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वर्ल्ड ऐंटी डोपिंग एजेंसी (WADA) को रशिया के हैकर्स ने हैक कर लिया है. चिरकुटई की बात ये है कि उन हैकर्स ने टॉप सीक्रेट मेडिकल फ़ाइल्स पब्लिक कर दीं. अब उन फाइल्स में लिखी जानकारी पूरी दुनिया के पास है. काम किया है खुद को फैंसी बियर्स के नाम से बुलाने वाले एक हैकर ग्रुप ने. रूस के हैकर काफी शातिर होते हैं, ये बात किसी से छुपी नहीं है. खैर, हैकर कहीं का भी हो, शातिर होने के बाद ही हैकर बन पाता है. वरना कहीं प्लेसमेंट की राह देख रहा होता है.


अब उस जानकारी में क्या निकला है, ये देखते हैं. तीन एथलीट हैं जिन्हें झटका लगेगा. और एक देश है जिसे खुशी होगी. तीन एथलीट्स हैं वीनस विलियम्स, सेरेना विलियम्स और सिमोन बाइल्स. देश जो खुश होगा वो है अपना इंडिया.


हैकर ग्रुप ने जो फाइलें देखीं उनमें ये साफ़ लिखा है हुआ है कि डोपिंग टेस्ट्स के जो रिज़ल्ट आये हैं उसमें सिमोन बाइल्स एक बैन हो चुकी दवा के लिए पॉज़िटिव पायी गयी हैं. सिमोन को इवेंट में गोल्ड मेडल मिला था. जिम्नास्टिक्स में ही इंडिया की दीपा कर्मकार को चौथे प्लेस पर रहना पड़ा था. तो अब अगर इन फ़ाइल्स के पब्लिक होने पर ओलम्पिक असोसिएशन कोई कदम उठाता है तो सिमोन बाइल्स को डिसक्वालीफ़ाई कर दिया जायेगा. और दीपा एक कदम ऊपर खिसक कर तीसरे स्थान पर आ जायेंगी. यानी ब्रॉन्ज़ मेडल ले आयेंगी.


सिमोन बाइल्स ने ट्वीट करके कहा कि उन्हें बचपन से ही अटेंशन डेफ़िशीएन्सी डिसऑर्डर है. और इसकी वजह से वो जो दवा खाती हैं, उससे उनके सैम्पल में बैन हो चुका ड्रग मौजूद रहता है. वो कहती हैं कि उन्होंने हमेशा रूल्स को फॉलो किया है.






अब पेंच ये मिलता है कि सालों पहले 2001 में जब जस्टिन गैटलिन को बैन हो चुके सब्सटेंस के सैम्पल में मौजूद होने पर बैन लगा था तो उन्होंने भी यही दावा किया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें अटेंशन डेफ़िशीएन्सी डिसऑर्डर है. अब बात ये उठती है कि कहीं ये दोनों ही झूठ तो नहीं बोल रहे? ये हो सकता है कि ये एक बहाना मात्र हो. ये कहना कि मुझे फलानी बीमारी है और उसकी दवाइयों की वजह से मुझे ये समस्या आ रही है, एक ढोंग भी हो सकता है. इसका पता लगाना अब शायद ज़रूरी लगने लगा है.


WADA ने एक स्टेटमेंट में कहा कि ये अटैक दुनिया भर में चल रही ऐंटी डोपिंग की मुहीम को नाकाम करने की एक सज़िश है. साथ ही रशियन गवर्नमेंट ने कहा कि उनके देश की सीक्रेट सर्विस इस साइबर अटैक में शामिल नहीं है.



सेरेना और वीनस विलियम्स को भी उनके डोप टेस्ट्स में खराब रिज़ल्ट्स आने के बावजूद फ़ेवर मिलने की बात कही गयी है.







सोर्स:लल्लनटॉप 
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दीपा कर्मकार से दीपा और साक्षी मलिक से मलिक निकालोगे तो क्या बनेगा? बताओ-बताओ! अरे रिकॉर्ड होल्डर के नाम से नाम मिलाओगे तो रिकॉर्ड ही बनेगा न. मैथ्स नहीं पढ़े हो का?  नीचे पढ़ो सब समझ आ जाएगा.
ओलंपिक को निपटाने के बाद रियो अब पैरालंपिक करा रहा है. जिसमें हम सोना और कांसा तो जीत चुके हैं. कमी थी तो बस चांदी की. वो भी कल दीपा मलिक ले आईं. शॉटपुट में शानदार खेला और 4.61 मीटर के साथ दूसरे नंबर पर रहीं. पहले नंबर पर बहरीन की फातिमा निधाम रहीं. और ब्रॉन्ज पर कब्जा ग्रीस की दिमित्रा कोरोकिदा का रहा. दीपा इस जीत के साथ पैरालंपिक में मेडल जीतने वाली देश की पहली महिला बन गई हैं. उनके बारे में कुछ बातें जान लो.

1.
दीपा का जन्म हरियाणा के सोनीपत में हुआ था. आज से 45 साल पहले 30 सितंबर को. पापा आर्मी में थे.

