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फिल्म : काबिल 

डायरेक्टर: संजय गुप्ता 
स्टार कास्ट: रितिक रोशन, यामी गौतम, रोनित रॉय, रोहित रॉय 
अवधि: 2 घंटा 19 मिनट 
सर्टिफिकेट: U/A







बॉलीवुड के डैशिंग हीरो ऋतिक रोशन और खूबसूरत अभिनेत्री यामी गौतम की फिल्म काबिल आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। फिल्म की कहानी रोहन भटनागर (ऋतिक रोशन) और सुप्रिया शर्मा की है। जो देख नहीं सकते हैं।



संजय गुप्ता के डायरेक्शन में पहली बार रितिक रोशन की फिल्म रिलीज हुई है. इसके प्रोड्यूसर राकेश रोशन हैं. राकेश रोशन ने अपने बेटे रितिक के लिए कहो ना प्यार है, कोई मिल गया, कृष, काइट्स जैसी फिल्में बनाई हैं. इनकी सफलता का प्रतिशत मिला-जुला है.



वैसे रितिक की पिछली फिल्म 'मोहन जोदारो' चली नहीं थी. सवाल ये है कि 'काबिल' के साथ क्या इस बार बाप बेटे की जोड़ी फिर से बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा पाएगी?




ये कहानी है डबिंग आर्टिस्ट रोहन भटनागर (रितिक रोशन) की , जिसकी जिंदगी दिन में डबिंग स्टूडियो और रात को घर पर गुजरती है. ऋतिक रोशन यानी रोहन अकेले रहने वाला एक लड़का जो देख नहीं सकता. वॉकिंग स्टिक के भरोसे चलता है. लेकिन बाकी सेन्स बहुत तेज़ काम करते हैं. जो देख नहीं सकते उनके साथ ऐसा होता ही है. उनके बाकी सेंसेज़ और भी शार्प हो जाते हैं.





यामी गौतम यानी सुप्रिया और रोहन मिलते हैं. साथ में डांस करते हैं. प्यार होता है और शादी हो जाती है. साथ में रहने लगते हैं और एक दूसरे का सहारा बनते हैं। इन दोनों के जीवन में कुछ ऐसी बातें होती हैं कि सुप्रिया की मौत हो जाती है. एक दिन ऐसा आता है जब कॉर्पोरेटर माधवराव शेल्लार (रोनित रॉय) और अमित शेल्लार (रोहित रॉय ) की वजह से रोहन की जिंदगी से सुप्रिया हमेशा के लिए चली जाती है. 



पुलिस बहुत साथ नहीं देती है. रोहन खुद को बांध के रख नहीं सकता. इसलिए बदला लेने निकल पड़ता है. इतना तो ट्रेलर देख के ही समझ में आ गया था कि बदला रोहित और रोनित रॉय से लिया जा रहा था. रोहन को पुलिस से भी बैर है. उन पर से भरोसा उठ चुका है. अब बदला लेने को घूम रहा है. इसी प्यार, प्यार खोने से आए अंधेरे और उससे उपजी बदले की कहानी का नाम है ‘काबिल’.





फिल्म की कहानी




शादी के बाद सब कुछ ठीक चल रहा होता है लेकिन तभी अचानक डबिंग आर्टिस्ट रोहन भटनागर (रितिक रोशन) और सुप्रिया (यामी गौतम) अँधेरी दुनिया में हलचल मच जाती है। जब गुंडा अमित शेलार (रोहित रॉय) और उसका साथी वसीम (सहीदुर रहमान) साथ मिलकर सुप्रिया का रेप करते हैं। इंसाफ के लिए दोनों पुलिस के पास जाते हैं लेकिन पुलिस उनके लिए कुछ नहीं करती है। क्योंकि अमित का भाई माधवराव शेलार (रॉनित रॉय) एक पहुंचा हुआ आदमी है जिसके पास पैसा और पॉवर दोनों ही है।



रेप के बाद सुप्रिया काफी टूट चुकी होती है और वो आत्महत्या कर लेती है। कहानी में ट्विस्ट यहीं से शुरू होता है। इस घटना के बाद रोहन कानून को अपने हाथ में लेता है और सबसे बदला। लेकिन जिस अंदाज में रोहन दोषियों को सजा देता है वो सच में काबिलेतारीफ है। इस खेल में किसकी जीत होती है इसके लिए आपको सिनेमा हाल तक जाना होगा। फिल्म को देखना होगा।




आखिर फिल्म को क्यों देख सकते हैं -


- रितिक रोशन की बेहतरीन अदाकारी एक बार फिर से देखने को मिली है जो आपको इमोशनल करने के साथ सोचने पर भी विवश करती है.


