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एशियन गेम्स दिल्ली में हॉकी का भारत-पाक फाइनल. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी और बूटा सिंह के ज़रिए टीम को पैगाम पहुंचाया था कि हमने अब तक 7 गोल्ड जीते हैं वो हॉकी गोल्ड के आगे कुछ नहीं हैं. मैच की पूर्व संध्या पर बड़े-बड़े लोग आकर टीम को कह रहे थे – देश की इज्जत दांव पर लगी है. मैच के दिन कई मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों समेत इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, बूटा सिंह मौजूद थे. आमतौर पर शुक्रवार को पाकिस्तान और मंगलवार को भारत के लिए शुभ समझा जाता है. हालांकि भारत ने शुक्रवार को भी मैच जीते हैं लेकिन ये अंधविश्वास दिमाग पर पूरा असर डालता था उन दिनों. पर उस दिन बुधवार था दिल्ली की सर्दियों की खुशनुमा धूप, 1 दिसंबर 1982. ये वो दिन था जब भारत की हॉकी ने क्रिकेट के लिए अपनी जगह छोड़ दी.

मैच से पहले ही माहौल खेल का नहीं युद्ध का सा हो गया था. भारत में टीवी तब तक ब्लैक एंड व्हाईट था लेकिन दिल्ली एशियन खेलों के साथ भारत में पहली बार टीवी रंगीन हुआ था. लोग आकाशवाणी पर हॉकी की कॉमेंट्री चौराहों और चाय की दुकानों पर झुंड बनाकर सुनते थे.



भारत-पाकिस्तान मैच शुरू होता है. मैच से पहले शुभ स्वागतम् और अमिताभ बच्चन की बुलंद आवाज़ में ‘हम इस उत्सव में आप सभी का स्वागत करते हैं…’ की गूंज आज तक कई लोगों के कानों में गूंज रही होगी. शुभंकर अप्पू के साथ मैच से पहले भारत के खिलाड़ियों को राष्ट्रपति से मिलवाया गया. माहौल ऐसा हो गया था कि कोच बलबीर सिंह को भी खिलाड़ियों से कहना पड़ा – इज्जत दांव पर है लड़कों. खेल शुरू होने से पहले ही भारत की टीम सुपर-प्रेशर में थी.

भारत की शुरूआत शानदार हुई. और 4थे ही मिनट में सईद अली स्ट्राकिंग सर्कल में, ज़फर इकबाल के पास गेंद और गोल ! गोल ! गोल भारत 1-0 पाकिस्तान. नेशनल हॉकी स्टेडियम में 27000 दर्शकों की चिंघाड ऐसी थी कि आवाज़ जनपथ और कनॉट प्लेस तक पहुंची.

अगले 6 मिनट तक भारत इस सनसनीखेज़ हॉकी को देखकर पागल की तरह झूमता रहा. 10वें मिनट में हनीफ खान, मंज़ूर और कलीमुल्लाह ने गोल कर दिया और कुछ ही देर में स्कोर हो गया भारत 1-3 पाकिस्तान. इंदिरा गांधी के चेहरे पर तनाव साफ झलक रहा था. चौथा गोल होते ही प्रधानमंत्री ने मैच देखना छोड़ दिया. प्रधानमंत्री ही नहीं बल्कि 27000 लोगों में से 20000 लोग मैच खत्म होने से पहले ही बाहर आ गए. हाफ टाइम पर स्टेडियम के बाहर और पूरी दिल्ली में मातम सा माहौल था.

भारत कोई इतना खराब नहीं खेला था, कुल 10 पेनल्टी कॉर्नर मिले थे लेकिन एक भी गोल नहीं कर पाए. मैच में 2 गोल ऐसे थे कि जो गोल नहीं थे लेकिन कीवी अंपायर ने पाकिस्तान को गोल दे दिए थे.

उम्मीदों का दबाव कैसे तबाह करता है इसका क्लासिक उदाहरण है ये मैच. मैच से ठीक पहले एस एस सोढी की जगह बीमार राजिंदर सिंह को खिलाया गया. राजिंदर सिंह ने कुछ ही दिनों पहले पाकिस्तान के खिलाफ मैच जिताऊ खेल खेला था. ये सोचकर दवा वगैरह देकर मैदान पर फिट तो छोड़िए बीमार होने के बाद भी उतार दिया गया. कोच बलबीर सिंह जूनियर और मैनेजर बलबीर सिंह सीनीयर के लिए भी लोगों ने ये मैच युद्ध जैसा बना दिया था. एक के बाद एक रणनीतिक गलतियां होती चली गईं.

