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नई दिल्ली (31 दिसंबर): नोटबंदी की सीमा खत्म होने और नए साल से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देश के लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दिवाली के बाद की घटनाओं से यह सिद्ध हो चुका है कि लोग करप्शन के घुटन से मुक्त होना चाहते हैं।


- मैं देश के युवाओं से, व्यापारी वर्ग से, किसानों से आग्रह कहता हूं कि BHIM से ज्यादा से ज्यादा जुड़ें


- छोटे कारोबारियों को टैक्स में 2 फीसदी की छूट


- सरकार सीनियर सिटीजनों को बैंक में ज्यादा पैसा आने पर डिपॉजिट रेट घटा देते हैं। वरिष्‍ठ नागरिकों पर इसका असर ना पड़े 7.5 लाख रुपये तक की राशि पर 10 साल तक सालाना 8 प्रतिशत ब्याज दिया जाएगा। वरिष्‍ठ नागरिक इसे हर माह ले सकता है।

- गर्भवती महिलाओं के लिए एक देशव्यापी योजनाओं की शुरुआत की जा रही है। 650 जिलों में सरकार गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में पंजीकरण, टीकाकरण के लिए 6000 रुपये की आर्थिक मदद करेगी। यह राशि सीधे उनके खातों में जमा की जाएगी।


- छोटे कारोबारियों के लिए कैश क्रैडिट गारंटी 1 करोड़ से 2 करोड़ हुई


- स्ट्रिक्ट कॉपरेटिव सेंट्रल बैंक और प्राइमरी सोसायटी से जिन किसानों ने खरीफ और रबी की बुवाई के लिए कर्ज लिया था। उस कर्ज के 60 दिन का ब्याज सरकार वहन करेगी और किसानों के खातों में ट्रांसफर करेगी


- अगले तीन महीने में 3 करोड़ किसान क्रेडिट कार्डों को RUPAY कार्ड में बदला जाएगा।


- गांव में गरीब लोगों को 2 लाख रुपये तक के ऋण में 3 फीसदी की छूट दी जाएगी।


- 2017 में घर बनाने के लिए 9 लाख रुपए तक के कर्ज पर ब्याज में 4 प्रतिशत की छूट और 12 लाख रुपए तक के कर्ज पर ब्याज में 3 प्रतिशत की छूट।


- अब प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरों में इस वर्ग को नए घर देने के लिए दो नई स्कीमें बनाई गई हैं।


- गरीब लोग घर खरीद सकें, इसके लिए सरकार ने बड़े फैसले लिए।


- स्वतंत्रता के इतने साल बाद भी लाखों गरीबों के पास अपना घर नहीं है।


- बैंकों के कर्मचारियों ने बहुत मेहनत की, लेकिन कुछ लोगों ने निर्लज्जता से इसका फायदा उठाने की कोशिश की।


- बैंक भी लोकहित और गरीब कल्याण के अवसर को हाथ से ना जाने दे।


- बैंक अपनी परंपरागत प्राथमिकताओं से बाहर निकलकर, गरीब, निम्न मध्यवर्ग और मध्यवर्ग को ध्यान में रखकर कार्य करे।


- आदतन बेईमान लोगों को भी अब टेक्नोलॉजी की ताकत के कारण, काले कारोबार से निकलकर कानून-नियम का पालन करते हुए मुख्यधारा में आना होगा।


- ये सरकार सज्जनों की मित्र है और दुर्जनों को सज्जनता के रास्ते पर लौटाने के लिए उपयुक्त वातावरण को तैयार करने के पक्ष में है।


- नागरिकों से ज्यादा जिम्मेवारी अफसरों की है और इसलिए केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय को ईमानदारों की रक्षा और बेईमानों को अलग-थलग करना चाहिए।


- क्या आपको नहीं लगता कि देश की भलाई के लिए ईमानदारी के आंदोलन को और अधिक ताकत देने की जरूरत है।


- देशवासियों ने जो संकल्प दिखाया है, एक समय आएगा जब इसकी चर्चा बुद्धिजीवी करेंगे।



- किसी एक शहर में आपको सालाना 10 लाख से आय वाले लाखों लोग मिल जाएंगे।


- क्या आपको नहीं लगता कि ईमानदारी के लिए आंदोलन को और आगे ले जाना चाहिए।


- सरकार के पास दर्ज की गई जानकारी के हिसाब से देश में सिर्फ 24 लाख लोग यह स्वीकारते हैं कि उनकी आय 10 लाख से सालाना है।


- लोगों को नोटबंदी के दौरान अपने ही पैसे निकालने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ा, हमें आपकी कठिनाइयों का अहसास है।

- भ्रष्टाचार, कालाधन, जालीनोट के खिलाफ लड़ाई में आप एक कदम भी पीछे नहीं रहना चाहते हैं। आपका ये प्यार आशीर्वाद की तरह है।
- बैंकिंग व्यवस्था को सामान्य करने पर ध्यान केंद्रित किया जाए।


- विशेषकर ग्रामीण इलाकों में, दूर-दराज वाले इलाकों में प्रो-एक्टिव होकर हर छोटी से छोटी कमी को दूर किया जाए।


- हिंदुस्तान ने जैसा करके दिखाया है, ऐसा विश्व में कोई उदाहरण नहीं है।


- बीते कुछ वर्षों में 500 और 1000 के नोट पैरलर इकॉनोमी में चल रहे थे।


- देशवासियों ने जो कष्ट झेला है, वो भारत के उज्जवल भविष्य के लिए नागरिकों के त्याग की मिसाल है।

- गरीबी से बाहर निकलने को आतुर जिंदगी, भव्य भारत के निर्माण के लिए क्या कुछ नहीं कर सकती।


- हर हिंदुस्तानी के लिए सच्चाई और अच्छाई कितनी अहमियत रखती है।


- जब हम कहते हैं कि कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, इस बात को देशवासियों ने जीकर दिखाया है।


- दीवाली के बाद की घटनाओं से ये सिद्ध हो चुका है कि करोड़ों देशवासी ऐसी घुटन से मुक्ति के अवसर की तलाश कर रहे थे।


- दीवाली के तुरंत बाद हमारा देश ऐतिहासिक शुद्धि यज्ञ का गवाह बना।


- भारत के सवा सौ करोड़ नागरिक नया संकल्प, नई उमंग, नया जोश, नए सपने लेकर स्वागत करेंगे।
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समाजवादी पार्टी में मचे घमासान की परिणति के रूप में पार्टी प्रमुख मुलायस सिंह यादव ने यूपी के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव को पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया है. हालिया दौर में वह ऐसे तीसरे नेता हैं जिनको मुख्‍यमंत्री रहने के दौरान पार्टी से बाहर का रास्‍ता दिखाया गया है.

पेमा खांडू




अखिलेश यादव को पार्टी से निकाले जाने के 24 घंटे पहले ही अरुणाचल प्रदेश के मुख्‍यमंत्री पेमा खांडू को उनकी ही पार्टी पीपुल्‍स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीपीए) से सस्‍पेंड कर दिया गया था. अब उनकी जगह पार्टी दूसरे नेता को चुनने जा रही है. दरअसल पिछले एक साल से ही अरुणाचल प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता का दौर जारी है. इस अवधि में अब चौथा मुख्‍यमंत्री चुना जाएगा.

दरअसल पिछले साल दिसंबर तक नबाम टुकी के नेतृत्‍व में कांग्रेस की सरकार थी लेकिन टुकी के खिलाफ पार्टी के भीतर बगावत हो गई. राज्‍यपाल की भूमिका के चलते मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. इस बीच कलिखो पुल के नेतृत्‍व में बगावती खेमे ने विपक्षी भाजपा के दम पर सरकार बनाई. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने टुकी के पक्ष में फैसला दिया. लेकिन कलिखो पुल समेत कांग्रेस के बागी धड़े ने नबाम टुकी को समर्थन देने से इनकार कर दिया.

नतीजतन पेमा खांडू को मुख्‍यमंत्री बनाया गया. बाद में खांडू ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस से निकलकर पीपीए बना ली. अब खांडू को पीपीए ने पार्टी से सस्‍पेंड कर दिया है और उनकी जगह पार्टी नया नेता चुनने जा रही है.

जीतन राम मांझी


पिछले साल नौ फरवरी को बिहार के मुख्‍यमंत्री जीतन राम मांझी को जदयू ने इसी तरह पार्टी से बाहर कर दिया था. दरअसल 2014 में लोकसभा चुनाव में बिहार में जदयू की करारी पराजय के बाद तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने जिम्‍मेदारी लेते हुए इस्‍तीफा दे दिया था. उसके बाद मंत्रिमंडल में उनके वरिष्‍ठ सहयोगी जीतन राम मांझी की मुख्‍यमंत्री के रूप में ताजपोशी हुई. लेकिन कुछ समय बाद ही जदयू में उनकी मुखालफत शुरू हो गई और बाद में उन पर आरोप लगाया जाने लगा कि वह विपक्षी बीजेपी के साथ पींगे बढ़ा रहे हैं.

जीतन राम मांझी ने भी बिहार में अपनी पार्टी से बगावत कर दी थी

इन सबसे खफा नीतीश ने 2015 के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के मद्देनजर फिर से एक बार पार्टी की कमान संभालने का मन बनाया, लेकिन मांझी ने इस्‍तीफा देने से इनकार कर दिया. काफी मान-मनौवल के बाद भी जब वह नहीं माने और बीजेपी ने विश्‍वासमत में उनको परोक्ष रूप से समर्थन देने का ऐलान किया तो जदयू ने फरवरी 2015 में जीतन राम मांझी को पार्टी से बाहर निकाल दिया.

हालांकि इसके बाद जिस दिन जीतन राम मांझी को विश्‍वासमत हासिल करना था, उसी दिन सुबह राज्‍यपाल के पास जाकर उन्‍होंने अपना इस्‍तीफा सौंप दिया. दरअसल बहुमत के लिए अपेक्षित संख्‍या बल नहीं उपलब्‍ध होने के कारण उनको इस्‍तीफा देना पड़ा.




सौर्स:NDTV
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित हुए डिजिधन मेले में डिजिटल पेमेंट के लिए भीम ऐप लॉन्च की. ऐप की लॉन्चिंग पर पीएम मोदी ने कहा कि इस ऐप की मदद से आपका लेनदेन आसान हो जाएगा, गरीब एंपॉवर होंगे, लेकिन इसके लिए आपको किसी फीचर फोन, स्मार्टफोन या इंटरनेट की जरूरत नहीं पड़ेगी. प्ले स्टोर पर आप ये ऐप यहां से डाउनलोड कर सकते हैं. लॉन्चिंग के मौके पर पीएम ने इस ऐप के जरिए खादी को एक पेमेंट भी किया. हालांकि, पीएम मोदी द्वारा दी जाने वाली ये जानकारी काफी भ्रामक है, क्योंकि बिना स्मार्टफोन के कोई ऐप डाउनलोड या यूज करना मुमकिन नहीं है.

खैर, शब्दों के इस हेरफेर से दूर हम आपको बताएंगे कि क्या है भीम ऐप और कैसे ये काम करेगी…

# BHIM (Bharat Interface for Money) ऐप UPI (Unified Payment Interface) और USSD (Unstructured Supplementary Service Data) का रीब्रांडेड वर्जन है.

# एंडॉयड यूजर्स के लिए ये ऐप प्ले स्टोर पर उपलब्ध है, जबकि आईफोन यूजर्स के लिए ऐप जल्द ही लॉन्च की जाएगी. सरकार का दावा है कि इस ऐप के जरिए लोग अपने मोबाइल फोन से कैशलेस पेमेंट कर सकेंगे, जो फास्ट, सिक्योर और रिलायबल होगा.

# ये आधार-बेस्ट पेमेंट ऐप है, जिसे नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने डेवलप किया है. इसकी मदद से आप दूसरी UPI ऐप्स और बैंक अकाउंट के साथ जानकारी साझा कर सकेगा. यानी आप दूसरी ऐप्स पर जाए बिना BHIM की मदद से पेमेंट कर पाएंगे.