- यामी गौतम और रितिक ने दिव्यांग किरदार बखूबी निभाया है. रोनित रॉय और उनकी डायलॉग डिलीवरी भी कमाल की है. नरेंद्र झा और सुरेश मेनन का काम भी सहज है.


- हालांकि फिल्म की कहानी के बारे में तो ट्रेलर से पता चल ही गया था, बावजूद इसके फिल्म देखते वक्त बोरियत नहीं होती. यही फिल्म का यूएसपी है.


- फिल्म के गानों की खासियत हे कि वो कहानी को आगे लेकर जाते हैं.


- फिल्म की सिनोमैटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है जो कि संजय गुप्ता की फिल्मों की खासियत भी है.


- फिल्म में दिव्यांग के हिसाब से रिसर्च वर्क ठीक है, जैसे पैसों की समझ, सुनने की परख, खाना पकाना इत्यादि. साथ ही दिव्यांग इंसान की बदला लेने की प्लानिंग दिलचस्पी बनाए रखती है.




बॉक्स ऑफिस

फिल्म लगभग 2350 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई है. वैसे मार्केटिंग और प्रोमोशन का खर्च मिलाकर फिल्म का बजट लगभग 50 करोड़ बताया जा रहा है जिसमें रितिक रोशन की फीस शामिल नहीं है. खबरों के मुताबिक, फिल्म के म्यूजिक (8 करोड़), डिजिटल और सैटेलाईट राइट्स (50 करोड़ ) पहले से ही बिक चुके हैं.


वहीं ओवरसीज (16 करोड़) और डिस्ट्रिब्यूशन (42 करोड़) बताया जा रहा. फिल्म की रिकवरी कॉस्ट 80 करोड़ है. अगर फिल्म 85 करोड़ कमाती है तो हिट और 120 करोड़ कमाते ही सुपर हिट कहलाएगी. वैसे 5 दिन का वीकेंड है और बेहतरीन ओपनिंग के चांसेस हैं.











सोर्स:इंडिया.कॉमआज तक 
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औरंगज़ेब के 49 साल के राज में मुगल राज की सरहदें जहां तक गईं, वहां तक कोई और मुगल फिर नहीं पहुंचा. लेकिन इस सफर में औरंगज़ेब ने कई ग़लतियां कीं. कहते हैं कि औरंगज़ेब की फौज जहां-जहां जाती थी, मंदिर-गुरुद्वारे-मज़ारें ज़मींदोज़ करती जाती थीं. लेकिन उसने एक बार इसके ठीक उलट काम भी किया था.




देश-भर में ऐसे मंदिर हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि इसे औरंगज़ेब ने तोड़ दिया था. भावनाएं सबूतों का इंतज़ार नहीं करतीं. इसलिए मंदिरों का तोड़ा जाना और फिर दोबारा बनवाया जाना, हिंदुस्तान में सबसे संवेदनशील मुद्दों में से है.





इस सब के उलट चित्रकूट में एक ऐसा मंदिर है, जिसके बारे में कहते हैं कि उसे खुद औरंगज़ेब ने बनवाया और उसके नाम जागीर भी लिखी.


चित्रकूट का बालाजी मंदिर




जब औरंगज़ेब पेट पकड़ कर बैठ गया



चित्रकूट का बालाजी मंदिर यहां के लोगों का अभिमान है. यहां भगवान बालाजी की एक सोने की मूर्ति है. और लगभग मूर्ति जितना ही महत्व रखने वाला एक फरमान जो औरंगज़ेब का जारी किया हुआ है. बकौल इंडिया टुडे  मंदिर के बारे में यहां के लोगों की ज़ुबान पर किस्सा ये है कि जब औरंगज़ेब चित्रकूट आया, तो उसने मंदाकिनी नदी के किनारे एक शिव मंदिर गिराने का हुक्म दिया. लेकिन जब मंदिर गिराने की कोशिश हुई, तो पूरी फौज के पेट में भयंकर दर्द शुरू हो गया, खुद औरंगज़ेब के भी.