कहा तो ये भी जाता है कि खुद प्रधानमंत्री ने 1-3 होते ही गोलकीपर मीररंजन नेगी को बदलने के लिए कहा था, लेकिन राजीव गांधी ने जवाब दिया कि हम टीम और कोच के फैसलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते. इस मैच की हार का सारा ठीकरा मीर रंजन नेगी के सिर पर ही फूटना था. हुआ ये था कि मैच की शुरूआत से पहले शिष्टाचारवश भारत-पाकिस्तान के सभी खिलाड़ी हंसी-बात कर रहे थे. मीररंजन नेगी को भी ऐसे ही बात करते दिखाया गया. लोगों ने स्कोरलाइन देखकर समझा कि इसने तो मैच फिक्स कर लिया है. मैच के दौरान ही भीड़ ने मां-बहन की गालियां देनी शुरू कर दी.

मैच खत्म हुआ भारत 1-7 पाकिस्तान. ये मैच ही खत्म नहीं हुआ बल्कि इस स्कोरलाइन के साथ भारत की हॉकी भी तबाह हो गई. भारत ने रजत पदक जीता था लेकिन किसी भी खिलाड़ी की देर शाम तक स्टेडियम छोड़ने की हिम्मत नहीं हुई. रात को खेल गांव जाते वक्त जिस कार में मीर रंजन नेगी थे उसे 50 लोगों ने घेर लिया. तब योकिम कार्वाल्हो ने आकर नेगी को बचाय़ा था. कुछ दिन बाद पंडारा रोड पर नेगी अपने कुछ साथियों के साथ एक होटल में खाना खा रहे थे वहां भी लोग जान से मारने के लिए पहुंच गए. कई कई बार नेगी को भागकर जान बचानी पड़ी. और तो और बिजली बोर्ड के कुछ लोगों ने शादी के दिन मीर रंजन नेगी के घर की लाइट काट दी. शादी-समारोह स्कूटरों और कारों की रौशनी में संपन्न हुआ. ‘चक दे इंडिया’ में शाहरूख खान का रोल इन्हीं से प्रेरित था.

एक अखबार ने तो ये भी छाप दिया कि रीता बहुगुणा जोशी के पिता हेमवतीनंदन बहुगुणा और मीर रंजन नेगी रिश्तेदार हैं और बहुगुणा ने राजीव गांधी को बदनाम करने के लिए नेगी को पैसे दिए थे. नेगी और बहुगुणा में इतनी ही रिश्तेदारी थी कि दोनों गढ़वाल के थे.

इस मैच के कुछ ही दिनों बाद भारत ने एसांडा कप के पहले ही मैच में पाकिस्तान को 2-1 से हराया. उन दिनों क्रिकेट की तरह नियमित तौर पर हॉकी के मैच होते थे. लेकिन वो घाव कभी नहीं भरे. इसी दौरान भारत ने पहले क्रिकेट वर्ल्ड कप और फिर बेंसन एंड हेजेज ट्रॉफी जीतकर तहलका मचा दिया. फिर 1987 में क्रिकेट का वर्ल्ड कप भारत में ही आयोजित हो गया. तब तक लोग हॉकी देखना-सुनना भूल चुके थे.

राजिंदर सिंह सीनियर कुछ खुशकिस्मत रहे. हॉकी के सबसे शानदार मैचों में से एक 2003 चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी के मैच में भारत 1-4 से पिछड़ कर 7-4 से जीता था. उस मैच में राजिंदर कोच थे. लेकिन मैच के बाद कहा वो घाव नहीं भरेगा. 2010 हॉकी वर्ल्ड कप दिल्ली के मैच में भी भारत ने पाकिस्तान को हराया.



वो घाव भरा इंचॉन एशियाड 2014 में केरल की चट्टान गोलची श्रीजेश के दमदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने पाकिस्तान को पेनल्टी शूट आउट में हराकर सोना जीता. लेकिन तब तक 32 साल हो चुके थे. एक पीढ़ी ने दूसरी पीढ़ी की जगह ले ली. शायद फिर कभी दिल्ली में एशियाड हो, शायद फिर कभी मैच के लिए ऐसा ही माहौल बने औऱ भारत जीते, शायद तब कहीं जाकर इंडिया फिर दिल देगा हॉकी को.