कैसे यूज करें भीम



# प्ले स्टोर से ऐप डाउनलोड करने के बाद यूजर को अपना बैंक अकाउंट रजिस्टर करना होगा और एक UPI पिन जेनरेट करना होगा. इसके बाद यूजर का फोन नंबर ही उसका पेमेंट एड्रेस बन जाएगा. एक बार रजिस्टर होने के बाद आप BHIM के जरिए ट्रांजैक्शंस कर सकते हैं.

ऐप के जरिए किस तरह पैसे भेजे और रिसीव किए जा सकते हैं



आप अपने मोबाइल नंबर (पेमेंट एड्रेस) के जरिए दोस्तों, परिवार या कस्टर्मस से पैसे ले सकते हैं और उन्हें भेज भी सकते हैं. इससे पैसा उन बैंक में भी भेजा जा सकता है, जो UPI सपोर्ट नहीं करते हैं. ऐसा MMID और IFSC कोड का इस्तेमाल करते हुए किया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर यूजर रिक्वेस्ट भेजकर पैसे कलेक्ट कर सकता है और पेमेंट रिवर्स भी कर सकता है.

कौन से बैंक BHIM ऐप सपोर्ट करते हैं



सरकार द्वारा जारी लिस्ट के मुताबिक ये बैंक भीम ऐप सपोर्ट करते हैं:

इलाहाबाद बैंक, आंध्रा बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, कैनरा बैंक, कैथलिक सीरियन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, DCB बैंक, देना बैंक, फेडरल बैंक, HDFC बैंक, ICICI बैंक, IDBI बैंक, IDFC बैंक, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, इंडसइंड बैंक, कर्नाटका बैंक, करूर वैश्य बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, पंजाब नेशनल बैंक, RBL बैंक, साउथ इंडियन बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सिंडिकेट बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, विजया बैंक.

अन्य जानकारी



ऐप में यूजर के पास अपना बैलेंस चेक करने और ट्रांजैक्शंस की जानकारी देखने का भी ऑप्शन है. इसके अलावा यूजर अगर अपने फोन नंबर के अलावा कोई कस्टम पेमेंट एड्रेस क्रिएट करना चाहे, तो कर सकता है. पेमेंट एड्रेस की तेजी से एंट्री करने के लिए QR कोड का भी विकल्प है. सरकार का कहना है कि व्यापारी आसानी से QR कोड प्रिंट कर सकते हैं. भीम ऐप अभी तक दो भाषाओं: हिंदी और अंग्रेजी में है. लेकिन सरकार के मुताबिक इसमें दूसरी भारतीय भाषाएं भी जल्दी ही जोड़ी जाएंगी.

भारत में अभी तक 40 करोड़ आधार नंबरों को बैंक खातों से जोड़ा जा चुका है. भारत में व्यस्कों की संख्या इसकी दोगुनी है. सरकार का उद्देश्य 2017 में सभी बैंक खातों को आधार से जुड़वाना है, जिससे सभी BHIM का इस्तेमाल करते हुए कैशलेस इकॉनमी की तरफ बढ़ सकें.
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कंप्यूटर पर काम करते समय कीबोर्ड हमारा बहुत समय बचाता है इसमें दिए कई शॉर्टकट से हमारा काम आसान हो जाता है ! कीबोर्ड पर ऐसी ही शॉर्टकट keys दी होती है F1 से F12 तक जो हमारा काम बेहद आसान कर देती हैं ! लेकिन अधिकतर लोग इन सभी फंक्शन keys के इस्तेमाल से वाकिफ नहीं होते ! तो आइये आज आपको बताते हैं कीबोर्ड पर दिए इन F1 से F12 फंक्शन keys का असली इस्तेमाल !

F1 – लगभग हर प्रोग्राम के लिए help स्क्रीन ओपन करने के लिए काम आती है ये F1 Key !

F2 – किसी भी फाइल या फोल्डर का नाम बदलने के लिए (rename) उस फाइल/फोल्डर को सेलेक्ट कर F2 Key दबाएं !

F3 – किसी एप्लीकेशन में सर्च फीचर ओपन करने के लिए F3 Key दबाएं !

F4 – किसी भी विंडो को बंद करने के लिए Alt+F4 Key दबाएं !

F5 – किसी विंडो या पेज को रिफ्रेश करने के लिए F5 Key दबाएं !

F6 – इन्टरनेट ब्राउज़र की एड्रेस बार पर कर्सर ले जाने के लिए F6 Key दबाएं !

F7 – MS Word में “spell check and grammar check” फीचर का इस्तेमाल करने के लिए F7 Key दबाएं !

F8 – कंप्यूटर ऑन करते समय boot मेनू पर जाने के लिए F8 Key दबाएं !

F9 – MS Word में डॉक्यूमेंट को रिफ्रेश करने और Microsoft Outlook में ईमेल के “Send and receives” ऑप्शन के लिए F9 Key दबाएं !

F10 – किसी एप्लीकेशन में मेनू बार ओपन करने के लिए F10 Key दबाएं, जैसा की माउस का राईट क्लिक होता है !

F11 – इन्टरनेट ब्राउज़र को full screen mode पर करने और हटाने के लिए F11 Key का इस्तेमाल होता है !

F12 – MS Word में Save as… डायलॉग बॉक्स ओपन करने के लिए F12 Key दबाएं !
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की प्रत्याशी सूची में लखनऊ कैन्ट सीट से किसी उम्मीदवार का नाम नहीं दिया गया है. यह बात इसलिए अहम है, क्योंकि समाजवादी पार्टी के मुखिया और मुख्यमंत्री के पिता मुलायम सिंह यादव ने यह सीट अपने छोटे बेटे प्रतीक की पत्नी अपर्णा यादव के लिए तय कर रखी है.


मुलायम सिंह यादव ने 26-वर्षीय अपर्णा यादव को लगभग एक साल पहले ही लखनऊ कैन्ट सीट से समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर दिया था. अपर्णा को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव के कैम्प की सदस्य माना जाता है, जिनके साथ ताकत को लेकर चल रही अखिलेश की जंग ने पार्टी में 'दोफाड़' कर डाला है.


इस झगड़े में मुलायम सिंह यादव ने अब तक पूरी तरह अपने भाई का ही साथ दिया है, और अखिलेश यादव के समर्थकों का आरोप है कि पार्टी मुखिया के दूसरी पत्नी तथा मुख्यमंत्री की सौतेली मां ने ही मुलायम सिंह यादव को अखिलेश के विरुद्ध भड़काया है.


अखिलेश यादव के इन समर्थको का यह भी मानना है कि अपर्णा यादव की राजनैतिक महत्वाकांक्षा अखिलेश यादव के स्थान पर समाजवादी पार्टी का युवा चेहरा बनने और फिर शायद वक्त के साथ मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनने की भी है.


कुछ महीने पहले अखिलेश और शिवपाल के बीच जारी जंग चरम पर थी, और उस समय सार्वजनिक हो गई, जब अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले विधायक उदयवीर सिंह ने मुलायम सिंह यादव को लिखकर कहा कि उनके परिवार के ही सदस्य मुख्यमंत्री को निशाना बना रहे हैं. इसे मुलायम की पत्नी की ओर इशारा समझा गया, जिससे मुलायम काफी नाराज़ हुए.


अपर्णा यादव लखनऊ कैन्ट विधानसभा क्षेत्र में लगातार दिखती रहती हैं, लेकिन फिलहाल इस सीट से रीता बहुगुणा जोशी विधायक हैं. समाजवादी पार्टी ने लखनऊ सीट कभी नहीं जीती है. सूत्रों का कहना है कि अपर्णा ने पहली बार चुनाव लड़ने के लिए समाजवादी पार्टी के लिहाज़ से सुरक्षित सीट की मांग की थी, लेकिन लखनऊ कैन्ट सीट पर समझौता करना पड़ा, और तभी से वह वहां प्रचार कर रही हैं.


अखिलेश यादव की सांसद पत्नी डिंपल यादव को जितनी आसानी से राजनैतिक करियर बनाने का मौका मिल गया, बताया जाता है कि अपर्णा के मन में उससे खटास पैदा हो गई, क्योंकि अपर्णा के मुताबिक उन्हें डिंपल की तुलना में बहुत ज़्यादा मेहनत करनी पड़ी. अपर्णा के पति प्रतीक फिटनेस बिज़नेस में हैं, और राजनैतिक रूप से ज़्यादा सक्रिय नहीं हैं, लेकिन अखिलेश यादव गुट का आरोप है कि बड़े भाई और पिता के बीच खाई पैदा करने में उनकी भी भूमिका रही है.


अपर्णा यादव इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुलेआम समर्थन देने के लिए सुर्खियों में आई थीं, और वर्ष 2015 में मैनपुरी में हुई मुलायम सिंह यादव के पोते की शादी के मौके पर अपर्णा और उनके पति प्रतीक ने प्रधानमंत्री के साथ सेल्फी भी खींची थी. वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सभी कार्यक्रमों को समर्थन देने के मामले में भी काफी मुखर रही हैं.






सौर्स:NDTV
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BHIM App Download: भीम ऐप सरकार के पुराने यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) और यूएसएसडी (अस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंट्री सर्विस डाटा) का ही नवीनीकृत रूप है।

BHIM App: प्रधानमंत्री ने डिजी धन मेला कार्यक्रम के दौरान ऐप की घोषणा की। (Photo: Google Play)


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नया पेमेंट ऐप भीम (BHIM या Bharat Interface for Money) लॉन्च किया है। ऐप का नाम डॉक्टर भीम राव अंबेडर के नाम पर रखा गया है। नरेंद्र मोदी सरकार ने यह ऐप कैशलेस या लेस-कैश इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए शुरू की है। भीम ऐप सरकार के पुराने यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) और यूएसएसडी (अस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंट्री सर्विस डाटा) का ही नवीनीकृत रूप है। यहां हम आपको बताएंगे कैसे इस ऐप को डाउनलोड करें और कैसे इसका इस्तेमाल करें:

ऐसे करें BHIM App डाउनलोड:


– ऐप डाउनलोड करने के लिए गूगल प्ले स्टोर पर जाएं या फिर इस लिंक पर क्लिक करें।

– प्ले स्टोर पर bhim national payment डालकर सर्च कर सकते हैं।

– ऐप डाउनलोड करें और स्मार्टफोन में इस्टॉल करें।

– इसके बाद ऐप को ओपन करके अपने बैंक से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।

– इसके बाद ऐप के जरिए पैसे मंगाए या भेजे जा सकते हैं।


ऐसे करें BHIM App इस्तेमाल:


– ऐप को ओपन करें और पासवर्ड सेट करें

– यहां आपको send, request, scan & Pay के विकल्प दिखाई देंगे।

– send पर क्लिक करें और जिसे पैसे भेजने है उसका रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालें व Verify करें।

– अगली स्लाइड में अमाउंड और रिमार्क डालें व PAY पर क्लिक करें।

– इसके बाद UPI पिन डालते ही पैसा ट्रांसफर हो जाएगा

– पैसे भेजने के लिए सिर्फ एक बार अपना बैंक अकाउंट नंबर रजिस्टर करें और UPI पिनकोड जनरेट करें

– इंटरनेट नहीं होने पर फोन से USSD कोड *99# डायल करके भी इस ऐप को ऑपरेट किया जा सकता है

स्क्रीनशॉट के जरिए समझिए प्रोसेस।


प्रधानमंत्री ने दिल्ली स्थित ताकटोरा स्टेडियम में डिजी धन मेला कार्यक्रम के दौरान ऐप की घोषणा की। पीएम ने लकी ग्राहक योजना के विजेताओं के नाम की भी घोषणा की। भीम ऐप के उद्घाटन पीएम मोदी ने खादी ग्रामोद्योग से खरीदारी करके की। भीम ऐप को एंड्रॉयड ऐप स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।

माना जा रहा है कि ये ऐप प्लास्टिक कार्ड और पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन की जगह ले सकेगा और नकद-मुक्त अर्थव्यवस्था के निर्माण में योगदान दे सकेगा।