2.
6 साल की थीं दीपा, जब पहली बार ट्यूमर की चपेट में आईं. ट्यूमर ने दीपा की रीढ़ की हड्डी को निशाना बनाया था. बीमारी थी तो इलाज हुआ. पूरे तीन साल लगे दीपा को उससे छुटकारा पाने में.

3.
साल 1999 में ट्यूमर ने दीपा के स्पाइनल कॉर्ड को फिर से निशाना बनाया. इस दफा सर्जरी हुई. ट्यूमर तो चला गया, पर जीवन भर का गम दीपा को दे गया. इसके बाद वो कभी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाईं. ट्यूमर दीपा को व्हीलचेयर पकड़ा गया था.


4.
हम साल 2016 में हैं. दीपा भी हैं. पर उनके शरीर का छाती से नीचे का हिस्सा बिल्कुल सुन्न है. उन्हें कुछ महसूस नहीं होता. कंधों के बीच लगभग 200 टांकें हैं.

5.
शादी से पहले हसबेंड ने दीपा से बाइक के बारे में पूछा था कि उन्हें कुछ मालूम है. दीपा का जवाब धांसू था. बोलीं, एक बार चाभी दे कर तो देखो, मैं दिखाती हूं क्या जानती हूं. इम्प्रेस हो गए और शादी कर ली. वो आर्मी में थे. कारगिल वॉर के टाइम पर हसबेंड लड़ रहे थे. और इधर दीपा की सर्जरी चल रही थी. जिसके बाद वो 25 दिनों तक कोमा में थीं.

6.
हसबेंड की डेथ के बाद दीपा ने केटरिंग का काम शुरू किया था. आर्मी कैंटीन में लगभग 250 लोगों को खाना खिलाती थीं. और ये किसी जवान की पत्नी की तरफ से सबसे अनोखी पहल थी.

7.
स्पोर्ट्स में एंट्री बड़े रोचक ढंग से लिया है दीपा ने. साल 2006 की बात है. रोज की तरह वो स्वीमिंग प्रैक्टिस कर रही थीं. स्पोर्ट्स अथॉरिटी के ऑफिसर वहीं थे, तो उन्होंने दीपा को देखा था. बाद में महाराष्ट्र सरकार ने दीपा को न्योता भेजा था. क्वालालम्पुर में चल रहे FESPIC (Far East and South Pacific Games for the Disabled) में देश को रिप्रजेंट करने के लिए. दीपा ने न्योता स्वीकारा और गईं क्वालालम्पुर. स्वीमिंग में हिस्सा लिया. और बैक स्ट्रोक स्वीमिंग में देश को सिल्वर मेडल दिलाया.



8.
साल 2008 में यमुना नदी में तैराकी की. एक किलोमीटर वो भी अप-स्ट्रीम. 36 साल में स्पोर्ट्स करियर की शुरुआत करने वाली दीपा के नाम चार लिम्का एडवेंचर रिकॉर्ड हैं.

9.
फेडरेशन मोटर स्पोर्ट्स क्लब ऑफ इंडिया से ऑफिशियली रैली की लाइसेंस पाने वाली इकलौती औरत हैं दीपा. साल 2009 में Raid de Himalaya और साल 2010 में Desert Storm. ये दो सबसे खतरनाक कार रैली हैं, जिसमें दीपा ने पार्ट लिया है.

10.
स्वीमिंग, शॉट पुट, जैवलिन थ्रो और मोटर स्पोर्ट्स के अलावा दीपा ने राजस्थान वूमन्स क्रिकेट टीम को भी रिप्रजेंट कर चुकी हैं. कुल 67 गोल्ड मेडल जीते हैं दीपा ने. 54 नेशनल लेवल पर और 13 इंटरनेशनल लेवल पर.



11.
बाइक की शौकीन दीपा 20 साल की उम्र में शादी के लिए तैयार हो गई थीं. वो भी 100 सीसी की कावासाकी बाइक के लिए. MTV Roadies के नौवें सीजन का हिस्सा रही हैं दीपा. दीपा के अलावा विजेंद्र सिंह भी इसका हिस्सा थे. कंटेस्टेंट के मोराल को बूस्ट करने के लिए. क्योंकि दीपा मोटिवेशनल स्पीकर भी हैैं.

12.
वैसे तो दीपा के नाम कई अवॉर्ड्स हैं. पर मेन वाले ये हैं.