सोर्स:लल्लनटॉप
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आज यानी 1 दिसंबर को अखबारों की हेडलाइन थी. रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अंबानी कुछ बड़ा ऐलान करने वाले थे. जियो यूजर्स को बेसब्री से इसका इंतजार था.

तो ऐलान हो गया है. बोले कि जनता ने हमको भरपूर प्यार दिया. लेकिन और टेलिकॉम ऑपरेटर्स ने नहीं. भारत सरकार और TRAI को थैंक्यू बोला. मुकेश की स्पीच की सबसे खास बातें यहां पढ़ो.

1.फेसबुक, व्हाट्सऐप और स्काइप से ज्यादा तेज बढ़ा है जियो लॉन्चिंग के तीन महीने में.

2. कॉल ब्लॉक कम हुए हैं.

3. 5 करोड़ से ज्यादा जियो ग्राहक बन चुके हैं.

4. eKYC से सिम पांच मिनट में एक्टिवेट होगा.

5. नए ग्राहकों को 31 मार्च तक मुफ्त सुविधाएं.

6. जियो का कन्ज्यूमर ब्रॉडबैंड के मुकाबले 25 गुना डेटा यूज कर रहा है.

7. हर मिनट एक हजार और हर दिन 6 लाख कस्टमर जोड़ने का रिकॉर्ड जियो के नाम है.

8. TRAI के नए नियम के मुताबिक 3 दिसंबर के बाद सिम खरीदने वालों को वेलकम ऑफर का फायदा नहीं मिलेगा.





सोर्स:लल्लनटॉप
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अक्षय कुमार बॉलीवुड के टॉप एक्टर्स में से हैं। उनकी फैन फॉलोइंग गजब की है। कॉमेडी हो या एक्शन दर्शकों ने अक्षय को हर तरह के किरदार में खूब पसंद किया है। पिछले 25 साल से इंडस्ट्री में अपनी एक खास जगह बनाने वाले अक्षय जल्द साउथ इंडियन फिल्म में नजर आने वाले हैं। खिलाड़ी का कुमार का ये साउथ डेब्यू काफी खास होने वाला है। क्योंकि इस फिल्म में वह सुपर स्टार रजनीकांत के साथ काम करने वाले हैं। इस फिल्म में अक्षय कुमार विलेन के रोल में नजर आने वाले हैं। यह फिल्म 2.0 नाम से आ रही है। हाल ही में इस फिल्म का फर्स्ट लुक भी जारी हुआ था।



इस फिल्म में विलेन बनकर आने वाले अक्षय के साथ रजनीकांत लीड रोल प्ले कर रहे हैं। फर्स्ट लुक लॉन्च इवेंट के दौरान रजनीकांत ने अक्षय कुमार की काफी तारीफ की थी। उन्होंने कहा, इस फिल्म के असली हीरो वो नहीं बल्कि अक्षय कुमार हैं क्योंकि इस फिल्म के लिए जितनी मेहनत उन्होंने की है वो तारीफ के काबिल है। रजनीकांत की इस बात से सभी सहमत भी हैं क्योंकि अक्षय कुमार ने फिल्म में अपने रोल के लिए काफी दिनों तक तैयारी की थी।




अक्षय कुमार ने भी इस इवेंट के दौरान कई ऐसी बातें बताईं जिनसे लगा कि वाकई अक्षय ने इस फिल्म के लिए खास तैयारी की थी। उन्होंने बताया कि इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसा काम किया है जो उन्होंने पिछले 25 सालों में नहीं किया। अक्षय कुमार ने लोगों को बताया, ‘मैं आप सबको एक बात पूरी ईमानदारी से बताना चाहता हूं, मैंने आजतक कभी भी फिल्मों के लिए मेकअप नहीं किया लेकिन इस फिल्म में मैंने पूरे 25 सालों का मेक-अप कर लिया है। मैं कसम खाकर बोलता हूं कि मेरे मेक-अप के लिए 3 घंटे लगते थे और इस दौरान मैंने न जाने कितनी फिल्में देख ली होंगी। इस मेकअप को उतारने में भी 1 घंटा लगता था। मैं हमेशा से सहनशील इंसान रहा हूं लेकिन इस फिल्म के बाद मैं और भी ज्यादा सहनशील हो गया हूं।’