सौर्स:जनसत्ता
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अभी-अभी बड़ी खबर आ रही है उत्तर प्रदेश के लखनऊ से। खबर है कि प्रदेश के CM अखिलेश समाजवादी पार्टी से निष्काषित होने के बाद भाजपा का दामन थामेंगे।



खबर मिली है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी पार्टी से निकालने के बाद से ही अखिलेश के संपर्क में थे। हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टी नहीं हुई है लेकिन अखिलेश यादव के भाजपा में जाने के पूरे चांस हैं।


समाजवादी पार्टी कुनबे में टिकट वितरण को लेकर जारी रार शुक्रवार को आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो गई। पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने शुक्रवार शाम एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस कर मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव और पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव को छह साल के लिए पार्टी से निष्‍कासित कर दिया। उन्‍होंने कहा कि रामगोपाल ने पार्टी को बहुत नुकसान पहुंचाया है। मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव नहीं समझ रहे। रामगोपाल उनका भविष्‍य बर्बाद कर रहे हैं|


गौरतलब है कि सपा सुप्रीमो ने कुछ समय पहले भी रामगोपाल को पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया था। इस पर मुलायम ने कहा कि उसके बाद रामगोपाल ने माफी मांग ली थी और अपनी गलती स्‍वीकार कर ली थी। इसलिए उनको माफ कर दिया था, लेकिन अब पार्टी में वापस आने के बाद रामगोपाल ने सीधा मुझ पर हमला किया है। इसको बर्दाश्‍त नहीं किया जा सकता। इसलिए रामगोपाल को पार्टी से निकाला जाता है।





सौर्स:लईवेइंडिया
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कश्मीर में श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में एक इमारत है. रोज़ाबल नाम की. इस जगह के इतिहास में ऐसे लोगों की भी दिलचस्पी है, जो कश्मीर के भूगोल में कोई इंट्रेस्ट नहीं रखते. दावा किया जाता है कि ये रोज़ाबल श्राइन, ईसामसीह की कब्र है. वैसे रौज़ा का अर्थ होता है कब्र और बल का मतलब जगह होता है.


रोज़ाबल की कहानी में कई रोचक पेंच हैं. उनकी बात करने से पहले ये बता दें. ईसा मसीह के जीवन से जुड़ी तीन ऐसी घटनाए हैं जिनपर कई कॉन्सपिरेसी थ्योरीज़ हैं.



ईसा मसीह की 13 से 30 साल की उम्र के बीच की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. कई लोग दावा करते हैं कि इस बीच वे हिंदुस्तान आए और बुद्ध के प्रभाव में रहे. ईसा की शिक्षाओं में कई जगहों पर बुद्ध की बातों के साथ समानताओं को इसका आधार बनाया जाता है.



दूसरी थ्योरी उनके मैरी मेग्डैलिन से विवाह, उनकी एक संतान होने और उसकी रक्षा ‘प्रायरी ऑफ ज़ायान’ नाम के संगठन के द्वारा किए जाने की है. इस पर प्रसिद्ध लेखक डैन ब्राउन किताब लिख चुके हैं. द विंची कोड नाम की इस किताब पर इसी नाम से फिल्म बनी है. इसके बाद से ये थ्योरी काफी चर्चित हुई है.



तीसरी कहानी ईसा को सूली पर चढ़ाए जाने को लेकर है. ईसाई मान्यताओं के मुताबिक ईस्टर के दिन ईसा का पुनर्जन्म हुआ था. यहां तक तो कोई समस्या नहीं है. मगर ट्विस्ट इसके बाद आता है. ईसाई मानते हैं इसके बाद वो स्वर्ग चले गए और संशयवादी मानते हैं कि वो एशिया में जाकर गुमनाम ज़िंदगी बिताने लगे. इस धारणा के पीछे का तर्क है कि भारत में ईसाइयत लगभग 2,000 सालों से है. मतलब ईसा को सूली पर लटकाए जाने के तुरंत बाद से.




अब बात रोज़ाबल की. स्थानीय निवासी कहते हैं कि ये युज़ असफ की कब्र है. युज़ असफ, अहमदिया मुस्लिमों का ईसा को दिया गया नाम है. इन धारणाओं के कारण अहमदिया मुस्लिम, बाकी मुसलमानों के निशाने पर रहा है.


वैसे रोज़ाबल की इमारत में शियाओं के 8वें इमाम मूसा रज़ा के वंशज, संत मीर सैय्यद नसीरुद्दीन की भी मज़ार है और इसकी देखभाल सुन्नियों का एक बोर्ड करता है. इस इमारत में एक पत्थर भी है. इस पत्थर पर दो बीच से छेदे गए पैरों की छाप है. इसके अलावा कब्र इस्लामिक नहीं यहूदी कायदों से बनी है.


रोज़ाबल के अंदर


रोज़ाबल श्राइन की एक और विचित्र बात ये है कि इसका कोई भी ज़िक्र कश्मीरी बौद्ध इतिहास में नहीं मिलता है. इतिहास में पहली बार इसकी चर्चा 1747 में हुई. जब श्रीनगर के सूफी लेखक ख्वाजा मोहम्मद आज़म ने अपनी किताब ‘तारीख आज़मी’ में लिखा कि ये मज़ार एक प्राचीन विदेशी पैगम्बर और राजकुमार युज़ असफ की है.


छेद वाले पैरों की छाप


इसके बाद 1770 में इसके बारे में एक मुकदमे का फैसला सुनाते हुए मुल्ला फाजिल ने कहा.

सबूतों को देखने के बाद, ये नतीजा निकलता है कि राजा गोपदत्त, जिसने सोलोमन का सिंघासन बनवाया, के समय युज़ असफ घाटी में आए थे. मर कर ज़िंदा होने वाले उस महान शहजादे ने दुनियावी चीज़ों को छोड़ दिया था. वो अपना पूरा ध्यान सिर्फ इबादत में लगाता था. कश्मीर के लोग, जो हज़रत नूह के बाद बुतपरस्त बन गए थे. उन्हें उसने ऊपर वाले की इबादत करने के लिए कहा. वो एक ही ऊपर वाला होने की बात कहते रहते थे. बाद में इस मज़ार में सैय्यद नसीरुद्दीन को भी दफनाया गया.
इस आदेश के अनुवाद के समय इसमें बुद्ध का भी ज़िक्र आ गया. बाद में कहा गया कि ये संस्कृत और फारसी के बीच पैदा हुए भ्रम के कारण हुआ था.


कहा जाता है कि1965 की जंग के दौरान इसको नष्ट करने की भी कोशिश हुई, मगर इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं है.


लेखक अश्विन सांघी इस पर ‘रोज़ाबल लाइन’ के नाम से उपन्यास लिख चुके हैं. वहीं BBC चैनल 4 ने ‘हिडन स्टोरी ऑफ जीसस’ के नाम से एक डॉक्युमेंट्री भी बनाई. इसमें रोज़ाबल के अंदर की फुटेज भी दिखाई गई. डॉक्युमेंट्री में जहां युज़ असफ के ईसा होने की संभावना को खुला रखा गया, वहीं BBC के कुछ लोगों ने कहा इस कहानी में स्थानीय व्यापारी मसाला मिलाकर परोस रहे हैं ताकि विदेशी वहां घूमने आएं.


इन सबमें सच कितना है और कितना कल्पना की मिलावट है पता नहीं मगर ये इतिहास की अभी तक एक न सुलझने वाली रोचक पहेली ज़रूर है.







सौर्स:लल्लनटॉप
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हॉकी को लोगों को और ज्यादा लोकप्रिय बनाने के मकसद से इसके कई नियमों में बदलाव को अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ यानी एफआईएच के कार्यकारी बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। अब हर स्तर पर हॉकी 15-15 मिनट के चार क्वार्टर के नियम को अनिवार्य कर दिया गया है। एफआईएच की टूर्नामेंट कमेटी ने आगामी हॉकी विश्वकप में विभिन्न बदलावों की सिफारिश की थी जिसे वैश्विक संस्था के कार्यकारी बोर्ड ने अपनी मंजूरी दे दी है।



1971 से शुरु हुए हॉकी विश्वकप में अब 12 की जगह 16 टीमें खेलती नजर आएंगी। फिलहाल जो फैसला लिया गया है वह 2018 और 2022 विश्वकप पर लागू होगा। नए नियमों के अनुरूप 16 टीमों को चार-चार टीमों के चार ग्रुप में बांटा जाएगा। इसके बाद ग्रुप में शीर्ष पर रही चार टीमें सीधे क्वार्टर फाइनल में पहुंच जाएंगी। वहीं अंतिम पायदान में रही टीमें प्रतियोगिता से बाहर हो जाएंगी।



इसके बाद चारों ग्रुप में दूसरे और तीसरे पायदान पर रही टीमों का मुकाबला होगा। इसके बाद बाकी की 4 क्वार्टर फाइनलिस्ट का निर्णय होगा। क्वार्टर फाइनल के बाद मुकाबले नॉकआउट आधार पर खेले जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह निकलकर सामने आई है कि एलिमिनेशन के समय टीम के प्रदर्शन के आधार पर उसकी रैंकिंग तय की जाएगी।






सोर्स:न्यूज़24

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आप दुनियाभर के लोगों के स्वभाव से परिचित होंगे इन लोगों में ही एक शख्स ऐसा भी था जिसे लोग मनुष्य ही नही मानते थे। शायद आप भी इस शख्स के नाम से परिचित होंगे, आज हम आपको इस शख्स की क्रूरता की ऐसी कहानी बता रहे हैं जो शायद आपकी रूह कंपा देगी।



युगांडा का तानाशाह ईदी अमीन को बेहद क्रूर शासक के तौर पर याद किया जाता है। इस शख्स ने 8 वर्ष तक राष्ट्रपति के तौर पर राज किया और लोगों पर इतने जुल्म किये कि सुनने वालों की रूह भी कांप जाये। सिर्फ इतना ही नही इस शख्स ने अपने पूरे शासन काल में करीब 6 लाख लोगों को मौत के घाट उतरवाया। ये शख्स इतना क्रूर था कि इंसानों का मांस भी खा जाता था। इसके फ्रिज में इंसानों के कटे हुए सिर और अन्य अंग भी बरामद हुए थे। अपनी इसी क्रूरता के कारण ही इसे 'मैड मैन ऑफ अफ्रीका' भी कहा जाता है।




इस शख्स ने क्रूरता की सभी हदें पार करते हुए हर खूबसूरत लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया। ये लोगों की हत्या किसी हथियार से नही करता था बल्कि उन्हें मारने के लिये जिंदा ही जमीन में गड़वा देता था या फिर भूखे मगरमच्छों को खिला देता था।



1979 में तंजानिया और अमीन विरोधी युगांडा सेना ने अमीन के शासन को जड़ से उखाड़ फेंका। इसके बाद अमीन सऊदी अरब आ गया, जहां साल 2003 में उसकी मौत हो गई। लेकिन आज भी इसकी क्रूरता की कहानियां सुन लोग सहम जाते हैं।







सोर्स:दैनिक जागरण

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कहते हैं हर लव स्टोरी अलग होती है. बात तो बड़ी आर्चीज ग्रीटिंग कार्ड टाइप है. पर कुछ प्रेम कहानियां सचमुच डिफरेंट होती हैं. इतनी कि इतिहास बना जाती हैं. अरे भाई लैला-मजनू या रोमियो-जूलियट की तरह इश्क में मरने में क्या रखा है? इश्क करो तो ऐसे करो जैसे इंडियन आर्मी के इस कैप्टन ने किया था. आज से 40 साल पहले.


शौंतेल नाम था उसका. पेरिस फ्लाइंग क्लब में स्काय डाइविंग सिखाती थी. शमशेर उसका स्टूडेंट था. टीचर से इश्क हो गया. शौंतेल से कहा, मुझे शादी कर लो. शौंतेल बोली, शादी तो कर लूंगी. पर तब, जब इंडिया में उड़ सकूंगी. शौंतेल को स्काय डाइविंग से इश्क था. और शमशेर को शौंतेल से इश्क था.