शाही हकीम को इत्तला भेजी गई. लेकिन उनके इलाज से कोई आराम न हुआ. तभी मालूम चला कि इक्का-दुक्का फौजी इस दर्द से बचे हुए हैं. उन्होंने बताया कि दर्द का इलाज पास साधु बालकदास के पास है. औरंगज़ेब शहंशाह था. लेकिन पेट दर्द ने उसे ऐसा तंग किया था कि सारा ताव भूलकर बालक दास के पास पहुंचा. बाबा ने मंतर दिया या घुट्टी, मालूम नहीं. पर औरंगज़ेब को आराम पड़ गया.  बदले में औरंगज़ेब ने हुक्म दिया कि चित्रकूट को बख्श दिया जाए और फौज आगे बढ़ गई. ये किस्सा 1683 से 1686 के बीच का बताया जाता है.



औरंगज़ेब का फरमान


औरंगज़ेब ने यहां एक बालाजी मंदिर भी बनवाया और वहां के पुजारी महंत बालक दास के नाम एक फरमान जारी किया. इस फरमान के तहत मंदिर को औरंगज़ेब का शाही संरक्षण मिला. रख-रखाव के लिए पास के आठ गांव मंदिर की जागीर में लिख दिए गए, जहां से महंत लगान ले सकते थे.





बकौल हिंदुस्तान टाइम्स  ये गांव आज के इलाहाबाद ज़िले के हमुठा, चित्रकूट, रोदरा, सरया, मदरी, जारवा और दोहरिया हैं. फरमान के हिसाब से मंदिर को 330 बीघे ज़मीन हमेशा के लिए लिए मिल गई, वो भी टैक्स फ्री. पास के बाज़ारों से वसूल करके मंदिर को उस ज़माने का एक रुपया रोज़ देने की बात भी फरमान में लिखी हुई है. फरमान पर औरंगज़ेब के रेवेन्यू (राजस्व) मंत्री सआदत खां की सील लगी हुई है और इसे बहरमंद खां नाम के कातिब ने लिखा है.



कुछ गलतियां भी हैं फरमान में





इससे जुड़े सभी दस्तावेज़ मंदिर में बड़ी अच्छी तरह संभाल कर रखे गए हैं. पुराना होने की वजह से दरक रहे फरमान को एक मोटे कागज़ पर चिपका दिया गया है. लेकिन पुराने फरमान को रीस्टोर करने के फेर में कुछ गलतियां भी हो गई हैं. मसलन फरमान की शुरुआत ‘अल्लाहो अकबर’ से होती है.



 औरंगज़ेब ने अल्लाहो अकबर की जगह ‘बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीम’ कहने का चलन शुरू करवाया था. ऐसे में उसके फरमान पर अल्लाहो अकबर गलती की तरह लगता है. लेकिन फरमान को देखने पर मालूम चलता है कि अल्लाहो अकबर बाद में लिख कर चिपकाया गया. इसके अलावा फरमान के पीछे लिखे ‘ज़िम्न’ (ये फुटनोट की तरह होता है) पर भी फरमान से पहले की तारीख है. ये फरमान से बाद की होनी चाहिए थी.



लेकिन इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टॉरिकल रिसर्च (ICHR) के तब के चेयरमैन और जाने-माने इतिहासकार इरफान हबीब का यही कहना था कि फरमान की भाषा, उस पर लगी सील और अफसरों के नाम उसके सही होने की ओर ही इशारा करते हैं. फरमान में हुई गलतियां उसे रीस्टोर करने के दौरान आई होंगी.



चूंकि औरंगज़ेब के फरमान वाली बात यहां लोगों में खूब मशहूर है, मंदिर से जुड़े किसी भी दस्तावेज़ को औरंगज़ेब का बता दिए जाने का चलन है. पन्ना के राजाओं ने इस मंदिर को जो अनुदान दिए थे, उनके बारे कुछ ताम्रपत्र (तांबे के पत्तों पर लिखे दस्तावेज़) हैं. इन्हें भी लोग औरंगज़ेब का बता देते हैं.  एक अंग्रेज़ जज के फारसी में लिखे एक आदेश के बारे में भी ऐसा ही कहा जाता है.