अक्षय कुमार बातचीत के दौरान रजनीकांत और फिल्म के डायरेक्टर शंकर का धन्यवाद भी किया कि उन्होंने उन्हें इस रोल के लिए चुना। अक्षय कुमार ने कहा, “मैं हमेशा से रजनी सर का फैन रहा हूं और यह मेरे लिए एक सौभाग्य की बात है कि मैंने उनके साथ स्क्रीन शेयर किया है।” बता दें कि फिल्म के इस फर्स्ट लुक के लॉन्चिंग इवेंट पर सलमान खान और करन जौहर भी मौजूद थे। फिल्म अगले साल दीवाली के मौके पर रिलीज होगी लेकिन फिल्म के फर्स्ट लुक के लांच के बाद से लोगों को फिल्म की रिलीज का इंतजार हो गया है।






सोर्स:जनसत्ता 
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आओ हुजूर तुमको, फ्लैश बैक में ले चलूं. नन्हें मुन्नों की नहीं दढ़ाए अर्ध बुजुर्ग हो चले लोगों से कह रहे हैं. रणबीर कपूर से पहले, इमरान हाशमी से पहले, शाहरुख खान से पहले रोमांस का अलग दौर था. जब मूछ के रोएं थोड़ा सा डार्क कलर लेने लगते थे. तब लड़के लड़कियां गाना गाते हुए घूमते थे. झूमते थे.

“जब हम जवां होंगे जाने कहां होंगे. लेकिन जहां होंगे वहां फरियाद करेंगे..तुझे याद करेंगे.”


सनी देओल और अमृता सिंह सन 83- 84 में एक्टिवेट हुए स्पिरिचुअल गुरु थे. प्यार को अध्यात्म से जोड़ने वाले. वो अफेयर में गिरफ्तार जोड़ों को एक सार्वभौमिक सत्य से अवगत कराते थे. माने यूनिवर्सल ट्रुथ. कि कितना भी पापड़ बेल लो, जब जवां होगे तब तक आज का पार्टनर न जाने किस कोने में होगा. पता नहीं अपने तीसरे बच्चे को पोलियो की दवा पिला रहे होंगे या प्राइमरी के शिक्षक के तौर पर कहीं जनगड़ना कर रहे होंगे. “जहर जुदाई का पीना पड़ जाए तो, बिछड़ के भी हमको जीना पड़ जाए तो” जैसे ही कानों में पड़ता था, लगता था कानों में पिघला शीशा डाला गया हो. कितना हौलनाक होता था न.

खैर रोमांस की बातें वो लोग करें जो आज किसी और के बचपन वाले प्यार के साथ करवा चौथ सेलिब्रेट कर रहे हैं. लल्लन बात करेगा देशभक्ति की. जो आजकल डिमांड में है. तो पहला देशभक्त हीरो कौन था? हां पता है, हाथ नीचे कर लो. मनोज कुमार. आजकल कौन चल रहा है? सही जवाब. अक्षय कुमार. लेकिन मनोज के बाद और अक्षय से पहले जिस हीरो का देशभक्ति पर पूरा कंट्रोल था वो था ‘द हीरो’ अर्थात सनी देओल.

चलो पहले तुम्हारे मन की कर लेते हैं. देशभक्त सनी देओल का नाम सुनते ही तुम्हारे सामने उखाड़ा हैंडपंप आ गया होगा. और वो कालजयी डायलॉग “हिंदुस्तान जिंदाबाद था, है और रहेगा.” गदर थी तो प्रेमकथा, लेकिन लास्ट में जो जलवा दिखाया न अशरफ अली को, कि सारा देश ललकार उठा तारा..तारा..तारा. तारा सिंह फिल्मों का सबसे बड़ा देशभक्त रोल है आज की तारीख में.