शमशेर इंडियन आर्मी में कैप्टेन था, इरादों का मजबूत. जाहिर है इश्क भी मजबूत था. लेकिन इंडिया के लिए ये बिल्कुल नई चीज थी. शमशेर ने तय किया था, शौंतेल से हवा में शादी करेगा. पर सरकार से परमिशन नहीं मिली. लेकिन शौंतेल के साथ उड़ना तो था ही.


फिर एक दिन शमशेर शौंतेल के साथ जमीन से 5000 फुट ऊपर एक जहाज से कूदा. शमशेर अपने प्यार के साथ पंछी की तरह उड़ता रहा. उसे कोई ऑर्डर देने वाला नहीं था. वो आजाद था. और ये जानता था कि धरती पर उतर कर वो अपनी महबूबा से शादी कर सकेगा. जब दोनों के पैराशूट ने जमीन को छुआ, लोगों को पैराशूट के ऊपर चढ़ते और ताली बजाते पाया.



आसमान से धरती के इस एक मिनट के सफर में न सिर्फ शमशेर अपनी पत्नी का सपना पूरा कर रहा था, बल्कि भारत देश को एक नया खेल, नया एडवेंचर दे रहा था. स्काय डाइविंग.




और उस दिन शमशेर सिंह ने कहा था, “मैं जानता हूं इंडिया का युवा अपने लड़ से डर कर स्काय डाइविंग को एक खेल की तरह अपनाएगा. और फिर उससे प्यार कर बैठेगा. क्योंकि रोमांच डर से बड़ा होता है.”





सोर्स:लल्लनटॉप
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लोगों ने फ्री में मिल रहा रिलायंस जियो सिम ले तो लिया, लेकिन इसकी स्पीड को लेकर काफी बाते सामने आ रही है। 4जी होने के बावजूद इंटरनेट स्पीड ऐसी नहीं मिल रही, जैसी होनी चाहिए। हालांकि आज हम आपको बताएंगे कि किस तरह से इस प्रॉब्लम को कुछ सेटिंग्स की मदद से दूर किया जा सकता है।



क्या है सेटिंग...




1: आपका स्मार्टफोन 4G VOLTE को सपोर्ट करता है या नहीं, इस बात की भी जानकारी होना चाहिए। इसके लिए आप http://willmyphonework.net/ पर जा सकते हैं। भारत में रिलायंस जिओ की सिग्नल 800MHz, 1800MHz और 2300MHz को सपोर्ट करता है।।


2: आपके स्मार्टफोन की LTE नेटवर्क सेटिंग गलत हो सकती है। इसके लिए Settings => Mobile Networks => Preferred Network Type => LTE को चुनें। यदि फोन डुअल सिम वाला है, तो हो सकता है एक स्लॉट 4G को सपोर्ट नहीं करता हो। ऐसे में जिओ सिम को पहले स्लॉट में लगाएं।


3: यदि आपके स्मार्टफोन में सिग्नल आ रहे हैं, लेकिन इंटरनेट नहीं चल रहा तो इसके लिए Ping-ON Test करना होगा। इस टेस्ट के लिए इन स्टेप को फॉलो करें।

- फोन से *#*#4636 #*# USSD कोड डायल करें।

- आपको Phone Info का ऑप्शन दिखाई देगा, इस पर क्लिक करें।

- अब Run Ping Test पर क्लिक करें। ध्यान रहे कि आपका रेडियो ऑप्शन ON हो।

- इसके बाद स्मार्टफोन को रिस्टार्ट करें।


4: इन सब के बाद भी नेटवर्क नहीं आ रहे हैं तो नेटवर्क को मैन्युअली सिलेक्ट करें। इसके लिए Settings => More Networks => Mobile Network => में WCDMA सिलेक्ट करें।


5: सिग्नल पूरे आ रहे हैं पर फिर भी इंटरनेट या कॉलिंग error आ रही है, तो सबसे अपना मोबाइल डाटा ऑफ करें। इसके लिए Settings => Mobile Networks => Jio 4G => Cellular Networks पर जाएं। यदि डाटा पहले से ही ऑफ है तो Setting => mobile network => network operators => search network => Jio 4G को चुनें। Registered on Network का मैसेज आते ही आप सिम को यूज कर सकते हैं।







सोर्स:न्यूज़ 24
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आज एक ऐसे इंसान का जन्मदिन है, जिसको भारत की राजनीति में बहुत कुछ बदलने का श्रेय प्राप्त है. भारत में बसे एक देश उत्तर प्रदेश की राजनीति बदलने का श्रेय प्राप्त है. किसानों की बातों को कागजों और पॉलिसी से उठाकर नेतागिरी में बदलने का श्रेय प्राप्त है. आज चौधरी चरण सिंह का जन्मदिन है.


भारत के पांचवें प्रधानमंत्री. गाजियाबाद जिले के हापुड़ में जन्म हुआ था चरण सिंह का. 23 दिसंबर 1902 को. ये ऐसा परिवेश था जिसमें किसानों की समस्यायें जरा सी आंख घुमाने पर दिख जातीं. ना चाहते हुए भी एक इंसान के मन में इसकी रेख खिंच जाती.


गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन में हिंडन नदी के किनारे ही बनाया नमक



चरण सिंह ने आगरा विश्वविद्यालय से लॉ में डिग्री ली. 1928 में गाजियाबाद में वकालत करने लगे. उसी वक्त अपने समाज के लोगों की समस्याओं को गौर से देखने लगे. ये वो वक्त था जब देश में गांधी का कहा चलता था. जनता उनके पीछे-पीछे चलती थी. तो 1929 में लाहौर में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज्य का ऐलान किया. नेहरू कांग्रेस के सबसे बड़े नेता के रूप में उभरे. चरण सिंह ने इस से प्रभावित होकर गाजियाबाद में कांग्रेस कमिटी का गठन किया.


1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू हुआ. अब गाजियाबाद में समंदर तो था नहीं. तो चरण सिंह हिंडन नदी के किनारे पहुंच गये. नमक बनाने. जेल हो गई. 6 महीने तक. वापसी के बाद चरण सिंह बिल्कुल ही स्वतंत्रता आंदोलन में आ गये.


1937 में चुनाव हुए. बागपत से चरण सिंह विधान सभा के लिए चुने गये. विधानसभा में एक बिल पेश किया. किसानों की फसल से संबंधित. ये उस वक्त का क्रांतिकारी बिल था. क्योंकि ब्रिटिश सरकार ने भारतीय किसानों को ही सबसे ज्यादा चोट पहुंचाई थी.


मुगलिया टैक्स सिस्टम को हटाकर बेहद क्रूर सिस्टम लाया था अंग्रेजी सरकार ने. भारत में इसकी वजह से गरीबी बहुत फैल गई थी. किसानों को लगता था कि अब कुछ नहीं हो सकता. पर 1937 की कांग्रेस सरकार ने अप्रत्याशित रूप से एक नई जान फूंक दी किसानों में. कांग्रेस के चुनाव लड़ने को लेकर लोगों ने बड़ी आपत्ति जताई थी. कि ब्रिटिश सरकार की बात मान रहे हैं. पर किसानों पर ध्यान और दंगों को लेकर कड़ा रुख कांग्रेस की उपलब्धि रही 1937 की सरकार बनने के बाद. साथ ही भविष्य के लिए ग्राउंड तैयार हुआ.


1928 में किसान के मुकदमों के फैसले करवाकर उनको आपस में लड़ने के बजाय आपसी बातचीत द्वारा सुलझाने की कोशिश शुरू की.
1939 में कर्जा माफी विधेयक पास करवाकर किसानों के खेतों की नीलामी रुकवाई.
1939 में ही किसान के बच्चों को सरकारी नौकरियों में 50 फीसदी आरक्षण दिलाने की कोशिश की, पर इसमें सफलता नहीं मिल पाई.
1939 में किसानों को टैक्स बढ़ाने और बेदखली से मुक्ति दिलाने के लिए जमीन उपयोग का बिल तैयार किया.




1940 में कांग्रेस बड़ी उहापोह में थी कि ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ें कि नहीं. छोटे स्तर पर व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरूआत हुई. चरण सिंह इसमें भी शामिल हुए. जेल गये. फिर छूटे. 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में चरण सिंह को फिर मौका मिला. अंडरग्राउंड हो गये. एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन तैयार किया. पुलिस का आदेश था कि देखते ही गोली मार दी जाए. पर चरण सिंह सभा कर के हर जगह से निकल जाते. अंत में गिरफ्तार हो गये. डेढ़ साल की सजा हुई. जेल में ही उन्होंने किताब लिखी. शिष्टाचार.


कांग्रेस में रहते हुए नेहरू के विरोधी रहे, फिर पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई यूपी में



आजादी के बाद भारत में सोवियत रूस की तर्ज पर आर्थिक नीतियां लगाई गईं. पर कई लोगों का कहना था कि इंडिया में ये चलेगा नहीं. ये धड़ा कहता था कि किसानों को जमीन का मालिकाना हक देने से ही बात बनेगी. चरण सिंह भी इन्हीं में से थे. नेहरू का विरोध करने वाले नेताओं में थे ये लोग. उस वक्त नेहरू का विरोध करना ही बड़ी बात थी. राजनैतिक करियर पर असर पड़ता. पर इन लोगों ने अपनी बात कहनी शुरू कर दी थी.


मधु लिमये और राम मनोहर लोहिया समेत उस वक्त के बड़े नेता


चरण सिंह चुनाव लड़ना शुरू किये. कांग्रेस से ही. 1952, 1962 और 1967 की विधानसभा में जीते. गोविंद बल्लभ पंत की सरकार में पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी रहे. रेवेन्यू, लॉ, इनफॉर्मेशन, हेल्थ कई मिनिस्ट्री में भी रहे. संपूर्णानंद और चंद्रभानु गुप्ता की सरकार में भी मंत्री रहे.


1967 में चरण सिंह ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी. भारतीय क्रांति दल नाम से अपनी पार्टी बना ली. राम मनोहर लोहिया का हाथ था इनके ऊपर. चुनाव हुए. उत्तर प्रदेश में पहली बार कांग्रेस हारी. चरण सिंह मुख्यमंत्री बने. 1967 और 1970 में.


1952 में ही उत्तर प्रदेश में जमींदारी प्रथा खत्म हुई. लेखपाल का पद बना था. जमीन के मामले देखने के लिए. अब ये करप्ट पोस्ट मानी जाती है. पर इरादे थे जमींदारी खत्म कर किसानों की मदद करना. अपने मुख्यमंत्री काल में चरण सिंह ने एक मेजर डिसीजन लेते हुए खाद पर से सेल्स टैक्स हटा लिया. सीलिंग से मिली जमीन बांटने की कोशिश की किसानों में. पर उत्तर प्रदेश में ये सफल नहीं हो पाया. इसकी कई वजहें थीं. पर हम ये कह सकते हैं कि हमारे नेताओं ने सही वक्त पर सही डिसीजन नहीं लिया.


चरण सिंह की रैली



फिर वो प्रधानमंत्री बने जिसे कभी संसद में बोलने का मौका नहीं मिला




उसके बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बन चुकी थीं. देश में माहौल गड़बड़ हो गया था. 1975 में इंदिरा ने विवादास्पद डिसीजन लिया. इमर्जेंसी लगा दी. चरण सिंह भी जेल में डाल दिये गये. जेल में विरोधी पक्ष लामबंद हो गया. 1977 में चुनाव हुए लोकसभा के. इंदिरा हारीं. बुरी तरह. और देश में पहली बार गैर-कांग्रेसी पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाई. उस वक्त ये सोचना असंभव लगता था. जनता पार्टी की सरकार बनी. मोरार जी देसाई प्रधानमंत्री बने. चरण सिंह इस सरकार में उप-प्रधानमंत्री और गृहमंत्री रहे.


परिवार के साथ चौधरी चरण सिंह



पर जनता पार्टी में कलह हो गई. ढेर जोगी मठ के उजाड़. मोरार जी की सरकार गिर गई. बाद में कांग्रेस के ही सपोर्ट से चरण सिंह प्रधानमंत्री बने. 28 जुलाई 1979 को. 20 अगस्त तक का टाइम दिया गया था बहुमत साबित करने के लिए. इंदिरा ने 19 अगस्त को समर्थन वापस ले लिया. सरकार गिर गई. संसद का बगैर एक दिन सामना किये चरण सिंह को रिजाइन करना पड़ा. कहते हैं किअगर इस प्रधानमंत्री ने बोला होता संसद में, तो किसानों की कहानी कुछ और होती.


