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Ipl10 Final MI vs RPS Mumbai Indians Becomes Ipl Champion For 3rd Time

 Ipl10 Final MI vs RPS Mumbai Indians Becomes Ipl Champion For 3rd Time

मुंबई इंडियंस आईपीएल सीजन 10 की विजेता बन गई है. अपने चौथे फाइनल में मुंबई इंडियंस ने तीसरी बार आईपीएल का खिताब अपने नाम कर लिया है. आईपीएल हिस्ट्री में मुंबई ऐसी पहली टीम बन गई है जिसने तीसरी बार ये खिताब जीता है. इससे पहले मुंबई की टीम साल 2013 और साल 2015 में चैम्पियन बनी थी. 


मैच में पहले बैटिंग करते हुए मुंबई इंडियंस की टीम ने राइजिंग पुणे सुपरजायंट को जीत के लिए 130 रनों का लक्ष्य दिया था. जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी पुणे सुपरजायंट की टीम 20 ओवर में 4 विकेट गवां कर 128 रन ही बना पाई और ये मैच 1 रन से हार गई. पुणे की ओर से कप्तान स्टीव स्मिथ ने सबसे ज्यादा 51 रन बनाए. 

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मुंबई की ओर से मिशेल जॉनसन ने 3 और जसप्रीत बुमराह ने 2 विकेट लिए. मिशेल जॉनसन का आखिरी ओवर निर्णायक साबित हुआ जिन्होंने स्टीव स्मिथ और मनोज तिवारी को आउट करके हार के जबड़े से जीत छीनकर मुंबई की झोली में डाल दी.


मुंबई के लिए मुश्किल हालात में 38 बॉल पर 47 रन बनाने वाले क्रुणाल पंड्या को ' मैन ऑफ द मैच' चुना गया.



पुणे की पारी

पुणे की शुरुआत अच्छी नहीं रही और 17 रन पर उसका पहला विकेट गिर गया. इसके बाद दूसरे विकेट के लिए रहाणे और स्मिथ ने 71 रन जोड़कर टीम को मजबूती दी। एक वक्त पर टीम का स्कोर 1 विकेट पर 71 रन था और लग रहा था पुणे आसानी से मैच जीत लेगी. लेकिन रहाणे के आउट होते ही टीम विकेट गिरने का सिलसिला शुरू हो गया.


आखिरी ओवर में टीम को जीत के लिए 11 रन बनाने थे, लेकिन तीन विकेट गिरने के बाद बैट्समैन केवल 9 रन ही बना सके और पुणे 1 रन से मैच हार गई. टीम के केवल तीन बैट्समैन ही डबल डिजिट में रन बना सके. जिसमें स्टीव स्मिथ ने 51, अजिंक्य रहाणे ने 44 और धोनी ने 10 रन की इनिंग खेली.



पुणे के विकेट्स

पुणे का पहला विकेट 17 रन पर ही गिर गया. जब जसप्रीत बुमराह ने 2.2 ओवर में राहुल त्रिपाठी (3) को एलबीडब्लू किया. पुणे का दूसरा विकेट 11.5 ओवर में 71 रन पर गिरा, जब मिशेल जॉनसन की बॉल पर अजिंक्य रहाणे (44) को कीरोन पोलार्ड ने कैच कर लिया. 


Mitchell Johnson 


रहाणे ने 38 बॉल की अपनी इनिंग में 5 चौके लगाए.एमएस धोनी (10) आउट होने वाले तीसरे बैट्समैन रहे. जिन्हें 16.2 ओवर में जसप्रीत बुमराह ने पार्थिव पटेल के हाथों कैच करा दिया.आखिरी ओवर में तीन विकेट गिरे. इस दौरान मिशेल जॉनसन ने लगातार दो बॉल पर मनोज तिवारी (7) और स्टीव स्मिथ (51) को आउट किया. वहीं डेन क्रिस्चियन (4) आखिरी बॉल पर रन आउट हो गए.



मुंबई की पारी

इससे पहले टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए मुंबई इंडियंस की टीम ने 20 ओवर में 8 विकेट गवां कर 129 रन बनाए और राइजिंग पुणे सुपरजायंट को जीत के लिए 130 रनों का लक्ष्य दिया. 


