली है ये नौकरियां।

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दरअसल, मोदी सरकार अच्छे दिनों के वादे को पूरा करने के लिए बहुमुखी प्रयास कर रही है। अच्छे दिनों का रोजगार से सीधा कनेक्शन है। ऐसे में सरकार ने कई क्षेत्र में फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्ट मेंट की सीमा बढ़ा दी है, जिससे देश में विदेशी कंपनियां निवेश करेंगी और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।



सरकार ने रक्षा और एविएशन के क्षेत्र में 100 फीसदी विदेश निवेश को मंजूरी के साथ ही भारत में बने फूड प्रोडक्ट्स, ब्रॉडकॉस्टिंग कैरिएज सर्विसेज और एनिमल हस्बें डरी में 100 फीसदी विदेशी निवेश को मंजूरी दी गई है। इससे पहले इस सेक्टर में 49 प्रतिशत तक के विदेशी निवेश की अनुमति थी।





सरकार के इस फैसले से अब देश में इस क्षेत्र की कई विदेशी कंपनियां पैसा लगाएंगी। मोदी सरकार के इन बदलावों के बाद अब भारत एफडीआई के मामले में भारत दुनिया में सबसे खुली अर्थव्यवस्था होगा। सरकार की ओर से इस फैसले का मकसद देश में रोजगार सृजन को प्रोत्साहन देना है। यह एफडीआई क्षेत्र में दूसरा प्रमुख सुधार है।






इस फैसले के अंतर्गत ऐविएशन सेक्टर में एयरपोर्ट के ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट में 100 फीसदी एफडीआई का ऐलान देश में एविएशन सेक्टर में क्रांति ला देगा। यही नहीं सरकार की ओर ऐविएशन में शेड्यूल्ड एयरलाइंस में एफडीआई की सीमा बढ़ाकर 100 फीसदी कर दी है। हालांकि सरकार शेड्यूल्ड एयरलाइंस में 49 फीसदी एफडीआई ऑटोमैटिक रूट से होगा, और 49 फीसदी से ज्यादा एफडीआई के लिए सरकार की मंजूरी लेनी होगी।




इन फैसलों के अंतर्गत सरकार की ओर से अब एपल के लिए भी भारत में स्टोर खोलना आसान हो गया है, जो सीधे तौर पर रोजगार को बढ़ाएगा। यही नहीं ई कॉमर्स, फूड सेक्टर में स्टोर भी ओपन होंगे। यह अपने आप में क्रांतिकारी फैसला है।


इसके अलावा बीमा जैसे क्षेत्रों में निवेश की सीमा 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी करने और सिंगल ब्रैंड में निवेश बढ़ाने का सीधा असर नौकरियों पर होगा। रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे।




मोदी सरकार के बनने के 2 साल बाद अब तक देश में तकरीबन 55 अरब डॉलर यानी की 3.69 लाख करोड़ का विदेशी निवेश आया है। वहीं साल 2015 और 16 में देश में 36 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया है, जबकि संभावना है कि इस साल भारत में 38 अरब डॉलर का विदेश निवेश आएगा।

मोदी सरकार के इस फैसले से जहां नौकरियां बढ़ेंगी, वहीं ग्राहकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। बीमा, दूरसंचार सहित कई क्षेत्रों में ग्राहकों को अच्छीा सेवा का लाभ मिलेगा।




 
 सोर्स:IBNखबर 
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