जीत फिल्म के कयामत से लौट आने वाले सनी देओल. जिसमें एक से एक बेहतरीन गाने थे. जो अभी तक एफएम की हेलो फरमाइश में बजाए जाते हैं. डर फिल्म का प्यारा सा हसबैंड. बेताब का चाकलेट मार्का हीरो. ये सब फिल्में वो रास्ता थीं जिन पर चलकर सनी को देश का हीरो बनना था. उसके बाद खून का बदला खून वाली फिल्में भी. डकैत, विश्वात्मा, जोशीले, पाप की दुनिया, आग का गोला वगैरह. ये सब उसी की जमीन थी जिस पर देश का योद्धा उगना था.



शुरुआत त्रिदेव से मान सकते हो लेकिन जलवा तो बॉर्डर फिल्म से उछला था. मेजर कुलदीप सिंह. ऐसा फौजी जिसने दुश्मन को रेत में अपनी ही शक्ल उड़ती दिखा दी थी. फिर फर्ज के DCP करन सिंह. यहां खास बात ये है कि इनकी कई फिल्मों में नाम करन ही था. जीत, त्रिदेव, योद्धा, जानी दुश्मन में.



फर्ज के बाद गदर के तारा सिंह. जिसके डायलॉग सबकी जुबान पर चढ़े हैं. फिर इंडियन, मां तुझे सलाम और 23rd मार्च 1931: शहीद. सबमें देशभक्ति से ओतप्रोत अपीयरेंस. फिर 2003 में द हीरो फिल्म आई. उस दौर की सबसे महंगी फिल्म थी ये. इसमें स्पाई बने सनी देओल ने अपनी लव स्टोरी के साथ देशप्रेम का ऐसा बैलेंस साधा कि देखने वाले मुरीद हो गए. अपने यहां की जेम्स बॉन्ड थी ये फिल्म.







सोर्स:लल्लनटॉप 
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इंसान की तकदीर कल उसे कहां ले जाएगी, ये कोई नहीं जानता लेकिन सदियों पुराने हस्त रेखा शास्त्र में पारंगत होने पर व्यक्ति किसी के भविष्य को लेकर संकेत ज़रूर दे सकता है. बेहद प्राचीन और गूढ़ इस शास्त्र को समझना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन जिन लोगों ने इसे पढ़ा और समझा है, उनके लिए ये बताना आसान है कि किसी व्यक्ति के जीवन में क्या हो सकता है. 
आज हम आपको ऐसे कुछ चिह्नों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आपके हाथों पर होकर आपका भविष्य निर्धारित करते हैं.

1. मंदिर


ये चिह्न दिखाता है कि व्यक्ति जीवन में दुनिया की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करेगा और सर्वोच्च पद पर आसीन होगा. ऐसे लोग किसी देश के राष्ट्रपति भी बन सकते हैं.

2. छत्र


छत्र, मंडप या छाता बहुत ही दुर्लभ साइन है और इसे ज़्यादातर मामलों में आध्यात्मिकता से जोड़ा जाता है. इसके साथ ही ये राजसी योग देता है. ये राजाओं और योगियों में पाया जा सकता है.

3. ध्वज


ये चिह्न जिनके हाथ में होता है, विजयश्री उनके कदम चूमती है. ऐसे लोगों के लिए कोई भी काम कठिन नहीं होता.

4 . तलवार


ये निशान जिनके हाथ में होता है, उनके लिए दुर्भाग्य का सूचक होता है. वे लोग जीवन में चुनौतियों और संघर्ष से गुज़रते हैं.

5. वृक्ष


ये निशान हाथ की जिस भी रेखा पर बना हो, उसकी विशेषता को और बढ़ा देता है. ये भाग्य रेखा, जीवन रेखा या ह्रदय रेखा पर पाए जाने पर बहुत अच्छे परिणाम देता है. कुल मिलाकर ये बहुत ही पॉज़िटिव साइन है.