मुंबई इंडियंस की बल्लेबाजी बुरी तरह फ्लॉप रही. टीम की शुरुआत बेहद खराब थी और तीसरे ओवर में ही दो विकेट गिर गए थे. इसके बाद तीसरे विकेट के लिए अंबती रायुडू और रोहित शर्मा ने 28 बॉल पर 33 रन की पार्टनरशिप की.


मुंबई के 7 विकेट 79 रन पर गिर गए थे और लग रहा था कि वो 100 रन तक भी नहीं पहुंच पाएगी. लेकिन इसके बाद आठवें विकेट के लिए क्रुणाल पंड्या और मिशेल जॉनसन ने 35 बॉल पर 50 रन जोड़कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक ले गए. 
 
krunal pandya 


मुंबई की ओर से क्रुणाल पंड्या ने ही सबसे ज्यादा 47 रन बनाए जबकि रोहित शर्मा ने 24 रनों की पारी खेली. पुणे की ओर से शार्दुल ठाकुर, एडम जंपा और डेनियल क्रिस्चियन ने 2-2 विकेट लिए.



मुंबई के विकेट्स

मुंबई की शुरुआत बेहद खराब रही और तीसरे ओवर में दो विकेट गिर गए. जयदेव उनादकट ने 2.1 ओवर में पार्थिव पटेल (4) को आउट कर दिया. उनका कैच शार्दुल ठाकुर ने लिया. इसके बाद इसी ओवर की चौथी गेंद पर लेंडल सिमन्स (3) का कैच लेकर उन्हें भी पवेलियन लौटा दिया.


मुंबई का तीसरा विकेट 7.2 ओवर में गिरा, जब अंबति रायुडू (12), स्टीव स्मिथ के डायरेक्ट थ्रो पर रन आउट हो गए.11वें ओवर में एडम जम्पा ने मुंबई को दो झटके दिए.


 इस ओवर की पहली बॉल पर उन्होंने रोहित शर्मा (24) को शार्दुल ठाकुर के हाथों कैच कराया. वहीं इसी ओवर की आखिरी बॉल पर जम्पा ने कीरोन पोलार्ड (7) को मनोज तिवारी के हाथों कैच करा दिया.


छठे विकेट के रूप में हार्दिक पंड्या (10) आउट हुए. 13.2 ओवर में डेन क्रिस्चियन ने उन्हें एलबीडब्लू कर दिया. सातवां विकेट 14.1 ओवर में गिरा, जब कर्ण शर्मा (1) रन आउट हो गए. 


jaydev unadkat 


उस वक्त मुंबई का स्कोर 79 रन था.क्रुणाल पंड्या (47) आउट होने वाले आठवें बैट्समैन रहे. 19.6 ओवर में क्रिस्चियन की बॉल पर रहाणे ने उन्हें कैच कर लिया.




सोर्स:आजतक
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dalit protesters led by bhim army put forward 3 demands related to sharanpur caste violence


dalit protesters led by bhim army put forward 3 demands related to sharanpur caste violenceजंतर मंतर पर जुटे प्रदर्शनकारी:


सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की पहली प्रशासनिक नाकामी माना गया. रविवार को इस मामले से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर दलित गुटों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में सबसे आगे ‘भीम आर्मी’ के लोग रहे. 
 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरान ‘भीम आर्मी’ के संयोजक चंद्रशेखर आज़ाद, गुजरात से युवा दलित नेता जिग्नेश मवानी और जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार भी मौजूद थे. चंद्रशेखर सहारनपुर में हुई हिंसा के मामले में यूपी पुलिस की वॉन्टेड लिस्ट में हैं.

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शनिवार को दिल्ली पुलिस ने यह कहकर इस प्रदर्शन की अनुमति रोक ली थी कि जंतर-मंतर इतने सारे लोगों के जुटने लायक जगह नहीं है. इसके बावजूद लोग जुटे. पुलिस ने प्रदर्शन इस शर्त पर होने दिया कि जब तक सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से होता रहेगा, किसी को रोका नहीं जाएगा. 


 एहतियात के तौर पर पुलिस ने संसद और आसपास के इलाकों में भारी बंदोबस्त रखा था. प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों को अपने हाथ में बंधा कलावा कैंची से काटते हुए देखा गया.