क्यों खास है फरमान?



मुगलों ने इस तरह के कई फरमान जारी किए गए थे. खासकर अकबर और शाहजहां के ज़माने में. लेकिन औरंगज़ेब के ज़माने में ऐसे कम ही फरमान आए. जो आए, ज़्यादातर औरंगज़ेब के सूबेदारों के थे. लेकिन चित्रकूट के बालाजी मंदिर के हक में जारी फरमान सीधे औरंगज़ेब का जारी किया है. इसलिए ये खास है और दुर्लभ भी.



ये पक्के तौर पर कहना मुश्किल है कि मंदिर औरंगज़ेब ने ही बनवाया था. इसके भी सबूत नहीं हैं कि औरंगज़ेब सचमुच चित्रकूट आया था या नहीं. लेकिन मंदिर की बनावट पक्के तौर पर मुगल है.










15 सितंबर 1987 के इंडिया टुडे के अंक में इस मंदिर और औरंगज़ेब के फरमान के बारे में तफसील से बताया गया है. पंकज पचौरी की लिखी इस रपट का सबसे मार्मिक हिस्सा वो है जिसमें मंदिर में रोज़ आ रहे द्वारकाप्रसाद सैनी का बयान है. 1922 से रोज़ मंदिर आते रहे सैनी ने कहा था, “अयोध्या के लोगों को जाकर बता दो, हमारे ठाकुर जी एक ऐसे मंदिर में रहते हैं और इस पर कोई भी लड़ता नहीं है.”



सैनी के ऐसा कहने के बमुश्किल पांच साल तीन महीने बाद रामलला की जन्मभूमि क्लेम करने के मकसद से अयोध्या में बाबरी का विवादित ढांचा तोड़ दिया गया. भगवान राम ही थे जो वनवास के समय चित्रकूट में भी रहे थे. और यहीं के लोग न सिर्फ ये मानते हैं कि बालाजी  मंदिर औरंगज़ेब का बनाया हुआ है, बल्कि इस बात पर फख्र भी करते हैं.  





सोर्स:लल्लनटॉप 
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कौन कहता है बाबा रामदेव सिर्फ़ योगा करते हैं? पिछले ​कुछ महीनों में उनकी अलग-अलग वीडियों में आपने उनका SWAG देखा है. भले ही स्टेज पर रणवीर सिंह को मज़ा चखाना हो, या ओलंपिक पहलवान को 0-12 से हराना हो, बाबा जहां जाते हैं वहां अपना जलवा बिखेर देते हैं. इस बार बाबा कपिल शार्मा के शो पर पहुंचे, फिर क्या? बाबा का स्वैग यहां भी सेट था. कपिल और बाकी लोगों की तो स्क्रिप्ट पहले से लिखी हुई थी, लेकिन बाबा ने मौके पर अपनी हाज़िर जवाबी से सबकी बोलती बंद ही नहीं कर दी, बल्कि तालियां भी बटोर लीं! 




















वीडियो देखें :



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इंग्‍लैंड के खिलाफ सीरीज से पहले टीम इंडिया के वनडे टीम के कप्‍तान विराट कोहली ने कहा था कि डिसीजन रिव्‍यू सिस्‍टम(डीआरएस) के लिए वह महेंद्र सिंह धोनी के भरोसे रहेंगे | धोनी की बुद्धिमत्‍ता पुणे और कोलकाता वनडे में उपयोगी साबित हुई थी, लेकिन कोहली ने कोलकाता वनडे में बिना धोनी से पूछे ही डीआरएस का फैसला ले लिया जो भारत के खिलाफ साबित हुआ |



जिस से भारत का रिव्‍यू खराब चला गया | एक पारी में एक ही रिव्‍यू मिलता है | कोहली ने कोलकाता मैच में इंग्‍लैंड पारी के 28वें ओवर के दौरान डीआरएस का फैसला लिया | भारतीय खिलाडि़यों ने इंग्‍लैंड के कप्‍तान इयॉन मॉर्गन के खिलाफ जसप्रीत बुमराह की दूसरी गेंद पर कैच की अपील की थी | बहुत देर तक धोनी और बुमराह ने अपील की, लेकिन अंपायर ने उनके इस फैसले को ठुकरा दिया |