6. त्रिकोण


-यदि ह्रदय रेखा पर त्रिकोण पाया जाता है, तो व्यक्ति अपनी मेहनत के दम पर सफल होगा.
-जब ये मस्तिष्क रेखा पर हो तो ये दिखाता है कि व्यक्ति राजसी योग पाएगा और ये पीढ़ी दर पीढ़ी बना रहेगा.
-अगर ये निशान बृहस्पति के उच्च स्थान पर बना हो तो ऐसा व्यक्ति डिप्लोमैट हो सकता है, जो सिर्फ़ अपने बयानों से दो देशों के बीच शांति स्थापित कर सकेगा.
-अगर ये शनि के शिखर पर बन रहा हो तो व्यक्ति अदृश्य या गुप्त विज्ञान में पारंगत होता है और इसके भीतर गुप्त शक्तियां भी होती हैं.
-अगर ये निशान सूर्य पर्वत पर हो तो ऐसा व्यक्ति किसी कला में बेहद निपुण होता है, जैसे कि संगीत, नृत्य, पेंटिंग आदि.
-अगर ये बुध पर्वत पर हो तो व्यक्ति के पास ज़बरदस्त बिज़नेस सेन्स होता है और वो बहुत बुद्धिमान होता है. ऐसे लोग डिप्लोमैट के पद पर भी पहुंच सकते हैं.
-अगर त्रिकोण का ये निशान हाथ में मंगल पर हो तो शख़्स मार्शल आर्ट्स, ताइक्वांडो, कुंगफ़ू में पारंगत होता है और कई शस्त्र चलाना जानता है.
-अगर ये त्रिकोण शुक्र पर्वत पर पाया जाता है तो व्यक्ति अपने साथी को बेहद प्रेम करने वाला होगा.

7. त्रिशूल


ये बेहद सौभाग्यकारक निशान है. जो सूर्य या बृहस्पति पर्वत पर पाया जा सकता है. ये आपको जीवन में प्रसिद्धि देता है और सेलेब्रिटी जैसा दर्ज़ा भी.

8. अंडाकार या जौ के आकार का निशान


-इसे लेकर लोगों में कई मत हैं. जब ये अंगूठे के निचले पोर में पाया जाता है तो ये धन और मिला-जुलाकर सफलता का सूचक होता है.
-जब ये अंगूठे के बेस में पाया जाता है, तो इसे बेटे की निशानी मानते हैं.
-जब ये भाग्य रेखा की शुरुआत में हो, तो माता-पिता की अल्पायु में मृत्यु का संकेत देता है.

9. मत्स्य या मछली


ये निशान मणिबंध रेखा के ऊपर पाया जाता है. ये मार्क अगर बड़ा, बिना कहीं से कटा हुआ और साफ हो तो ये ज़िन्दगी में चमत्कार करने वाला है.

10. कछुआ


ये निशान व्यक्ति को बहुत ही भाग्यवान बनाता है.

11. कमल का निशान


ये बहुत ही दुर्लभ निशान है, जो शासकों के हाथों में देखने को मिलता है, या फिर उनके, जो जीवन को एन्जॉय करते हैं. ये व्यक्ति के चरित्र की पवित्रता और जीवन में बसी आध्यात्मिकता को भी दर्शाता है.

12. रथ का चिह्न


ये चिह्न अकसर राजाओं के हाथ में पाया जाता है, जो जीवन के सारे सुख प्राप्त करते हैं.

13. स्वास्तिक


ये बेहद शुभ निशान है, जो व्यक्ति को धर्म और सन्मार्ग पर ले जाता है. ऐसे लोग उच्चतम पदों पर पहुंचते हैं. यहां तक कि लोग इनकी पूजा करने लगते हैं.

14. सिंह का चिह्न


ये निशान जातक को हद से ज़्यादा बहादुर और हिम्मती बनाता है. ऐसे लोग ऊर्जा से हमेशा भरे रहते हैं.

15. धनुष


ऐसे लोग बहुत नेक होते हैं और उनका पूरा जीवन दूसरों की भलाई में गुज़रता है. उन्हें एक बेहतरीन लाइफ़ पार्टनर मिलता है और शादीशुदा जीवन शांतिपूर्ण गुज़रता है. ऐसे लोगों का भाग्य विवाह के बाद चमक उठता है.

16. चक्र


ऐसे लोग बेहद धनवान, सुख-सम्पदा से पूर्ण और अच्छे होते हैं. ये जातक भगवान विष्णु के भक्त होते हैं. वे किसी राजा से कम नहीं होते.

17. अंकुरित बीज


ये आलीशान और आरामपरस्त ज़िन्दगी की निशानी है.

18. कलश


जिसके हाथ में ये निशान हो, उसकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं.

19. जलाशय


ये निशान जातक को अत्यंत समृद्ध बनाता है, लेकिन उसे पेट, आंतों और गैस आदि की तकलीफ बनी रहती है.