प्रदर्शन के दौरान दलित गुटों ने तीन मांगें रखीं:

#1. 5 मई को सहारनपुर के शब्बीरपुर में हुई हिंसा की न्यायिक जांच हो


#2. महाराणा प्रताप जयंती के जुलूस में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो


#3. शब्बीरपुर में जिन दलितों के घर जलाए गए हैं, उन्हें मुआवज़ा दिया जाए



प्रदर्शन का बैकग्राउंड

sharanpur caste violenceसहारनपुर में पथराव और आगजनी के बाद की एक तस्वीर


5 मई को सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में कुछ राजपूत लड़के महाराणा प्रताप की जयंती पर जुलूस निकाल रहे थे. दलित लड़कों ने जुलूस और DJ पर आपत्ति जताई, तो दोनों पक्षों में झड़प हो गई. बलवे में एक राजपूत लड़के सुमित की मौत हो गई और दलितों के घर फूंक दिए गए.



 ये 20 दिनों के भीतर सहारनपुर में हुआ हिंसा का दूसरा मामला था. इसके बाद 9 मई को फिर बलवा हुआ, जब दलित संगठन एक महापंचायत बुलाना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी थी. पुलिस का मानना था कि महापंचायत के दौरान माहौल बिगड़ सकता है. इसके बाद पुलिस और महापंचायत चाहने वाले लोगों के बीच झड़प हो गई थी.


इस सब में एक दलित गुट भीम आर्मी का नाम सामने आया. देर-सबेर प्रशासन हरकत में आया और फिर धरपकड़ शुरू हुई, जिसके बाद चंद्रशेखर और भीम आर्मी के बाकी लोग अंडरग्राउंड हो गए. 



लेकिन, भीम आर्मी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से रविवार के प्रदर्शन में जुटने की अपील करती रही. 9 मई को चंद्रशेखर ने इसे लेकर एक ऑडियो संदेश भी जारी किया था.


Bhim Armyभीम आर्मी बनाने वाले चंद्रशेखर आजाद



रविवार के प्रदर्शन पर सभी की नज़र थी. वो इसलिए कि इसे भीम आर्मी ने आयोजित किया था. भीम आर्मी दलितों का एक जातीय स्वाभिमान संगठन है, जिसे वकील चंद्रशेखर आजाद ने जुलाई 2015 में बनाया था.




 पूरे देश की दिलचस्पी इसमें तब बढ़ी, जब सहारनपुर में हुई हिंसा में इसका नाम प्रमुखता से आया. इस संगठन का दावा है कि उनकी भीम आर्मी सात राज्यों तक फैली है और इसके 40 हजार से ज्यादा सदस्य हैं. इनके मुताबिक कई गांवों में दलित कोई बवाल होने के बाद इनके संगठन से तब जुड़े हैं.



सोर्स:लल्लनटॉप
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ipl 2017 pune take a u-turn calls itself team ms dhoni

MS Dhoni

आईपीएल में इस सत्र में पुणे की टीम और धोनी के बीच काफी ज्यादा विवाद हुआ है. पहले धोनी से कप्तानी छिनने और फिर धोनी की बल्लेबाज़ी को लेकर लगातार आलोचना की गई, लेकिन अब लग हैं पुणे की टीम को आखिरकार धोनी के महत्त्व का पता चल गया हैं.

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सोशल मीडिया पर शेयर की धोनी की विडियो

आईपीएल में फाइनल में पुणे का मुकाबला मुंबई से होना हैं. लेकिन उसके पहले पुणे टीम के आधिकारिक अकाउंट से धोनी के लिए एक विडियो शेयर किया हैं. जिसमे टीम ने धोनी के फेमस हेलीकाप्टर शॉट के लिए ट्रिब्यूट दी हैं. विडियो के नीचे कैप्शन लिखा हैं कि भूल जाए आप जिस भी टीम का समर्थन करते हो. ये धोनी हैं . 

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हर्ष गोयनका ने की धोनी की आलोचना

आईपीएल के शुरुआत मैच में पुणे ने मुंबई को हराया था. इस मैच में स्मिथ ने 84 रन की शानदार पारी खेली थी. जिसके दम पर पुणे ने मुबई को हरा दिया था.






इस मैच के बाद हर्ष ने ट्वीट किया था कि एक बार स्मिथ ने बार फिर से वो बेहतर कप्तान हैं. वे धोनी से आगे निकल गए. उन्हें पुणे का कप्तान चुनने मे गर्व हो रहा हैं. इसके बाद धोनी ने फैन्स ने उनके इस ट्वीट की बहुत आलोचन की थी. जिसके बाद उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया था.