विराट कोहली ने इसके बाद धोनी की तरफ देखा और डीआरएस ले लिया हैं | इस दौरान धोनी विराट को रोकते हुए नज़र आये, लेकिन तब तक बहुत देर हो गई थी | शायद धोनी व बुमराह की अपील से कोहली को प्रोत्‍साहन मिला हो | लेकिेन मॉर्गन डीआरएस में भी नॉट आउट करार दिए गए |



खैर जो भी हुआ हो लेकिन इस डीआरएस के फैसले ने कोहली के उस बयान को सही साबित कर दिया कि इस तरह की अपील में धोनी का मुकाबला कोई नहीं कर सकता हैं | सीरीज से पहले हुई प्रेस कांफ्रेंस में कोहली ने कहा था कि आंकड़ों के अनुसार धोनी की डीआरएस की 95 प्रतिशत अपील कामयाब रही है | इसके बाद धोनी ने पुणे और कटक वनडे में इसे साबित भी कर दिया था |




जब अंपायर ने पुणे में हार्दिक पंड्या की गेंद पर मॉर्गन को आउट नहीं दिया था तो धोनी ने बिना कोहली से पूछे डीआरएस की अपील कर दी थी | कोहली ने इसके बाद रिव्‍यू मांगा था और धोनी की अपील सफल हुई थी | इसके बाद जब अंपायर ने कटक वनडे में युवराज को विकेट के पीछे कैच आउट करार दे दिया था तो धोनी ने तुरंत अपील की थी, जिसके बाद युवराज ने रिव्‍यू मांगा था और यह अपील भी सफल हुई थी | इससे धोनी की डीआरएस को लेकर का‍बिलियत साबित हो गई थी |








सोर्स:सर्किल ऑफ़ बॉलीवुड 
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भारतीय क्रिकेट टीम में खेलने वाले खिलाड़ी किसी स्टार से कम नहीं होते. वो क्या करते हैं, क्या खाते हैं. हर बात उनके फ़ैन्स जानना चाहते हैं. कई ऐसी भी बातें हैं, जो आज तक हम नहीं जान पाए.

 लेकिन क्रिकेट फैन होने के हक से आपको इन बातों का जानना ज़रूरी है. इसी से तो आप अपने स्टार के सबसे बड़े फ़ैन बनने के एक कदम नज़दीक पहुंच जाएंगे.

1.


आखिर ऐसा क्यों था, क्यों अज़हरुद्दीन के कॉलर हमेशा खड़े और हेल्मट का रंग सफेद होता था? इस सवाल का जवाब देते हैं हुए उन्होंने बताया की उन्हें गले पर धूप लगने से त्वचा की समस्या शुरू हो गई थी. इसके बाद उन्होंने अपने कॉलर खड़े रखने शुरू कर दिए और ये कब आदत बन गई पता ही नहीं चला.
वहीं अपना सफेद हेल्मेट उन्हें काफ़ी पसंद था. टेस्ट में इसे इस्तेमाल किया जाता था. फिर वन-डे में नीले रंग के हेल्मेट को पहनने का कोई नियम नहीं था, तो उन्होंने इसे पहनना शुरू कर दिया.

2. 


कपिल देव की आंखों में आंसू आ गए थे. वो भी एक Live इंटरव्यू के दौरान. इस इंटरव्यू में सवाल किया गया था कि क्या उन्होंने मैच फ़िक्सिंग कर के पैसे बनाए हैं. ये आरोप उनके साथी खिलाड़ी मनोज प्रभारकर ने उन पर लगाया था. 

इसका जवाब देने के दौरान कपिल भावुक हो गए थे. उनकी आंखों में आंसू आ गए. लेकिन इस सावल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा था कि 'मै ऐसा करने से पहले आत्महत्या करना ज़्यादा पसंद करुंगा, मेरे सारे पैसे ले लो, क्योंकि मैं ऐसे घर से आता हूं, जहां पैसे से ज़्यादा बड़ी इज़्ज़त होती है'.

3.