प्रधानमंत्री रहते हुए चरण सिंह कोई फैसला नहीं ले पाये थे. पर वित्त मंत्री रहते हुए खाद और डीजल के दामों को कंट्रोल किया. खेती की मशीनों पर टैक्स कम किया. नाबार्ड की स्थापना उसी वक्त हुई थी.


किसान नेता कहने से चरण सिंह की छवि माडर्न नेताओं की सी नहीं बनती. पर चरण सिंह को अंग्रेजी बखूबी आती थी. उन्होंने ‘अबॉलिशन ऑफ़ ज़मींदारी’और ‘इंडियाज पॉवर्टी एण्ड इट्स सोल्यूशंस’ किताबें भी लिखीं. 29 मई 1987 को चरण सिंह का निधन हो गया.


मुलायम सिंह यादव चरण सिंह की ही लीगेसी से आये नेता हैं. चरण सिंह के बेटे अजित सिंह राष्ट्रीय लोक दल पार्टी चलाते हैं. उनके बेटे जयंत चौधरी भी मैदान में आ गये हैं.





सोर्स:लल्लनटॉप
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तैमूर लंग इतिहास के सबसे क्रूर योद्धाओं में शुमार किया जाता है। उसका जन्म आधुनिक उज़्बेकिस्तान के समरकंद में 1336 में हुआ था।



फिल्म स्टार करीना कपूर और सैफ अली खान का बेटा “तैमूर अली खान पटौदी” मंगलवार (20 दिसंबर) को जन्म लेते ही विवादों में आ गया। विवाद की वजह बना उसका नाम, तैमूर। 14वीं सदी में मध्य एशियाई तैमूर लंग नाम का मशहूर शासक हुआ था जिसे इतिहास के सबसे क्रूर शासकों में शुमार किया जाता है। तैमूर ने “काफिर” हिंदुओं को सबक सिखाने के लिए हिंदुस्तान पर भी हमला किया था। उसने भारत में शहर के शहर नष्ट कर दिए और हजारों हिंदुओं का सिर काटकर उनसे मीनार बनवा दी थी। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग सैफ और करीना द्वारा अपने बच्चे का नाम तैमूर रखे जाने से नाराज हैं। आइए हम आपको बताते हैं लंगड़े बादशाह तैमूर की पूरी कहानी और उसने किस तरह भारत में कत्लोगारत मचाने का अपनी आत्मकथा में जिक्र किया है।


तैमूर लंग (लंगड़ा) का जन्म आधुनिक उज़्बेकिस्तान के समरकंद में 1336 में हुआ था। उसका पिता तुरगाई बरलस तुर्कों का नेता था। उसे भारत से रूस तक उसके बर्बर युद्धों के लिए याद किया जाता है। तैमूर वंश के संस्थापक तैमूर लंग ने मध्य एशिया और एशिया के बड़े भूभाग पर कब्जा कर लिया था। 1370 तक तैमूर समरकंद का बादशाह बन चुका था। उसके बाद अगले दो दशकों में उसने रूस से ईरान तक सैन्य सफलता हासिल की। 1398 में तैमूर ने भारत पर आक्रमण किया। तैमूर हिंदुस्तान के मुस्लिम सुल्तान द्वारा हिंदू अवाम के साथ नरमी से पेश आने से नाराज था। तैमूर सिंधू नदी पारकर हिंदुस्तान में दाखिल हुआ। वो भारी संख्या में लोगों को मौत के घाट उतारता था।


17 दिसंबर को दिल्ली के सुल्तान महमूद तुगलक की सेना को उसने पानीपत की लड़ाई में हरा दिया। तैमूर ने अपनी जीवनी ‘तुजुके तैमुरी’ कुरान की इस आयत से शुरू की है, ‘ऐ पैगम्बर काफिरों और विश्वास न लाने वालों से युद्ध करो और उन पर सखती बरतो।’ अपनी जीवनी में भारत पर अपने आक्रमण का कारण बताते हुए लिखता है, हिन्दुस्तान पर आक्रमण करने का मेरा ध्येय काफिर हिन्दुओं के विरुद्ध धार्मिक युद्ध करना है, जिससे कि इस्लाम की सेना को भी हिन्दुओं की दौलत और मूल्यवान वस्तुएं मिल जायें।


“तुजुके तैमूरी” के अनुसार कश्मीर की सीमा पर कटोर नामक दुर्ग पर आक्रमण करने के बाद उसने तमाम पुरुषों को कत्ल और स्त्रियों और बच्चों को कैद करने का आदेश दिया। उसने “काफिरों” के सिरों की मीनार बनाने का आदेश दिया। तैमूर ने भटनेर के दुर्ग पर जीत हासिल करने का भी ब्योरा दिया है। तैमूर अपनी जीवनी में लिखता है कि ‘थोड़े ही समय में दुर्ग के तमाम लोग तलवार के घाट उतार दिये गये। घंटे भर में 10,000 लोगों के सिर काटे गये। इस्लाम की तलवार ने काफिरों के रक्त में स्नान किया। उनके सरोसामान, खजाने और अनाज को भी, जो वर्षों से दुर्ग में इकट्‌ठा किया गया था, मेरे सिपाहियों ने लूट लिया। मकानों में आग लगा कर राख कर दिया। इमारतों और दुर्ग को जमींदोज कर दिया गया।



सरसुती नामक नगर पर आक्रमण के बारे में तैमूर ने लिखा है, “सभी काफिर हिन्दू कत्ल कर दिये गये। उनके स्त्री और बच्चे और संपत्ति हमारी हो गई।” तैमूर ने जब जाटों के भारत आकर प्रदेश में प्रवेश किया। उसने अपनी सेना को आदेश दिया कि ‘जो भी मिल जाये, कत्ल कर दिया जाये।’ और फिर सेना के सामने जो भी ग्राम या नगर आया, उसे लूटा गया। पुरुषों को कत्ल कर दिया गया और कुछ लोगों, स्त्रियों और बच्चों को बंदी बना लिया गया।’



दिल्ली के पास लोनी हिन्दू नगर था। किन्तु कुछ मुसलमान भी बंदियों में थे। तैमूर ने आदेश दिया कि मुसलमानों को छोड़कर शेष सभी हिन्दू बंदी इस्लाम की तलवार के घाट उतार दिये जायें। इस समय तक उसके पास हिन्दू बंदियों की संखया एक लाख हो गयी थी। जब यमुना पार कर दिल्ली पर आक्रमण की तैयारी हो रही थी उसके साथ के अमीरों ने उससे कहा कि इन बंदियों को कैम्प में नहीं छोड़ा जा सकता और इन इस्लाम के शत्रुओं को स्वतंत्र कर देना भी युद्ध के नियमों के विरुद्ध होगा।




तैमूर ने अपने आत्मकथा में लिखा है, “इसलिए उन लोगों को सिवाय तलवार का भोजन बनाने के कोई मार्ग नहीं था। मैंने कैम्प में घोषणा करवा दी कि तमाम बंदी कत्ल कर दिये जायें और इस आदेश के पालन में जो भी लापरवाही करे उसे भी कत्ल कर दिया जाये और उसकी सम्पत्ति सूचना देने वाले को दे दी जाये। जब इस्लाम के गाजियों (यानी काफिरों का कत्ल करने वाले) को यह आदेश मिला तो उन्होंने तलवारें सूत लीं और अपने बंदियों को कत्ल कर दिया था। उस दिन एक लाख अपवित्र मूर्ति-पूजक कत्ल कर दिये गये। जब तुगलक बादशाह को हराकर तैमूर ने दिल्ली में प्रवेश किया तो उसे पता लगा कि आस-पास के देहातों से भागकर हिन्दुओं ने बड़ी संख्या में अपने स्त्री-बच्चों तथा मूल्यवान वस्तुओं के साथ दिल्ली में शरण ली हुई हैं।


उसने अपने सिपाहियों को इन हिन्दुओं को उनकी संपत्ति समेत पकड़ लेने के आदेश दिये।
दरअसल, तैमूर लंग दूसरा चंगेज खान बनना चाहता था। वह चंगेज का वंशज होने का दावा करता था, लेकिन असल में वह तुर्क था। तैमूर लंगड़ा था इसलिए उसे तैमूर लंग के नाम से जाना जाता था। वह अपने पिता के बाद सन 1369 ईसवी में समरकंद का शासक बना। इसके बाद ही उसने अपनी विजय और क्रूरता की यात्रा शुरू की। वह बहुत बड़ा सिपहसलार था, लेकिन पूरा वहशी भी था।


मध्य एशिया के मंगोल लोग इस बीच में मुसलमान हो चुके थे और तैमूर खुद भी मुसलमान था। लेकिन मुसलमानों से पाला पड़ने पर वह उनके साथ जरा भी मुलायमित नहीं बरतता था। जहां-जहां तैमूर पहुंचा वहां- वहां उसने तबाही के हालात पैदा किए। तैमूर इतना क्रूर शासक था, जिसे नर-मुंडों के बड़े-बड़े ढेर लगवाने में मजा आता था। तैमूर की मृत्यु आधुनिक कज़ाकिस्तान के ओरतार में 1405 को हुई थी। आपको बता दें कि भारतीय मुगल साम्राज्य का संस्थापक बाबर भी तैमूर का वंशज था।







सोर्स:जनसत्ता

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थाईलैंड के प्रधानमंत्री अभिजीत वेजाजीवा के काफिले पर रविवार को किए गए जानलेवा हमले में वह बाल बाल बच गए।



स्थानीय मीडिया रिपोटर्ों के अनुसार सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान लाल कमीज पहने हजारों प्रदर्शनकारी रविवार सुबह से ही राजधानी बैंकाक में जमा हो गए थे। पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनावात्रा के इन समर्थकों ने गृह मंत्रालय के बाहर प्रधानमंत्री वेजाजीवा की कार पर भी हमला बोल दिया।


सुरक्षा कर्मियों की सक्रियता के कारण उन्हें बचा लिया गया। हालांकि उनके सचिव निपों प्रोम्फन को प्रदर्शनकारियों ने कार से बाहर खींच कर उनकी जमकर जमकर पिटाई कर दी। बाद में टेलीविजन पर जारी संदेश में वेजाजीवा ने कहा कि मुझे लगता है कि जनता टीवी के माध्यम से सब देख रही है।
जनता ने देखा के प्रदर्शनकारी मुझे मारने पर आमादा थे और मेरी कार तो उन्होंने नष्ट कर ही दिया। यूनाईटेड फ्रंट ऑफ डेमोक्रेसी के बैनर तले आंदोलनरत प्रदर्शनकारी विजाजीवा की सरकार को गलत तलत तरीके से बनी सरकार बताते हुए इस तानाशाही पूर्ण सरकार को उखाड़ फेंक चुनाव करा कर नई सरकार के गठन की मांग कर रहे हैं।



इतना ही नहीं आंदोलनकारी सरकार के अलावा सेना, न्यायपालिका और अन्य अनिर्वाचित पदाधिकारियों पर राजनीति में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाते हुए इनका भी विरोध कर रहे हैं।


ज्ञातव्य है कि विरोध प्रदर्शन के कारण उत्पन्न नाजुक हालात के मद्देनजर वेजाजिवा ने रविवार को राजधानी बैंकाक में भी आपातस्थिति लागू कर दी थी। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने शनिवार को पटाया में होने वाले एशियाई सम्मेलन का जबरदस्त विरोध किया जिसकी वजह से न सिर्फ सम्मेलन को स्थगित करना पड़ा बल्कि पूरे प्रांत में आपातस्थित लागू करनी पड़ी थी।


आपातकाल लगाने पर सफाई देते हुए वेजाजिवा ने कहा कि देश में समान्य हालात बहाल करने के लिए उन्हें यह फैसला करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने जनता से इस दिशा में सरकार का सहयोग करने की भी अपील की।