साक्षी ने भी हर्ष को बनाया था निशाना

इस विवाद के बीच साक्षी धोनी ने भी हर्ष को निशाना बनाते हुए कई फोटो डाली थी. जिसमे उन्होंने चेन्नई की ड्रेस में एक फोटो डाली थी और कैप्शन लिखा था कि वो चेन्नई परिवार को अभी तक याद कर रही हैं.






संजीव गोयनका ने धोनी को बताया था टीम का महत्वपूर्ण हिस्सा

धोनी को लेकर संजीव ने कहा था कि मीडिया जो चाहे लिख सकता हैं ,जो चाहे बोल सकता हैं. मैं सभी का सम्मान करता हूँ. मैंने टीम के लिए वही किया जो टीम के लिए सही था.


मैंने खुद धोनी से बात की हैं . वो बेहद शानदार इंसान हैं. मैं उससे बात करता रहता हूँ . मुझे लगता हैं, कि वो एक शानदार खिलाड़ी हैं और उसके साथ साथ वो महान कप्तान भी हैं. मैं उसका खुद एक क्रिकेट प्रशंसक रहा हूँ.



धोनी ने प्लेऑफ में दिखाया था दम

प्लेऑफ में खेले गए मुकाबले में धोनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 26 गेंदों में 40 रन बनाए थे. जिसमे उन्होंने 5 छक्के लगाए थे. धोनी की इस पारी की वजह से पुणे ये मैच 19 रन से जीतने में सफल रही थी.





सोर्स:स्पोर्टज़ विकी
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The fascinating story of India's first war of independence 1857The fascinating story of India's first war of independence 1857



1857 की क्रांति ने भारत के इतिहास में एक नया कैलेंडर बना दिया. उस साल भारत एक देश की तरह पहली बार खड़ा हुआ था. जबरदस्त लड़ाई हुई, पर ब्रिटिश विजयी रहे थे. देश के बहुत सारे राजाओं ने अंग्रेजों का ही साथ दिया था. बहुत हिचक रहे थे. और बहुतों ने उनके खिलाफ लड़ते हुए जान दी. कुछ तो हारने की टीस, कुछ पुराने सिस्टम को गंवाने का दुःख, ये सब मिलकर कई कहानियां गढ़ गए. वहीं जीती हुई ब्रिटिश सेना ने अलग इतिहास लिख दिया. इस क्रांति के बारे में कई तरह की कहानियां बन गईं. जीते हुए लोगों की गायी गई कहानियां और हारे लोगों की कही गयी कहानियां.


ये पोस्ट दी लल्लनटॉप डॉट कॉम से कॉपी किया गया है,ओरिजिनल पोस्ट पड़ने के लिए लल्लनटॉप पर जाये|


आइये पढ़ते हैं 1857 के बारे में कुछ बातें:

1. शायर बादशाह लड़ा और इतनी रानियां लड़ीं कि किसी देश में इसकी मिसाल नहीं मिलती



भारत के बारे में हमेशा कहा जाता था कि यहां के लोग राजनीति में ज्यादा चूं-चपड़ नहीं करते थे. ‘कोऊ नृप होए, हमें का हानि.’ कोई भी आ के राजा बन गया, जनता को कोई दिक्कत नहीं थी. पर 1857 में पहली बार सैनिकों के अलावा व्यापारी, किसान और साधु तक लड़े थे.


लड़ने वाले राजा कई तरह के स्वभाव और बैकग्राउंड वाले थे. ‘शायर’ बादशाह बहादुर शाह जफ़र को सबका नेता बनाया गया था. पेशवा बाजीराव द्वितीय के गोद लिए हुए नाना साहब, 80 साल के बूढ़े कुंवर सिंह, तांत्या टोपे और बख्त खान भी हर जगह से लड़ रहे थे. फिर रानी लक्ष्मीबाई जो बेटे को पीठ पर बांधकर लड़ती थीं. बेगम हज़रत महल, रानी ईश्वरी देवी, तुलसीपुर की रानी सबने भयानक लड़ाई लड़ी थी. इतनी रानियों का जंग करना किसी भी देश के इतिहास में पहला मौका था.