20. गज चिह्न


हाथ में मौजूद ये निशान जातक को राजा बना देता है और सिंहासन पर बैठा देता है.
तो आपकी हथेली पर इनमें से कौन सा निशान है?



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दुनिया में हर चीज़ के दो पहलू होते हैं. न्यूयॉर्क स्टेट की Catskills की पहाड़ियों के साथ भी यह सिद्धान्त सही साबित होता है. Catskills की पहाड़ियां एक तरफ़ अपनी सुन्दरता और शानदार प्राकृतिक नज़ारों की वजह से, जितना घूमने-फिरने के शौक़ीन लोगों को आकर्षित करती है, उतना ही अपनी रहस्यमयी और खौफ़नाक शान्ति की वजह से काले जादू की दुनिया से जुड़े लोगों को भी अपनी और खींचने पर मजबूर कर देती है.
Source: cdn
इसी काली दुनिया से जुड़ी एक घटना कुछ दिनों पहले दो दोस्तों के साथ घटी. ये दोनों दोस्त Hiking (पैदल चल कर नई-नई जगह घूमना) करने के लिए Catskills की पहाड़ियों में कुछ यादगार लम्हें जोड़ने गये थे, लेकिन वहां उनके साथ कुछ ऐसा हुआ, जो उन्हें ज़िन्दगी भर डराता रहेगा.

Source: acidcow
जब ये दोस्त Catskills में घूम रहे थे, तब एक गुफ़ा के अंदर इन्हें एक लकड़ी की बहुत ही अजीब और डरावनी मूर्ति नज़र आई. यह छोटी-सी मूर्ति ध्यान से देखने पर किसी बुढ़िया की नज़र आ रही थी. इसके अलावा इसकी आंखों पर हैरतअंगेज़ तरीके से लोहे की कीले धंसी हुई थीं. यहीं नहीं, इस मूर्ति के गले में एक फंदा भी लगा हुआ था.

Source: acidcow
इस अजीब-सी मूर्ति ने उनके मन में कई सवाल खड़े कर दिए. इस मूर्ति के पास में कुछ समय पहले आग जली हुई होने के भी निशान दिख रहे थे. जहां एक लड़के ने इसे देखते ही दूरी बना ली, वहीं दूसरे लड़के ने इसे जिज्ञासावश उठा कर अपने पास रख लिया. उस लड़के की यही हरकत उसके लिए एक मुसीबत बन गई.

Source: acidcow
जब वह लड़का उस मूर्ति को लेकर घर आया, उसी दिन से उस घर में अजीब-अजीब घटनाएं घटने लगीं. सुबह जब भी लड़का नींद से उठता, तो मूर्ति उस जगह जहां उसे रात को रखा गया था, वहां न मिलने की बजाय किसी दूसरी जगह पर मिलती. जबकि उस घर में उसके पालतू कुत्ते के अलावा उसके साथ और कोई नहीं रहता था.

Source: acidcow
उसने इस तरह की घटना के बाद अपने कुत्ते पर नज़र रखना शुरू कर दिया, लेकिन नज़र रखने के बाद तो और भी चौंकाने वाली बात नज़र आई. पता चला कि वो कुत्ता उस लकड़ी की मूर्ति से हमेशा दूरी बनाकर रहता था, ऐसा लगता था कि जैसे वो उससे डर रहा हो. इसके साथ ही एक और अजीब घटना सामने आई, वो कुत्ता अब घर के बाहर जाने की बजाय घर के अंदर ही पेशाब करने लगा था, जबकि उसे घर से बाहर पेशाब करके आने की ट्रेनिंग भी दी गई थी.

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इन सब घटनाओं के अलावा भी एक अजीब-सी बात और हुई. जहां भी उस मूर्ति को रखा जाता, वहां के माहौल में एक रहस्यमयी गंध छा जाती. ऐसा लगता जैसे तालाब का गंदा पानी सड़ रहा हो.
इन सब हरकतों से घबराकर वो लड़का उस मूर्ति को पेरानोर्मल एक्सपर्ट दम्पत्ति के पास लेकर गया. Greg Newkrik और Dana Matthews दोनों एक फेमस पेरानॉर्मल एक्सपर्ट हैं. इन्होंने उत्तरी अमेरिका की अनेक भुतहा और रहस्यमयी चीज़ों का परीक्षण और निरीक्षण किया है.