वेजाजिवा ने कहा कि सरकार शनिवार को पटाया में प्रदर्शन के उन सभी आंदोलनकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई करेगी जिनके कारण विदेशों मेहमानों की सुरक्षा खतरे में पड़ी और सम्मेलन भी रद्द करना पड़ा।






सोर्स:लाईवइंडिया
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हिन्दू धर्म में पौष मास बहुत ही पुण्यदायी माना गया है। एक माह के दौरान लोग राम कथा एवं भागवत का श्रवण कर पुण्यार्जन करते हैं। इस मास में शुभ कार्य तो वर्जित माने गए हैं, लेकिन जप-तप और भगवान की कथा श्रवण करना पुण्यदायी माना गया है। यही कारण है कि पौष मास में होने वाले मौसम परिवर्तन तथा ज्योतिषिय योगों के आधार पर आगामी वर्ष में होने वाली बारिश का संभावित अनुमान लगाया जाता है। इस बात का धर्मग्रंथों में भी वर्णन आता है।

ज्योतिष शास्त्री ब्रजमोहन शर्मा ने बताया कि मयूर चित्रम् ग्रंथ के अनुसार पौष मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी, चतुर्दशी और अमावस्या को यदि आकाशीय गर्भ हो तो सुभिक्ष का योग बनाता है। यह योग श्रावण की पूर्णिमा को वर्षा करवाता है।

इसी प्रकार यदि पौष मास की सप्तमी को आधी रात के बाद वर्षा हो अथवा बादल गरजे तो उस क्षेत्र में वर्षा ऋतु में बारिश नहीं होती, यह महर्षि नारद का कथन है। पौष मास के पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के दिन यदि बादल दिखाई दें, गरजें या बरसें, इंद्रधनुष या बिजलियां चमकती दिखाई दें तो वर्षा ऋतु में अच्छी वर्षा होती है। पौष शुक्ल पंचमी को यदि बर्फ गिरे तो बारिश के मौसम में बहुत वर्षा होती है। पौष शुक्ल सप्तमी को रेवती, अष्टमी को अश्विनी तथा नवमी को भरणी नक्षत्र हो और आकाश में बिजली चमकती दिखाई दे तो पावस काल में पर्याप्त होती है। पौष की एकादशी को रोहिणी नक्षत्र में वर्षा हो तो वर्षाकाल में अच्छी बारिश होती है।


देश में सर्दी के बढ़ते असर के बीच ज्योतिषियों का कहना है कि कड़ाके की ठंड का दौर 21 दिसम्बर से शुरू होगा। यह करीब 40 दिन रहेगा। ज्योतिषी पंडित चंद्रमोहन दाधीच के अनुसार 40 दिन के चिल्ले के दौरान सर्दी चरम पर रहती है। चिल्ला सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के अंतिम 25 दिन यानी 21 दिसम्बर से शुरू होगा। यह मकर राशि में प्रवेश के 15 दिन बाद तक यानी 28 जनवरी तक रहेगा। सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी को प्रवेश करेगा। गुलाबी सर्दी का दौर सूर्य के शायन मीन में प्रवेश व बसंत ऋतु के आगमन तक चलेगा। बसंत ऋतु 18 फरवरी से शुरू होगी।
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लखनऊ: जीत के अश्वमेधी रथ पर सवार भारतीय टीम 15 बरस बाद जूनियर विश्व कप हॉकी फाइनल में रविवार को बेल्जियम के खिलाफ उतरेगी तो खिलाड़ी अपनी आक्रामकता और जुझारूपन को बरकरार रखते हुए देशवासियों को अर्से बाद हॉकी के मैदान पर खिताब तोहफे में देने के इरादे से उतरेंगे।


भारत तीसरी बार जूनियर विश्व कप के फाइनल में पहुंचा है। इससे पहले 2001 में ऑस्ट्रेलिया के होबर्ट में भारतीय टीम ने अर्जेंटीना को 6.1 से हराकर एकमात्र जूनियर विश्व कप जीता था। वहीं 1997 में इंग्लैंड में हुए टूर्नामेंट के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराया था। भारत 11 साल पहले रोटरडम में कांस्य पदक के मुकाबले में स्पेन से पेनल्टी शूटआउट में हार गया था और उस समय भी टीम के कोच हरेंद्र सिंह ही थे। वही हरेंद्र अब 11 साल बाद उस हार के नासूर पर खिताब का मरहम लगाने को बेताब हैं। उनका मानना है कि मानसिक दृढ़ता और जीत की भूख इस बार इन खिलाड़ियों को खाली हाथ नहीं लौटने देगी जो रविवार को अपने करियर का सबसे बड़ा मैच खेलेंगे।

हरेंद्र ने कहा, ‘हमने अतीत में कई गलतियां की है लेकिन एफआईएच के कोचिंग कोर्स से मैंने बहुत कुछ सीखा और इन खिलाड़ियों पर उसे लागू किया। शारीरिक फिटनेस, दबाव के आगे घुटने नहीं टेकना और मानसिक दृढ़ता यह इस टीम की खासियत है और मुझे नहीं लगता कि अब इसे खिताब जीतने से कोई रोक सकता है।’ उन्होंने कहा,‘मैं 2005 में रोटरडम में मिली हार को भूला नहीं हूं। वह हार आज तक मुझे कचोटती है लेकिन मैं टीम से इस बारे में बात नहीं करता। मैंने खिलाड़ियों से सिर्फ इतना कहा कि हमें पदक जीतना है और रंग कौन सा होगा, यह आप तय करो।’

भारत ने क्वार्टर फाइनल में 55वें मिनट तक एक गोल से पिछड़ने के बाद स्पेन को हराया और फिर सेमीफाइनल में भी एक गोल से पिछड़ने के बाद वापसी की। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को पेनल्टी शूटआउट मे 4-2 से हराने वाली भारतीय टीम का आत्मविश्वास बुलंद है और सोने पे सुहागा रहा है दर्शकों का अपार समर्थन। मेजर ध्यानचंद स्टेडियम भारत के मैचों में खचाखच भरा रहा है और रविवार को भी भारी तादाद में दर्शकों के जुटने की उम्मीद है। टीम के मैनजर और सीनियर टीम के मुख्य कोच रोलेंट ओल्टमेंस ने स्वीकार किया कि बेल्जियम की टीम मजबूत है और यह बराबरी का मुकाबला होगा। जूनियर विश्व कप से पहले वालेंशिया में चार देशों के टूर्नामेंट में भारत को एकमात्र पराजय बेल्जियम के हाथों मिली थी जबकि भारतीय टीम ने खिताब जीता था।

उन्होंने कहा, ‘जो टीम छह बार की चैम्पियन जर्मनी और नीदरलैंड को हराकर यहां तक पहुंची है, वह मजबूत तो होगी ही लेकिन हमारे पास भी बहुत दमदार टीम है। खिलाड़ी फॉर्म में है हालांकि कुछ पहलुओं पर और मेहनत की जरूरत है जो हम कर रहे हैं।’ भारत के लिये अब तक हर मैच में एक नया खिलाड़ी हीरो बनकर निकला है। लीग चरण में मनदीप सिंह ने उम्दा प्रदर्शन किया तो सेमीफाइनल में गोलकीपर विकास दहिया ने छाप छोड़ी जबकि मिडफील्ड में कप्तान हरजीत सिंह ने लय बनाये रखी है। ड्रैग फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह शुरुआती नाकामियों के बाद फार्म में लौटे हैं। कुल मिलाकर टीम व्यक्तिगत प्रदर्शन की बजाय सामूहिक प्रयासों से जीत रही है जो अच्छा संकेत है।

दूसरी ओर बेल्जियम पहली बार टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचा है और उसके खिलाड़ी खचाखच भरे स्टेडियम में खेलने को लेकर काफी उत्साहित है। कोच जेरोन बार्ट ने हालांकि इससे इनकार किया कि दर्शकों से मेजबान टीम को मिल रहे अपार समर्थन का उनकी टीम पर मनोवैज्ञानिक दबाव पड़ेगा। उन्होंने कहा,‘हमारे खिलाड़ियों ने कभी पूरे भरे हुए स्टेडियम में नहीं खेला है। वे इसे लेकर काफी उत्साहित हैं लेकिन दबाव में नहीं है। मेजबान टीम के खिलाफ किसी बड़े टूर्नामेंट में खेलना कठिन होता है लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि हम इस भारतीय टीम को पहले भी हरा चुके हैं। यह मुकाबला बराबरी का होगा और जो टीम फाइनल का दबाव झेल जायेगी, वह खिताब जीतेगी।’ कांस्य पदक के मुकाबले में जर्मनी का सामना ऑस्ट्रेलिया से होगा। भारत और बेल्जियम के बीच फाइनल शाम छह बजे से खेला जायेगा। हॉकी इंडिया ने खिताब जीतने पर प्रति खिलाड़ी पांच लाख रूपये और सहयोगी स्टाफ को दो-दो लाख रुपये नकद पुरस्कार देने का ऐलान किया है।

भाषा
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भूत-प्रेत बाधा हो या रोग पीछा ना छोड़ते हों.... हर परेशानी का अंत करते हैं ये हनुमान मंत्र



1. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार हनुमान जो को इष्ट मानने वाले भक्तों को रोजाना उनकी पूजा-उपासना और पाठ करना चाहिए। अगर किसी कारणवश उन्हें समय नहीं मिलता हो, तो हनुमान जी के एक मंत्र का जाप 11 बार करना चाहिए। यह मंत्र है "ऊं हनुमते नम:"। इस मंत्र के जाप से पाठ नहीं करने की कमी भी पूरी हो जाती है। साथ ही बिगड़े काम भी बनने लगते हैं।



2. हनुमान जी का साबर मंत्र एक ऎसा मंत्र है जो भक्त को सीधे उसकी पीड़ा उन तक पहुंचाता है और शीघ्र समाधान होता है।

ध्यान रहे कि इस मंत्र का प्रयोग वही लोग करें जो खान-पान की अशुद्धता और अन्य बुराईयों से परे हों। हनुमान जी के शाबर मंत्र के कई प्रकार हैं जो अलग-अलग कार्यो के लिए हैं। इसलिए मंत्र और विधि-विधान किसी जानकार से पूछ कर ही शुरू करें।


3. कई लोगों को बचपन से भूत-प्रेत और अंधेरे से डर लगता है, ऎसे लोगों के लिए हनुमान जी का एक मंत्र चमत्कारिक बदलाव करता है। हनुमान जी का यह मंत्र है "हं हनुमंते नम:"। इस मंत्र का जाप सोने से पहले किया जाना चाहिए। मंत्र जाप से पूर्व शरीर को साफ पानी से धो लेना चाहिए। इस मंत्र के नियमित जाप से भय अपने आप दूर भागने लगता है और व्यक्ति निर्भिक बन जाता है।



4. रोगों से बचने के लिए हनुमान जी का एक और मंत्र कारागर माना गया है। यह मंत्र है:- नासै रोग हरे सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। हनुमान जी का एक पाठ उनके भक्तों को उनके शत्रुओं से मुक्ति दिलाता है और शत्रुओं को दंडित भी करने में मदद करता है। कहा जाता है कि एकाग्रचित होकर 21 दिन तक विधि-विधान से "बजरंग बाण" का पाठ करने से व्यक्ति को उसके शत्रुओं से मुक्ति मिलती है अथवा शत्रुओं को उनके किए गए गलत कर्मो का दंड मिल जाता है। हालांकि बजरंगबली ऎसे ही भक्तों की मदद करते हैं जो बुराई से दूर रहकर सत्य की राह पर चलते हैं।



5. हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल उपाय है हनुमान चालीसा का पाठ। माना जाता है कि हनुमान चालिसा का पाठ करने वाले भक्त को कोई बंधक नहीं बना सकता है और उस पर जेल जाने की नौबत नहीं आती है। मान्यता है कि गलती होने पर जेल हो जाने की स्थिति में दोषी व्यक्ति अगर 108 बार "हनुमान चालीसा" का पाठ करे और यह संकल्प करे कि वह भविष्य में कभी बुरे काम नहीं करेगा, तो हनुमान जी की कृपा होने पर उसका संकट दूर हो जाता है। जेल से उसे मुक्ति मिल जाती है।




सोर्स:स्पीकिंगट्री
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बॉलीवुड की ऐतिहासिक फिल्म!