रानी लक्ष्मीबाई और बेगम हज़रत महल


ब्रिटिश अफसर ह्यू रोज ने कहा था: सारे विद्रोहियों में रानी लक्ष्मीबाई ही लड़ाका थी. सारे विद्रोहियों में अकेली ‘मर्द’. रानी लक्ष्मीबाई के साथ ही उनकी बचपन की सखी झलकारीबाई का भी नाम आता है. वो दलित समुदाय से आती थीं. उन्होंने लक्ष्मीबाई के लिए अपनी जान दे दी थी.


2. आधे देसी राजा अंग्रेजों की तरफ थे, वहीं कुछ अंग्रेज भारत की तरफ से लड़े



लड़ाई अपने तय समय से पहले शुरू हो गयी थी. क्योंकि मंगल पाण्डेय ने कारतूस में चर्बी के नाम पर अपने एक अफसर को मार दिया था. सैनिक वहीं से विद्रोह कर गए. जब बहादुरशाह जफ़र को  बताया गया कि विद्रोही आप को नेता बनाना चाहते हैं तो वो घबरा गए. उनको किसी पर भरोसा नहीं था.  वो पहले से ही अंग्रेजों के पेंशनर थे. अपने बारे में चिंतित हो गए. साम्राज्य तो था नहीं. पर जब विद्रोही उनके पास पहुंचे तो वो नेता बनने के लिए तैयार हो गए. उनका नेता बनना महज एक सिंबल था. *इसके पहले जफ़र ने आगरा के लेफ्टिनेंट गवर्नर को विद्रोहियों के बारे में खबर कर दी थी. ऐसे ही रानी लक्ष्मीबाई ने पेशकश रखी थी कि मेरा राज्य छोड़ दो तो मैं तुम्हारी मदद करूंगी. पर अंग्रेजों ने मना कर दिया. उसी तरह कुंवर सिंह की मांग भी अंग्रेजों ने मना कर दी थी. पर सारे राजा नहीं लड़े थे. बंगाल से दिल्ली तक की सीधी पट्टी के राजाओं ने ही लड़ाई लड़ी. पंजाब के राजाओं ने अंग्रेजों की मदद की. दक्षिण भारत के राजा एकदम शांत रहे. जैसे कुछ हुआ ही नहीं था.

Indian States During Revolt Of 1857
लड़ाई के वक़्त रियासतों की स्थिति (सोशल मीडिया से)


सबसे मजेदार बात है कि कुछ अंग्रेज भारत की तरफ से लड़े थे. सार्जेंट मेजर गॉर्डन, जिनको हिन्दुस्तानी शेख अब्दुल्ला बेग कहते थे, लखनऊ से लड़े थे. बहुत सारे एंग्लो-इंडियन सैनिक भी लड़े थे. पर सारे लोग मारे गए.
*बहादुरशाह जफ़र को रंगून भेज दिया गया. उनके बेटों को क़त्ल कर दिया गया. उनके छोटे बेटे को उनके साथ रंगून भेज दिया गया था.  रंगून में ही मरने से पहले बहादुरशाह जफ़र ने ये शेर लिखा था:


कितना है बदनसीब ‘ज़फर’ दफ़न के लिए,
दो गज ज़मीन भी ना मिली कू-ए-यार में.


बहादुरशाह जफ़रबहादुरशाह जफ़र

एक और शायर हुए रहे उस बखत. चाचा ग़ालिब. दिल्ली से कलकत्ता तक सबसे उधार लिए रहे. अंग्रेजन के पास जा हाजिरी देते रहे. शायर आदमी थे, कहां लड़ते. पर लिखा जरूर था:

अल्लाह! अल्लाह! दिल्ली न रही, छावनी है,
ना किला न शहर ना बाज़ार ना नहर,
क़िस्सा मुख़्तसर, सहरा सहरा हो गया.



3. अंग्रेज मानते नहीं, पर रोटी से ही फोन का काम लिया गया था



ऐसा कहा जाता है कि विद्रोह की बात सब तक पहुँचाने के लिए कोई जरिया नहीं था. तो रोटी के सहारे सन्देश पहुंचाए जाते थे. एक रोटी किसी के पास पहुँचती थी. उस आदमी को सारा मामला समझाया जाता था. फिर वो वैसी ही बहुत सारी रोटियां बनाकर सबको बताता था. क्योंकि अंग्रेजों को पता चल जाता तो भांडा फूट जाता. रोटी घुमाने का कोई प्रमाण तो नहीं है क्योंकि छुप-छुपा के काम हो रहा था. पर एक ब्रिटिश डॉक्टर गिल्बर्ट हडो ने अपनी बहन को चिट्ठी लिख इस बारे में बताया था. अंग्रेज इतिहासकार इस बात को नकार देते हैं. क्योंकि बेइज्जत होने का डर था. कि सामने ही रोटी रख के सारा मामला हो गया और हवा तक नहीं लगी.