शाहिद अफ़रीदी ने 16 साल की उम्र में ही सबसे तेज़ वन-डे शतक लगाने का रिकॉर्ड बना दिया था. 37 बॉल में 100 करने वाले अफ़रीदी ने ये कारनामा सचिन के बल्ले से कर दिखाया था. सचिन ने अपना एक बैट वकार यूनिस को दिया था.

 अफ़रीदी जब टीम में आए थे, तो उनकी माली हालत ठीक नहीं थी और उनके पास क्रिकेट किट भी नहीं थी. इस मैच में उन्हें बैटिंग के लिए बैट वकार ने दिया था और कहा था कि 'इस बैट से बैटिंग करो, ये सचिन तेंदुलकर का बैट है.'

4. 


अनिल कुंबले के इस कारनामे को कोई नहीं भूल सकता. टेस्ट की एक पारी में 10 विकेट अपने नाम करने वाले दुनिया के दूसरे गेंदबाज़ बने थे. विरोधी टीम थी पाकिस्तान. 

लेकिन हाल ही में वसीम अकरम ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि वकार नहीं चाहते थे कि कुंबले को 10वां विकेट मिले. इसलिए उन्होंने अकरम को बोला कि क्यों न हम लोग रन आऊट हो जाएं. इससे अनिल कुंबले को 10 विकेट नहीं मिलेंगे. 

अकरम ने वकार को जवाब दिया कि अगर उसकी किस्मत में 10 विकेट लिखें हैं, तो उन्हें कोई नहीं रोक सकता. लेकिन कुंबले मुझे आऊट नहीं कर पाएगा. लेकिन अगले ओवर में ही अकरम, कुंबले की गेंद पर आऊट हो गए.

5. 


सहवाग मैदान में जितने गम्भीर दिखते थे, वो होते नहीं थे. इसका उदाहरण है ये वाक्या. सहवाग, चेन्नई में 300 रन बना कर बैटिंग कर रहे थे. तभी उन्हें 'तू जाने ना' गाना याद आया. लेकिन आगे के बोल उन्हें याद नहीं आ रहे थे. 

उन्होंने पवेलियन की तरफ़ इशारा किया और 12th Man, इशांत शर्मा को मैदान में बुलाया और उनसे इस गाने के बोल पूछे, उन्हें भी बोल याद नहीं थे. सहवाग ने इशांत को सुन कर गाने के बोल बताने को कहा. अगले ओवर में एक बार फिर इशांत मैदान में आए और सहवाग को गाने के बोल बता कर गए.

6. 


श्रीलंका के खिलाफ़ भारतीय टीम बल्लेबाज़ी कर रही थी. सबकी निगाहें सचिन पर थीं, लेकिन इस मैच में सचिन की हालत ख़राब थी. किसी गेंदबाज़ ने उन्हें परेशान नहीं किया था, बल्कि मैच के दौरान उनका पेट ख़राब था. उनकी तबियत इस कदर ख़राब थी कि उन्होंने बल्लेबाज़ी के दौरान अपने अंडरवियर में टिश्यू का इस्तेमाल किया हुआ था.

7. 


इस मैच को शायद ही कोई सचिन फ़ैन भूल सकता है. क्योंकि सचिन 194 पर नाबाद बल्लेबाज़ी कर रहे थे. हर कोई इंतज़ार कर रहा था सचिन के दोहरे शतक का. 

लेकिन तभी तत्कालीन कप्तान राहुल द्रविड़ ने पारी की घोषणा कर दी. इस पर सचिन को भी काफ़ी गुस्सा आया. ड्रेसिंग रूम में सचिन ने राहुल द्रविड को उन्हें अकेला छोड़ देने को कहा था.

8. 

जी हां, देश का सबसे बड़ा वॉन्टेड अपराधी दाऊद भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम तक पहुंच गया था. 1987 में शारहजाह में मैच के दौरान दाऊद ने ड्रेसिंग रूम में आ कर कपिल देव को मैच फ़िक्स करने के लिए कहा था. इसके बदले उन्हें बड़ी कीमत और कार गिफ़्ट करने की भी बात कही गई थी. लेकिन कपिल ने उन्हें बाहर निकाल दिया था.

9. 


मैच के बाद भारतीय टीम ड्रेसिंग रूम में कई तरह के मज़ाक करती है, लेकिन एक बार मुर्गा बनाया गया था उस वक़्त टीम के कप्तान सौरव गांगुली को. 