‘सूर्यवंशम’ बॉलीवुड की वो कालजयी फिल्म है, जिसने एक ही टीवी चैनल पर बार-बार टेलीकास्ट होने का रिकॉर्ड बना लिया है। यह ऐतिहासिक फिल्म 21 मई 1999 में रिलीज हुई थी। फिल्म में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में हैं, जो डबल रोल निभाते दिखते हैं। यह इकलौती फिल्म है, जिसे हर व्यक्ति बचपन से बड़े होने तक टीवी पर देखता आया है। ‘सैट मैक्स’ चैनल एक नए अवतार में आ गया हो, लेकिन फिल्म टस से मस नहीं हुई है।

 फिल्म और ‘सोनी मैक्स’ का रिश्ता

 


दरअसल, ‘सोनी मैक्स’ चैनल और ‘सूर्यवंशम’ का रिश्ता उस समय से है जब दोनों का जन्म हुआ था। मतलब, ‘सूर्यवंशम’ और ‘सैट मैक्स’ (अब सोनी मैक्स) का जन्म साल 1999 में ही हुआ था।

चैनल ने खरीद रखे हैं मूवी के राइट्स

 


एक Quora यूजर के मुताबिक, ‘सोनी मैक्स’ की मार्केटिंग हेड वैशाली शर्मा बताती हैं कि सोनी मैक्स ने 100 साल के लिए इस फिल्म के राइट्स खरीद लिए हैं। इससे ये बात तो साफ है कि जब उन्होंने इस फिल्म के राइट्स खरीदे हैं, तो फिल्म बार-बार दिखाएंगे ही।

नही रहीं ‘राधा’ का किरदार निभाने वाली सौंदर्या

 

 


फिल्म में ‘हीरा ठाकुर’ की पत्नी (राधा सिंह) का किरदार निभाने वाली अदकारा सौंदर्या रघू इस दुनिया में नहीं रहीं। 17 अप्रैल 2004 को प्लेन क्रेश में इस अदकारा की मृत्यु हो गई, वो मात्र 31 साल की थीं। सूर्यवंशम उनकी पहली और इकलौती हिंदी फिल्म थी।

  तमिल फिल्म की हिंदी रीमेक

 

 

साल 1997 में आई तमिल फिल्म ‘सूर्यवंशम’ का रीमेक है, अमिताभ बच्चन की हिंदी फिल्म ‘सूर्यवंशम’। वैसे इस फिल्म जितनी पॉपुलेरिटी किसी दूसरी फिल्म को नहीं मिली है।

   एक-एक सीन से लोग हैं वाकिफ

 

 



सोशल मीडिया की दुनिया में सूर्यवंशम ही वो फिल्म हैं, जिसको लेकर लोगों ने दबाकर लिखा है। इस फिल्म की कहानी और किरदारों से लेकर लोग फिल्म के एक-एक सीन से वाकिफ हैं।

पहली बार बस में दिखी एयर होस्टेस

 


आपको याद ही होगा, जब हीरा बिजनेस स्टार्ट करने के लिए एक बस खरीदता है, जिसमें अनुपम खेर और कादर खान मेल कंडेक्टर की जगह फीमेल कंडक्टर को रख लेते हैं?

    तेलुगू डायरेक्टर की पहली हिंदी फिल्म

 


‘सूर्यवंशम’ तेलुगू निर्देशक ई.वी.वी सत्यनारायण की पहली और आखिरी हिंदी फिल्म थी। उन्होंने इसके बाद एक भी हिंदी फिल्म डायरेक्ट नहीं की। सत्यनारायण की मृत्यु 21 जनवरी 2011 को हैदराबाद में हुई।

   सोशल मीडिया पर उड़ा काफी मजाक

 


‘सूर्यवंशम’ का बार-बार सोनी मैक्स पर आना सोशल मीडिया पर उसके मजाक का कारण बन गया। अब भी सोशल मीडिया पर उस फिल्म पर बने फनी मेम्स देखने को मिल जाते हैं।

   







सोर्स:फिल्मी पॉप
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लखनऊ, 15 दिसंबर। एफआईएच जूनियर हॉकी विश्व कप-2016 के क्वार्टर फाइनल में आज भारत की भिड़ंत स्पेन से होगी। इसके साथ ही आज बाकी के क्वार्टर फाइनल मुकाबले भी खेले जाएंगे। भारतीय पुरुष जूनियर हॉकी टीम अपने दूसरे खिताब को जीतने की ओर बढ़ गई है। इससे पहले 2001 में आस्ट्रेलिया में हुए टूर्नामेंट के बीते संस्करण में भारत ने पहली बार यह खिताब जीता था।

जूनियर हॉकी विश्व कप में आज आठ टीमों के बीच कुल चार क्वार्टर फाइनल मुकाबले खेले जाएंगे। भारत और स्पेन के अलावा अन्य तीन मुकाबले बेल्जियम-अर्जेटीना, जर्मनी-इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया-नीदरलैंड्स के बीच होंगे।

लखनऊ में जारी इस टूर्नामेंट में भारत ने ग्रुप स्तर पर अपने हिस्से के सभी तीन मुकाबलों में जीत हासिल की थी। अपने पहले मैच में मेजबान टीम ने कनाडा को 4-0 से मात दी थी, वहीं दूसरे मुकाबले में उसने इंग्लैंड को 5-3 से हराया था।

इसके बाद भारत ने तीसरे और अंतिम ग्रुप मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को 2-1 से मात दी।

इस टूर्नामेंट में भारत से क्वार्टर फाइनल में भिड़ने वाली स्पेन टीम अब तक इस खिताब से अछूती है। नीदरलैंड्स में 2005 में आयोजित हुए इस टूर्नामेंट में उसे तीसरा स्थान हासिल हुआ था।

उल्लेखनीय है कि इस टूर्नामेंट में मौजूदा विजेता जर्मनी की टीम प्रबल दावेदार मानी जा रही है, क्योंकि उसने इस टूर्नामेंट में छह बार खिताबी जीत हासिल की है। भारत की तरह जर्मन टीम ने भी ग्रुप स्तर पर अपने सभी मैच जीते हैं।

इसके अलावा, अर्जेटीना, आस्ट्रेलिया और पाकिस्तान ने इस खिताब को एक-एक बार जीता है।




सोर्स:न्यूज़रूमपोस्ट
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‘पीछे मुड़कर देखने का वेट तो 90s में करते थे. I was just checking out his ass.’

90 के दशक के रोमैंस से एक सोचा-समझा ब्रेक, असल में एक लाइन में कहना हो तो यही है ‘बेफिक्रे.’

क्या होता है, जब दिल्ली के करोल बाग़ का एक लौंडा पेरिस पहुंच जाता है. होता ये है कि उसकी आंखें निकल आती हैं. इतनी सारी लड़कियां, इतनी मस्ती, इतना सेक्स. और वो भी बिना किसी रोक-टोक के. और उसे मिल जाती है शायरा. इंडियन मां-बाप की फ्रेंच लड़की. जिसमें भारतीय नैतिकता जरा भी नहीं है. इंडिपेंडेंट कैसे रहा जाता है, उसे खूब आता है. उसके कई बॉयफ्रेंड रहे हैं. और इस बात को मानने में न उसे कोई असहजता है, न कोई अपराधबोध. वो खुश है, ब्रेकअप के बाद भी. संयोग ऐसा कि धरम और शायरा मिल जाते हैं. दो-चार डेट्स के बाद लगता है कि उन्हें लिवइन में रहना चाहिए. पर एक साथ रहने पर उन्हें पता लगता है कि वो तो एक दूसरे को बर्दाश्त भी नहीं कर सकते. फिर ब्रेकअप.

लेकिन ये ब्रेकअप जरा अलग है. चीखना-चिल्लाना है. पर रोना-धोना नहीं. शायरा को ‘मूव ऑन’ करना अच्छे से आता है. लेकिन धरम के सेंटीमेंट अब भी दिल्ली वाले हैं. ‘वो मुझे मिस करती होगी, वो मेरी नयी गर्लफ्रेंड से जलती होगी’ टाइप. पर शायरा तो मस्त है. और जब धरम को ये पता चल जाता है कि शायरा सचमुच उसे मिस नहीं करती, उसकी मानो आंखें सी खुलती हैं. इस ब्रेकअप के बाद दोनों बराबरी पर हैं. अब दोनों दोस्त हैं.

सबसे पहले फिल्म की अच्छी बातें. जैसा कि आदित्य चोपड़ा पहले भी कह चुके हैं, फिल्म में रोमैंस के प्रति एक फ्रेश अप्रोच है. ब्रेकअप के प्रति एक फ्रेश अप्रोच है. ये वो दौर नहीं, जब किसी लव ट्रायंगल में हीरो और हिरोइन कन्फ्यूज हो रहे हों कि ‘शादी टाइप’ कौन है और ‘हुकअप टाइप’ कौन. ये वो दौर नहीं, जब लड़की की लाइफ में हीरो के अलावा आया बेहद चोमू और बोरिंग होता है. जो अच्छा लगता है, उसके साथ हो लेते हैं. जब अच्छा नहीं लगता, छोड़ देते हैं. इश्क और ब्रेकअप लाइफ में एक आसान चीज की तरह हैं फिल्म में.

फिल्म में कोई रोना-धोना नहीं है, कोई मेलोड्रामा नहीं है. कोई कसमें-वादे नहीं हैं. सेक्स को लेकर कोई नैतिक जजमेंट देने की कोशिश नहीं की गई है. ‘शादी मटीरियल’ और ‘गर्लफ्रेंड मटीरियल’ के बीच कोई भेद नहीं है.

लेकिन फिल्म सबसे जरूरी चीज मिस कर जाती है. जिसे हम कहते हैं प्लॉट. यानी फिल्म की कहानी. जैसा कि हम ट्रेलर में देखते हैं, दो बेफिक्रे एक दूसरे के साथ एक सेक्शुअल रिलेशनशिप में जाते हैं, इस वादे के साथ कि कभी एक दूसरे के प्रेम में नहीं पड़ेंगे. कभी सेंटी नहीं होंगे, आई लव यू नहीं बोलेंगे.

लेकिन जैसी हैपी एंडिंग हर बॉलीवुड फिल्म से अपेक्षित होती है, होता वही है. ब्रेकअप के बाद दोस्ती गहरा जाती है. और जब लड़की की शादी का समय आता है, तो लड़के को लगता है, ‘ओ शिट, मुझे तो प्यार हो गया है.’ बस इस फिल्म में भी वही हुआ. ट्रेलर देखने के बाद फिल्म में कोई ऐसी चीज नहीं है, जो आपको सरप्राइज कर दे. जिसे देखकर आप कहें कि वाह, ये तो सोचा ही नहीं था.

प्लॉट इतना छोटा है कि जरा सी कहानी को जबरन सवा दो घंटे खींचा गया है. जबकि सबको पता होता है कि अंत क्या होना है. कुल मिलाकर, इंटरवल के बाद अझेल होने लगती है फिल्म.

फिल्म में इतने किसिंग सीन हैं कि अझेल होने लगता है. आप कहना चाहते कि बस करो, प्रेम या सेक्स केवल चुम्मा करना नहीं होता. जिस नयी जेनरेशन की फिल्म बात करना चाहती है, उसका काम केवल पार्टी और सेक्स करना नहीं होता. फिल्म में इतनी पार्टियां हैं कि आप सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि क्या इनकी जिन्दगी में कुछ भी नहीं है?