Source: acidcow
उन्होंने जब अपनी जांच की, तो इस मूर्ति को भुतहा पाया. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जब कैमरे से इस मूर्ति पर नज़र रखी गई, तो पता चला कि यह मूर्ति अपने आप से हरकत करती है. उन्हें अपने ऑफिस के सोफे के ऊपर खून से सने पैरों के निशान भी मिले. जीसस की मूर्ति जो ऑफिस में लगी हुई थी, वो भी टूटी हुई अवस्था में मिली. यहां तक कि एक बार तो इस मूर्ति ने Greg के ऊपर टीवी गिराने की भी कोशिश की.

Source: allnewspipeline
Greg ने बताया कि जहां से ये मूर्ति वो लड़के लेकर आये थे, उस जगह पर अकसर लोग जादू-टोने से जुड़े कर्मकाण्ड करने जाते हैं. यहां तक कि वहां शैतानी ताकतों को ख़ुश करने के लिए जानवरों की बलि भी दी जाती है. इस मूर्ति का भी उपयोग किसी कर्मकाण्ड में किया गया होगा, जिसकी वजह से ये भुतहा बन गयी. फ़िलहाल इस मूर्ति को 'The Traveling Museum of the Paranormal and Occult' में रखा गया है.

Source: mauganscorp
अकसर हम यह बात सुनते रहते हैं कि आत्मा अमर होती है. आत्मा ना तो मरती है और ना ही पैदा होती है, वो तो बस किसी एक माध्यम को चुन कर उसमें अपना वास बनाती है. जब आत्मा किसी हाड़-मांस के बने शरीर को अपने वास के लिए चुन सकती है, तो किसी लकड़ी की मूर्ति को क्यों नहीं!








सोर्स:गज़बपोस्ट 
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नोटबंदी के फैसले को लेकर पूरे देश में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में एक नाम सामने आया, वो नाम था- सोनम गुप्ता। सोशल मीडिया पर उसके ‘बेवफाई’ का किस्सा चर्चा का विषय बना हुआ है। 10 के नोट पर पहली बार लिखा गया- ‘सोनम गुप्ता बेवफा है।’


 नोटबंदी के समय लोगों के सामने पैसे की समस्या खड़ी है और सोशल मीडिया पर सोनम गुप्ता को लेकर फनी कमेंट्स किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि किसी आशिक का दिल टूटने के बाद उसने अपनी प्रेमिका के लिए 10 रुपए के नोट पर लिख दिया ‘सोनम गुप्ता बेवफा है।’ शायद सोनम गुप्ता को भी नहीं पता होगा कि वह सोशल मीडिया पर इतनी फेमस हो जाएगी कि 10 से 100 और 100 से 2000 के नोट पर भी उसका नाम होगा।



सोनम गुप्ता कौन है और जिसने भी उसके बारे में ऐसा लिखा वो आखिर क्यों लिखा? सोनम गुप्ता ने ऐसा क्या किया था? इस बारे में जानने के लिए सभी उत्सुक है। इसी लेकर सोशल मीडिया पर एक यूजर जयविजय सचान ने सोनम गुप्ता की कहानी सामने लाने की कोशिश की है। उसने “sonamguptabewafahai an untold story” टाइटल से एक वीडियो पोस्ट किया है।


 इस मजेदार स्नैपचेट वीडियो में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि सोनम गुप्ता कैसे अपनी जिंदगी जी रही है। वीडियो में कुछ बॉलिवुड एक्टर्स की आवाज में नकल की गई है।


वीडियो में सनी देओल ने सोनम के प्रेमी की भूमिका निभाई है। नाना पाटेकर, इरफान खान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस वीडियो में नजर आ रहे हैं। 


नाना पाटेकर सोनम गुप्ता को लेकर बहुत परेशान हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की अपील कर रहे हैं। इरफान खान यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि कुछ लोगों की आदत बन चुकी है हर चीज के लिए पीएम मोदी को दोषी ठहराने की। वहीं, पीएम मोदी ने खुली चर्चा करते हुए पूरे देश के सामने कहा कि उन्होंने सोनम गुप्ता को ढूंढ लिया है। वीडियो में सोनम गुप्ता ने दावा किया है कि वह चीट करने वाली गर्लफ्रेंड नहीं है। उन्होंने ऐसा करने के पीछे की वजह भी बताई है। इस हालत में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।




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