उस समय के बम्बई के पास अलीबाग के विष्णु भट्ट गोडसे वरसाईकर ने इस विद्रोह के बारे में किताब लिखी थी: A Factual Account of the 1857 Mutiny. उस समय ये पब्लिश नहीं हो पाई. हुई 1907 में. एक आम आदमी की नजर से विद्रोह के बारे में ये बहुत ही जबरदस्त ढंग से लिखी किताब है. पढ़ते-पढ़ते आप रोने लगेंगे.


4. हिटलर से ज्यादा खून बहाया अंग्रेजों ने, हिन्दू-मुसलमान को तोड़ना शुरू कर दिया



हिन्दू-मुसलमान दोनों ने मिलकर लड़ाई लड़ी थी. ‘हर-हर महादेव’ के साथ ‘अल्लाह-हो-अकबर’ के नारे गूंजते थे. इस बात से अंग्रेज घबरा गए थे. लड़ाई ख़त्म होने के बाद इसका उपाय किया गया. दिल्ली में पकड़े गए हिन्दू सैनिकों को छोड़ दिया गया. कहते हैं कि दिल्ली में एक ही दिन 22 हज़ार मुसलमान सैनिकों को फांसी दे दी गयी. यही तरीका कई जगह आजमाया गया. फिर हिन्दुओं को सरकारी नौकरी और ऊंचे पद दिए जाने लगे. मुसलमानों को दूर ही रखा गया. धीरे-धीरे जनता में हिन्दू-मुसलमान की भावना फैलने लगी. इसके ठीक बीस साल बाद पॉलिसी बदल दी गयी. अब मुसलमानों को ऊंचे पदों पर बैठाया जाने लगा. और हिन्दुओं को प्रताड़ित किया जाने लगा.

1857 की क्रांति के बाद ऐसे ही हुई थी फांसियां1857 की क्रांति के बाद ऐसे ही हुई थी फांसियां

ऐसा कहा जाता है कि लड़ाई ख़त्म होने के बाद लगभग 10 लाख हिन्दुस्तानियों को मारा गया. दस साल तक ये काम गुपचुप रूप से किया जाता रहा. एक पूरी पीढ़ी को खड़ा होने से रोक दिया गया. हालांकि ब्रिटिश इस बात को नकार देते हैं. पर रिसर्च करने वाले कहते हैं कि नकारने से सच झुठलाया नहीं जा सकता. हिटलर ने भी यहूदियों के साथ इतना खून-खराबा नहीं किया था.


5. क्या होता अगर देसी राजा जीत गए होते?



ये सवाल बार-बार उठता है. क्योंकि देसी राजा उस समय पुराने ज़माने के हिसाब से चलते थे. आधुनिकता से कोई लेना-देना नहीं था. डेमोक्रेसी आने की कोई संभावना नहीं थी. फिर देश में कोई बड़ा शासक नहीं था. पूरा देश रियासतों में बंटा पड़ा था. शायद सूडान या मिडिल ईस्ट जैसी स्थिति हो जाती. पर ये भी संभव था कि जिस अंदाज में राजा और रानियां लड़े थे, देश अपने आप आधुनिकता के रास्ते चल पड़ता. फिर अंग्रेजों के हाथ से इंडिया के निकल जाने से दुनिया में उनका वर्चस्व कम हो जाता. इंडिया के दम पर उन्होंने बहुत कुछ हथियाया था.

हुई मुद्दत कि ‘ग़ालिब’ मर गया पर याद आता है,
वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता !


*बिपिन चंद्रा की किताब India’s Struggle For Independence से


**इतिहास में किसी बादशाह या किसी रानी-राजा ने जो भी फैसले लिए, वो उस वक़्त की स्थितियों और समझ के मुताबिक थे. आज के डेमोक्रेटिक मूल्यों के आधार पर हम उन फैसलों को तौल नहीं सकते. क्योंकि ये सही नहीं होगा. उन फैसलों के बारे में कोई भी बात, किसी को भी ‘देशद्रोही’ साबित करने का जरिया नहीं हो सकती. इतिहास को कभी वर्तमान के चश्मे से नहीं देखना है. जो था, वो था.