जब फिल्म में फॉरेन लोकेशन चुन ली जाती है, आधी जिम्मेदारियों से तो वैसे ही फिल्म पल्ला झाड़ लेती है. फॉरेन लोकेशन पर आप कुछ भी दिखा सकते हैं क्योंकि वो भारतीय नैतिकता के दायरे में नहीं आती. और हमारे दौर की तमाम फिल्मों की तरह इस फिल्म में भी प्यार और सेक्स करना बेहद आसान हो जाता है. क्योंकि लड़की का परिवार लिबरल है. और लड़के का परिवार तो इंडिया में है. जहां-तहां अपनी टी शर्ट उतार देना न हिरोइन के लिए बड़ा काम है, और न्यूड शॉट देना न हीरो के लिए.

फिल्म का म्यूजिक अच्छा है. शूटिंग पेरिस की है, तो जाहिर सी बात है कि लोकेशन खूबसूरत हैं. फिल्म में डांस खूब सारा है. शुरू से लेकर अंत तक. म्यूजिक और डांस प्लॉट कमजोर होने के बावजूद आपको थिएटर में बैठे रहने के लिए मजबूर करता है.

रणवीर सिंह वैसे ही हैं, जैसा हम उन्हें जानते हैं. लौंडा टाइप्स. फिल्म देखकर बिलकुल भी नहीं लगता कि उनको ये रोल करने में कोई दिक्कत आई होगी. वाणी कपूर की परफॉरमेंस बढ़िया है. उनका चेहरा फ्रेश है. देखकर लगता है कि दीपिका, अनुष्का, आलिया की लीग में एक और नाम जुड़ने वाला है.

रिलीज के पहले आदित्य चोपड़ा कह रहे थे कि अपनी दूसरी ‘पहली’ फिल्म बना रहे हैं. इतने अनुभव के बाद अगर दूसरी ‘पहली’ फिल्म बनानी थी, तो कहानी पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए था. जाने तू या जाने ना, शुद्ध देसी रोमैंस, नील एंड निक्की टाइप की कुछ फिल्मों को मिला दिया जाए तो आसानी से एक ‘बेफिक्रे’ तैयार हो जाती है.

अगर म्यूजिक और डांस में इंटरेस्ट है, तो फिल्म देखिए. वीकेंड पर बिलकुल फ्री हैं तो देख आइए. लेकिन ये वो फिल्म नहीं जिसके लिए आप वक़्त निकालकर जरूर जाएं.



सोर्स:लल्लंटोप
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इंटरनेट पर करोड़ों वेबसाइट्स उपलब्ध हैं और हर रोज हजारों नई वेबसाइट्स तैयार होती हैं। मगर वेबसाइट्स के इस महासागर में कुछ ही वेबसाइट्स ऐसी हैं, जो अलग सी सर्विसेज ऑफर करती हैं। हम लाए हैं 13 ऐसी ही वेबसाइट्स की लिस्ट, जो बहुत काम की हैं। आप कहेंगे कि काश! इनके बारे में पहले पता होता। आगे देखें...


1. Zamzar.com



एक फाइल को दूसरी फाइल में कन्वर्ट करना है तो इसे ट्राई करें। साइनअप करने की भी जरूरत नहीं है। 1200 तरह की फाइल्स को कन्वर्ट किया जा सकता है। अगर आपके पास ऐसा फॉरमैट है जो साइट पर कन्वर्ट नहीं हो रहा, आप उसे इन्हें ईमेल कर दीजिए और वे इसे कन्वर्ट करने की कोशिश करेंगे। 50 MB से बड़े साइज की फाइल फ्री वर्जन में आप अपलोड नहीं कर सकते, यह बात ध्यान रखनी होगी। फाइल बड़ी है तो पेड सर्विस लेनी होगी।


2. Mailinator.com



इन दिनों लगभग सभी वेबसाइट्स आपको साइन-अप करने के लिए ईमेल अड्रेस इस्तेमाल करने को कहती हैं। वे साइट्स आपकी ईमेल आईडी को अन्य सर्विसेज के साथ शेयर करेंगी या नहीं, इस बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। अगर उन्होंने शेयर कर दी तो आपके मेलबॉक्स में स्पैम्स की बाढ़ आ जाएगी। इसलिए Mailnator सर्विस का इस्तेमाल करके आप ऐसा ईमेल अड्रेस बना सकते हैं, जो कुछ ही घंटों बाद नष्ट हो जाता है। आप टेंपररी ईमेल के जरिए साइनअप करके अपना अकाउंट ऐक्टिवेट कर सकते हैं। स्पैम की चिंता किए बगैर आप ऐसा कई बार कर सकते हैं। आप कितने ईमेल अड्रेस बना सकते हैं, इसकी कोई लिमिट नहीं है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इसके जरिए आप मेल सिर्फ रिसीव कर पाएंगे, सेंड नहीं।



3. PrivNote.com



कई बार आप किसी निजी जानकारी को किसी के साथ शेयर करना चाहते हैं, मगर सेफ्टी की चिंता होती है। जैसे कि मान लीजिए किसी को एटीएम पिन, बैंक पासवर्ड या ईमेल अड्रेस वगैरह बताना हो। ऐसी स्थिति में SMS, चैट या ईमेल का इस्तेमाल करना पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। इसलिए आप PrivNote का इस्तेमाल करते हैं। इसके जरिए आप ईमेल या चैट के जरिए टेक्स्ट नोट भेज सकते हैं, जो सामने वाले द्वारा पढ़ लिए जाने के बाद डिलीट हो जाता है। आप नोट को एनक्रिप्ट भी कर सकते हैं।


4. Disposablewebpage.com



ईमेल अड्रेस की ही तरह आप टेंपररी वेबपेज भी बना सकते हैं। जन्मदिन, शादी या रीयूनियन वगैरह के लिए पेज बनाना है तो टेंपररी वेबपेज बनाना ठीक रहता है। आपको बस साइनअप करके अपना पेज बनाना है। कोडिंग की भी जरूरत नहीं है, आइकॉन के जरिए आप पेज क्रिएट कर सकते हैं। टेक्स्ट, फोटो, विडियो और लोकेशन वगैरह आप इसमें ऐड कर सकते हैं। इसके बाद आप अपने दोस्तों वगैरह के साथ वेबपेज का लिंक शेयर कर सकते हैं। 90 दिन बाद यह पेज अपने आप डिलीट हो जाता है।


5. SimplyNoise & A Soft Murmur




किसी काम पर फोकस करना हो तो ये वेबसाइट्स आपकी मदद करेंगी। ये फ्री में आपको बहुत सारे ऐंबियंट साउंड ऑफर करती हैं। आप नॉइज़ सिलेक्ट करके ऑडियो लेवल और स्लीप टाइमर ऑप्शन वगैरह सेट कर सकते हैं। asoftmurmur पर आप बारिश, लहरों, पक्षियों और कॉफी शॉप तक के साउंड को चुन सकते हैं। दोनों वेबसाइट्स के ऐंड्रॉयड और iOS ऐप्स भी हैं।



6. ManualsLib.com




जब आप कोई नया प्रॉडक्ट खरीदते हैं, हो सकता है कि इसमें यूजर मैनुअल न हो। यह भी हो सकता है कि आपने वह फेंक दी हो या गुम हो गई हो। ऐसे में आप ManualsLib.com में जाकर विभिन्न डिवाइसेज की कैटिगरी में जाकर अपने डिवाइस या प्रॉडक्ट को सर्च कर सकते हैं। उसकी मैन्युअल आपके सामने होगी। आप उसे प्रिंट भी कर सकते हैं।



7. Newsmap.jp




क्या आपको कभी ऐसे सिंगल पेज की जरूरत महसूस हुई है जहां पर आप लेटेस्ट और ट्रेडिंग न्यूज को एक ही जगह पा सकें?Newsmap यही काम करता है। यह आपको हेडलाइन्स दिखाता है और हर कैटिगरी के हिसाब से अलग रंग में दिखाता है। आप इसे कस्टमाइज भी कर सकते हैं। हेडलाइन बॉक्स का साइज बताता है कि न्यूज कितनी ट्रेंड हो रही है। अगर आप कोई आर्टिकल पढ़ना चाहते हैं तो आपको किसी हेडलाइन पर क्लिक करना होगा और आर्टिकल नए टैब में खुल जाएगा।



8. AccountKiller.com




ज्यादातर सोशल नेटवर्क वेबसाइट्स अकाउंट क्लोज करने की प्रक्रिया को जटिल बनाकर रखती हैं। अगर आप अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स को डिलीट करना चाहते हैं तो AccountKiller.com पर जाएं। यह आपको बताएगी कि कौन सी वेबसाइट से अकाउंट हटाना कितना मुश्किल है। क्लिक करने पर यह डिऐक्टिवेशन के लिए डायरेक्ट लिंक दे देता है।



9. TwoFoods.com




अगर आप अपनी सेहत को लेकर फिक्रमंद हैं और यह देखना चाहते हैं कि आप कितनी कैलरीज़ ले रहे हैं, TwoFoods.com आपके लिए ही है। इसमें एक पेज का इंटरफेस है, जो अलग-अलग तरह के खाने की कैलरीज़ के बारे में बताता है। आप किसी डिश का नाम इनपुट कीजिए और यह उसमें मौजूद कैलरीज़, कार्ब, फैट्स और प्रोटीन की जानकारी दे देगा। भारतीय व्यंजनों के लिए यह मिलते-जुलते व्यंजनों को सजेस्ट करता है, जिससे आपको कुछ आइडिया मिल जाए।



10. Pdfunlock.com




कुछ PDF फाइल्स प्रॉटेक्टेड होती हैं। अगर आपके पास प्रॉटेक्टेड फाइल का पासवर्ड भी है, तब भी आप इसमें बदलाव नहीं कर पाएंगे। प्रॉटेक्शन को रिमूव करने के लिए PDUnlock पर जाएं, पासवर्ड डालकर अनलॉक करें और यह वेबसाइट आपको अनप्रॉटेक्टेड PDF डाउनलोड करने को दे देगी।

यह सर्विस फ्री है और आप इसे पेपाल के जरिए डोनेट कर सकते हैं। इसी तरह आप pdfmerge.com, splitpdf.com और pdfprotect.net को भी ट्राई कर सकते हैं।




11. Savr.com




हम सभी कई सारे डिवाइसेज पर काम करते हैं, मगर उनके बीच फाइल्स को शेयर करना आसान नहीं है। अगर आप चाहते हैं कि यूएसबी ड्राइव के बिना या खुद को ही ईमेल भेजे बिना फाइल्स शेयर की जा सकें तो Savr.com को ट्राई करें। यह आपको कॉमन क्लिपबोर्ड और कॉमन स्पेस देता है, जहां आप फाइल्स स्टोर कर सकते हैं। यह पीसी और मोबाइल पर भी काम होती है। 25 MB तक की फाइल्स शेयर की जा सकती हैं।




12. Printfriendly.com




कभी ब्राउजर से किसी वेबपेज को डायरेक्ट प्रिंट करने की कोशिश की है? अजीब सा प्रिंट आता है, जिसमें तस्वीरें, लिंक वगैरह नजर आते हैं। अगर आप चाहते हैं कि मुख्य टेक्स्ट ही प्रिंट हो, इसके लिए आपको उस पेज का URL लेकर Printfriendly.com में पेस्ट करना होगा। कुछ ही सेकंड्स में यह प्रिंटेबल पेज दिखा देता है, जहां से आप प्रिंट दे सकते हैं। Firefox, Chrome, Internet Explorer और Safari के लिए प्रिंटफ्रेंडली के एक्सटेंशन भी उपलब्ध हैं।




13. Spreeder.com


अगर आप जल्दी-जल्दी सबकुछ पढ़ना शुरू कर दें तो बहुत सी जानकारी जुटा पाएंगे। पढ़ने की स्पीड अभ्यास से बढ़ाई जा सकती है। Spreeder.com पर आप किसी टेक्स्ट का हिस्सा पोस्ट कीजिए। यह एक-एक शब्द आपके सामने डिस्प्ले करना शुरू कर देगा, जिसे आप पढ़ सकते हैं। आप टेक्स्ट वगैरह को कस्टमाइज कर सकते हैं और अपनी स्पीड माप सकते हैं। स्पीड वगैरह को भी अजस्ट कर सकते हैं। इस तरह आप किसी भी पैरा को जल्दी पढ़ सकते हैं।




सोर्स:नवभारतटाइम्स
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