पूरी टीम ने उन पर भेदभाव का आरोप लगाया था. ये पूरी साजिश युवराज की थी. मामला इतना बढ़ गया कि सौरव कप्तानी पद से इस्तीफ़ा देने जा रहे थे. तब राहुल द्रविड ने इस पूरे मज़ाक को खोला.

10.


नेटवेस्ट सीरीज़ के फ़ाइनल के दौरान भारतीय टीम मुश्किलों में दिख रही थी. सब की निगाहें सहवाग पर थीं. लेकिन एक गंदे शॉट खेलने की वजह से सहवाग आऊट हो गए. पिछले कई मैचों में सहवाग अपनी पारी में कुछ अजीब शॉट खेल कर आऊट हुए थे. 

इस बात पर तत्लाकीन कोच जॉन राइट्स ने उन्हें समझाया था. लेकिन उस दिन जॉन का पारा बहुत चढ़ गया और जॉन ने सहवाग का कॉलर पकड़ लिया था.

11.



1996 में इंग्लैंड दौरे पर गई भारतीय टीम का हिस्सा थे गांगुली और सिद्धू. दोंनो मैच के बाद मिली छुट्टी में लंदन घूमने निकले. ये दोनों एक पब में जा कर बैठे. उनके ठीक पीछे 2 लड़के और तीन लड़कियां बैठीं थी. तभी उन लड़कों में से एक ने गांगुली की तरफ से बियर का कैन फ़ेका. सिद्धू को इस पर गुस्सा आया और वो उस लड़के के तरफ़ बढ़े. ये देख कर गांगुली भी उनकी तरफ़ बढ़े. 

गांगुली ने उस लड़के को धक्का दिया, वो लड़का ज़मीन पर गिरा और उठते ही उनके सिर पर बंदूक रख दी. लड़के की एक दोस्त ने जल्दी से उस लड़के को वहां से हटाया और उसे बाहर ले गई. गांगुली आज भी वो वाक्या सोच कर डर जाते हैं. उन्हें लगा था कि उनका करियर और लाइफ़ एक साथ चली जाती, अगर वो लड़की नहीं आती.

पता नहीं ऐसे और कितने वाक्ये हैं, जिनसे हम सब अंजान हैं. अगर आपके पास भी ऐसी ही कोई अनसुनी कहानी हो, तो हमें Comment Box में लिख कर ज़रूर बताएं.

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केजरीवाल सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक ‘आम आदमी कैंटीन’ की शुरुआत कर दी है। इस कैंटीन में रोजाना करीब 2 हजार लोगों का खाना बनेगा। यहां 10 रुपए में भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।


पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई इस कैंटीन को दिल्ली के सबसे बड़े अस्पताल लोक नायक जय प्रकाश नारायण (LNJP) अस्पताल में शुरू किया गया है।


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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने इस कैंटीन का उद्घाटन किया और खाने का स्वाद भी लिया। इस कैंटीन में फिलहाल दोपहर का भोजन ही उपलब्ध होगा।


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सत्येंद्र जैन ने कहाः


आम आदमी कैंटीन की खास बात यह है कि इसमें खाना कोई भी व्यक्ति खा सकता है। चाहे वह अस्पताल का रोगी हो या मरीजों के साथ आने वाले तीमारदार या अन्य बाहरी व्यक्ति। किसी के लिए कोई रोकटोक नहीं है। बस उसे 10 रुपए का कूपन कटवाना होगा।


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जैन ने कहा कि मरीजों के साथ आने वाले परिजनों की समस्या को देखते हुए अस्पताल ने 7 जनवरी को ऐसी सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव पर गौर करने के बाद महज 12 दिनों में ही इस प्रोजेक्ट को अमल में ला दिया गया।


अभी फिलहाल एक महीने के लिए ही 10 रुपए की थाली मिलेगी। एक महीने बाद सरकार इस प्रोजेक्ट का रिव्यू कर ऐसी ही 100 कैंटीन राजधानी में खोलने के विचार में है।