*** भूल सुधार: एक अन्य लड़ाई में शाह आलम द्वितीय को अंधा किया गया था. यहां पर बहादुरशाह जफ़र के बारे में ऐसा लिखा गया था. इसके लिए खेद है.



सोर्स:लल्लनटॉप
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yashpal sharma never out on zero?




यहां हम बात कर रहे हैं 80 के दशक के उस खिलाड़ी की जो अपने करियर में एक बार भी शुन्य पर आउट नहीं हुआ।


क्रिकेट में आकंडे बेहद मायने रखते हैं। अगर ये कहा जाए क्रिकेट आंकड़ों का ही खेल है तो यह गलत नहीं होगा। किस बल्लेबाज ने कितने शतक-अर्धशतक बनाए, किस गेंदबाज ने कितने विकेट लिए, कौन कितनी बार शुन्य पर आउट हुआ, ये सब गणनाएं क्रिकेट की किताब में एक रिकॉर्ड की तरह दर्ज हो जाती हैं।


sportskeeda


शुन्य पर आउट होना किसी बल्लेबाज को गवारा नहीं होता है, लेकिन कभी-कभार बल्लेबाज सामने वाले गेंदबाज का शिकार हो ही जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि भारतीय क्रिकेट टीम के इतिहास में एक खिलाड़ी ऐसा भी रहा जो शुन्य पर कभी आउट नहीं हुआ।


यहां हम बात कर रहे हैं मध्यक्रम के बल्लेबाज यशपाल शर्मा की। 1983 में वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे यशपाल को वनडे में सात साल तक कोई भी गेंदबाज शून्य पर आउट नहीं कर सका।

cricketcountry




11 अगस्त 1954 को लुधियाना में जन्में इस खिलाड़ी ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच 1978 में पाकिस्तान के खिलाफ खेला था।



यशपाल शर्मा ने भारत के लिए 42 एकदिवसीय मैच खेले। अपने करियर में उन्होंने चार अर्धशतक जड़े। वनडे में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 89 रन रहा है। उनके टेस्ट करियर की बात करें तो उन्होंने 37 मैचों की 59 पारियों में दो शतक और 9 अर्धशतक के साथ 1606 रन बनाए हैं। टेस्ट में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 140 है।


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यशपाल शर्मा भारतीय क्रिकेट के इतिहास का एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने 1983 वर्ल्ड कप में एक संकट मोचन के किरदार को बड़े ही असाधारण सलिके से निभाया था और भारतीय टीम को कई मौकों पर जीत दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाई थी।





सोर्स:TopYaps
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team india for champions trophy declared gautam gambhir and Suresh Raina Out

 Indian Team Champions Trophy


बीसीसीआई के सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित CoA के निर्देश के बाद चैंपियन्स ट्रॉफ़ी के लिए भारतीय टीम का चयन किया गया है. इस बार सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर और गेंदबाज हरभजन सिंह को टीम में नहीं लिया गया है. शिखर धवन और रोहित शर्मा इस टूर्नामेंट में ओपन करेंगे और अजिंक्य रहाणे बैक अप के रूप में टीम में रहेंगे. इस टूर्नामेंट के लिए सुरेश रैना का चयन नहीं हुआ है.



टीम इस प्रकार है : विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन, अजिंक्य रहाणे, युवराज सिंह, मनीष पांडे, एमएस धोनी, केदारनाथ जाधव, हार्दिक पांड्या, आर अश्विन, रवींद्र जडेजा, उमेश यादव, भुवनेश्वर कुमार, जस्प्रीत बुमरा, मोहम्म शमी.



इस 15 सदस्यीय टीम में युवराज सिंह को स्थान मिला है. भारत इस ट्रॉफी का डिफेंडिंग चैंपियन है. चैंपियंस ट्रॉफी की शुरुआत 1 जून से हो रही हैं, जबकि भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत 4 जून को बिर्मिंघम के मैदान से चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के साथ करेंगी. टीम इंडिया ग्रुप बी में है और इस ग्रुप में पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका भी हैं. 



यूं तो 25 अप्रैल टीम चयन की आखिरी तारीख थी लेकिन बीसीसीआई और आईसीसी के बीच चल रहे विवाद के चलते अभी तक टीम चयन नहीं हुआ था.