जैन ने बतायाः

मरीजों के साथ आने वाले उनके परिजनों की समस्या को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने 7 जनवरी को ऐसी सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव दिया था और महज 12 दिन के प्रयास में ही इस प्रोजेक्ट को शुरू कर दिया गया। अभी एक माह के लिए 10 रुपए प्लेट के आधार पर दोपहर का भोजन दिया जाएगा। आने वाले दिनों में इस सुविधा को रात के भोजन और सुबह के नाश्ते के लिए भी लागू किया जाएगा।



केजरीवाल सरकार ने तमिलनाडु के अम्मा कैंटीन की तर्ज पर आम आदमी कैंटीन खोलने का प्रस्ताव बहुत पहले ही रखा था, जिसकी शुरुआत अब कर दी गई है।




सोर्स:टॉप्सयाप्स 



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हरियाणा लोक सेवा आयोग ने युवा, प्रोफेशनल और अनुभवी उम्मीदवारों से नियमित आधार पर सीनियर साइंटिफिक आॅफिसर के कुल रिक्त 05 पदों की भर्ती के लिए आॅनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं।

 यह भर्ती आयोग फोरेंसिक साइंस लैबोरेट्री, मधुबन, करनाल के लिए की जा रही है। अधिकतम 47 वर्ष तक के उम्मीदवार आवेदन के पात्र है।


इन पदों के लिए कौन आवेदन कर सकता है ?


प्रथम श्रेणी के साथ साइकोलाॅजी में स्नातक डिग्री उत्तीर्ण और संबंधित क्षेत्र में 20 वर्ष का अनुभव रखने वाले उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन के पात्र हैं।


चयनित उम्मीदवारों को कितना वेतन प्राप्त होगा ?


इन पदों के लिए अंतिम रूप से चयनित किए गए उम्मीदवारों को 9300-34,800/- प्रति माह + ग्रेड-पे: 5400/- प्रतिमाह प्राप्त होगा।



कब तक आवेदन कर सकते हैं ?


इच्छुक और अनुभवी उम्मीदवार आॅनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 25 जनवरी 2017 तक आॅनलाइन आवेदन कर, आॅनलाइन आवेदन की हार्डकाॅपी 03 फरवरी 2017 से पहले भेज सकते हैं।


नोटः इस पद भर्ती के लिए पूर्व में आवेदन कर चुके उम्मीदवारों को दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं है। आपराधिक रिकाॅर्ड धारक उम्मीदवार आवेदन के पात्र नहीं है।



आवेदन कैसे करें ?


योग्य और इच्छुक उम्मीदवार आॅनलाइन आवेदन कर, आॅनलाइन आवेदन की हार्डकाॅपी आयोग को अंतिम तिथि से पहले भेज दें।


इस भर्ती की विस्तार जानकारी नीचे दी जा रही हैः-


हरियाणा लोक सेवा आयोग सीनियर साइंटिफिक आॅफिसर भर्ती विवरणः
महत्वपूर्ण तिथियां एवं जानकारियांः
आॅनलाइन आवेदन अंतिम तिथिः 25 जनवरी 2017
हार्डकाॅपी जमा अंतिम तिथिः 03 फरवरी 2017
पद नामः सीनियर साइंटिफिक आॅफिसर (साइकोलाॅजी)
कुल पदः 05
नौकरी स्थानः करनाल, हरियाणा
चयन प्रक्रियाः साक्षात्कार और अनुभव के आधार पर
आयु सीमाः 20-45 वर्ष
वेतनमानः 9300-34,800/- रूपए प्रति माह
ग्रेड-पेः 5400/-
शैक्षिक योग्यताः आवेदक उम्मीदवार को कम से कम 60 प्रतिशत अंकों के साथ साइकोलाॅजी में स्नातक डिग्री उत्तीर्ण होना चाहिए। और संबंधित क्षेत्र में अनुभवी होना चाहिए।
आवेदन कैसे करेंः योग्य और इच्छुक उम्मीदवार एचपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए, 25 जनवरी 2017 तक आॅनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आॅनलाइन आवेदन की हार्डकाॅपी नीचे दिए पते पर 03 फरवरी 2017 से पहले भेजें।
हार्डकाॅपी भेजने का पताः हरियाणा लोक सेवा आयोग, बायस नंबर- 1/10, ब्लाॅक- बी, सेक्टर- 4, पंचकुला- (हरियाणा).


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