खैर इस सबसे अलग अगर भारतीय टीम के बारे में सोचे तो यूं तो ज्यादातर खिलाड़ी लगभग तय माने जा रहे थे. आईपीएल में कुछ युवा खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के चलते चयनकर्ताओं के लिए उन्हें नज़र अंदाज़ करना बेहद मुश्किल हुआ होगा.



बल्लेबाज़ों में विराट कोहली, रोहित शर्मा, अजिंक्य रहाणे, युवराज सिंह और केदार जाधव के नाम हैं. बाकि एक बल्लेबाज़ के स्लॉट में गौतम गंभीर, शिखर धवन और मनीष पांडे की बीच चुनाव होना था. इस गौतम को छोड़कर बाकी दोनों का चयन हो गया है. गेंदबाज़ों में आर अश्विन, आर. जडेजा, बतौर स्पिनर ऑलराउंडर टीम के लिए खेलेंगे. वहीं, तेज़ गेंदबाज़ों में जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार और उमेश यादव का नाम है. बाकी मोहम्मद शमी को भी टीम में जगह दी गई है. 




ऑलराउंडर की लिस्ट में हार्दिक पांड्या को चैलेंज करना वाला कोई नज़र नहीं आ रहा था और इसलिए वह टीम में हैं. जबकि विकेटकीपर बल्लेबाज़ी की श्रेणी में धोनी टीम में है. 



सोर्स:NDTV
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मंत्रीपद लिए जाने के बाद अगले रोज़ जब गुडमॉर्निंग वाली अलार्म टोन के संग कपिल मिश्रा जगे. तभी पता था आज कुछ होने को है. दिन थोड़ा चढ़ा और ‘आप’ विधायक कपिल मिश्रा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और ‘आप’ सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगा दिए. कपिल मिश्रा ने ऐसा करके खुद को दिल्ली सीएम बनने लायक भी बता दिया. क्योंकि अब से पहले मुंहजबानी इल्जाम लगाने का काम बस दिल्ली सीएम ही करते थे. राजघाट पर महात्मा गांधी के स्मारक के सामने कपिल ने मीडिया को ये सब बताया.



कहा के मैंने केजरीवाल पर आंख मूंद कर भरोसा किया था कि ये आदमी भ्रष्टाचार नहीं करेगा लेकिन वाटर टैंकर घोटाले के मामले में सत्येंद्र जैन ने अरविंद केजरीवाल को दो करोड़ रुपए कैश में दिए थे. खैर ये तो रही खबर. सच है या नहीं ज्ञानीजन जानें. पर अभी ये कि इल्जाम लग चुका है. इस पर राजनीति होगी और ढेर सा कंटेंट आएगा. पर ऐसा तो होना ही था. ये अब से नहीं हमेशा से तय था.



केजरीवाल इस दो करोड़ वाली बात का इशारा हमेशा से करते आए हैं. नीचे सबूत देख लीजिए.



#1. अरविंद केजरीवाल इशारा करते हुए कि कपिल मिश्रा उन पर कितने करोड़ लेने का आरोप लगाएंगे.



Source|Oneindia





#2. मफलर के साथ केजरीवाल ने यही बात कही थी.



Source|PTI




#3 हर किसी को पता हो, पैसे पूरे करोड़ दो.



Source|I LOVE GOA





#4. एक नहीं कई-कई बार बताया था.



Source| Daily Mail| Pankaj Nangiya





#5 मोदी जी तक को पता था.








#6. कपिल मिश्रा के अलावा उस रोज़ वहां चर्चिल मिश्रा भी थे.







#7. पोप से कोई पाप छुप सका है भला?








#8. शशिकला भले आज कल न दिखें, उन्हें वहां से भी सब दिखता है.








#9. केजरीवाल कपिल मिश्रा को एक आम से मौके पर इशारा करते हुए.







#10. कम ही लोगों को पता है कि इत्ती जल्दी नोट गिनने में कपिल मिश्रा ने आयरन मैन और शरलॉक होम्स की मदद ली थी.







#11. खुद कपिल मिश्रा ने पहले ये इशारा किया था.







तो खैर अभी तो बस इल्जाम लगे हैं. जो सच भी हो सकते हैं और झूठ भी. आप बस नजरें गड़ाए रखिए. महीने निकालिए. तनख्वाह का वेट करते रहिए. शेष तो समझते ही हैं.



सोर्स:लल्लनटॉप
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