स्वावलंबन पुरस्कार – 2006
हरियाणा करमभूमि अवार्ड – 2008
महाराष्ट्र छत्रपति अवार्ड (स्पोर्ट) – 2009-10
अर्जुना अवार्ड – 2012
प्रेसिडेंट रोल मॉडल अवार्ड – 2014















सोर्स:लल्लनटॉप 



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रियो में ओलंपिक का खेला खत्म हो गया है. खेल के आखिरी दिन अपने पूरे मुलुक को पहलवान योगेश्वर दत्त से उम्मीदें थीं. लेकिन मंगोलिया के पहलवान ने योगेश्वर दत्त को पटखनी देकर उम्मीदों का मर्तबान चकनाचूर कर दिया था. इस मंगोलियन पहलवान का नाम है गैंजोरिग मंदाकनरन. लेकिन दिल दुखाने की हाय लग गई गैंजोरिग को. शॉर्ट कालांतर में गैंजोरिग के कोचों के कपड़े उतर गए. कइसे, अइसे…
फोटो क्रेडिट: reuters
भाई गैंजोरिग योगेश्वर दत्त को हराकर खेल में आगे बढ़ लिया, लेकिन आगे के राउंड्स में ये बंदा जीतकर भी हार गया. और हां, क्योंकि ये बॉलीवुड नहीं है इसलिए इसे बाजीगर भी नहीं कहेंगे. लेट्स मेक इट इजी. दरअसल, मंगोलियन पहलवान ब्रॉन्ज मेडल के लिए उज्बेकिस्तान के पहलवान से लड़ रहा था. मैच खत्म होने से कुछ पहले का स्कोर 6-7 था. लेकिन आखिरी सेकेंड्स में खेला पलटा और रेफरी ने उज्बेकिस्तान के पहलवान को एक पॉइंट देकर 7-7 पर खेला ‘अंतिम अध्याय संपन्न भवति’ यानी फिनिश कर दिया.
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रेफरी ने कहा, ‘आखिरी सेकेंड्स में गैंजोरिग उज्बेकिस्तान के पहलवान से भागे-भागे फिर रहे थे. वो ऐसा समझ रहे थे कि जैसे वो जीत गए. मैच के वक्त में गैंजोरिंग जश्न मनाने सा लगे, जबकि ये भी पॉसिबल है कि इतनी देर में उज्बेकिस्तान का पहलवान गैंजोरिग को हरा देता.’ इस लॉजिक के साथ रेफरी ने एक पॉइंट उज्बेकिस्तान के पहलवान को दिया. गैंजोरिग अपने कोच समेत कहने लगे कि ये गलत है, पर रेफरी ने कहा- सॉरी डूड, माई डिसिजन इज अटल.
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अब बस इसी बात से गैंजोरिग के दो कोच गुस्सा हो गए. गुस्सा भी इतने कि बच्चों की तरफ लोटने लगे. जैसे छोटे बच्चों की चिज्जी न दिलाओ तो वो रोने लगते हैं. ठीक वैसे ही ये कोच रुंआसे हो गए और वहीं रिंग में ही निक्कर छोड़ अपने सारे कपड़े उतार फेंके.
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अपने जूते उतारे और वो भी गुस्से से रिंग में फेंक मारे. धीरे-धीरे दोनों कोच ‘क्लिक करो होड़ रूपी वेबसाइट के माफिक: देखें हॉट तस्वीरें’ नंगे हो लिए.
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ये दोनों मुंह जमीन के नीचे कर लोट गए. एक कोच बाद में रिपोर्टर से बोले- ये प्रोटेस्ट था. इस रेफरी के साथ कुछ प्रॉब्लम है. मंगोलिया के 30 लाख लोग मेडल का इंतजार कर रहे थे, लेकिन हमारे पास अब भी एक मेडल नहीं है. इसी वजह से हमने ये किया…
फोटो क्रेडिट: reuters






सोर्स:लल्लनटॉप.कॉम 
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ओलंपिक खेलों का आज आखिरी दिन था। पूरे देश की नजरें  लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेेता योगेश्वर दत्त पर टिकी थीं, योगेश्नर की मां के साथ-साथ सवा अरब लोगों को यकीन था  कि वह स्वर्ण पदक जीतकर देश को गौरान्वित करेंगे। 
शाम पांच बजे उनका मुकाबला मंगोलिया के पहलवान मंदाखरदान गैंजोरिक से शुरु हुआ। हर कोई टकटकी लगाए अपने-अपने टीवी सेट के आगे इस आशा में बैठा था कि आज वे इतिहास  बनता देखेंगे। 
आज योगेश्वर देश को स्वर्ण पदक दिलाने वाले भारतीय पहलवान बनेंगे। लेकिन कुछ ही पलों में लोगों की आशाएं काफूर हो गया। योगेश्वर का कोई दांव मंगोलिया के पहलवान के सामने नहीं चला और पहले ही दौर में  उन्हें 3-0 के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। 



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रियो ओलंपिक अपने अंतिम दौर में है और पूरे भारत की नजर देश के सबसे बेहतरीन पहलवान योगेश्वर दत्त पर टिकी है. 21 अगस्त रविवार को रियो ओलंपिक के अंतिम दिन योगेश्वर ओलंपिक में अपने मेडल का रंग बदलने उतरेंगे. 2012 के लंदन ओलंपिक में योगेश्वर ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था और अब उनकी चाहत गोल्ड जीतकर दुनिया का नंबर वन पहलवान बनने की है.

योगेश्वर फिर तैयार हैं. सामने है रियो ओलंपिक में गोल्ड जीतने की चुनौती. योगेश्वर की फिटनेस पहले से बेहतर लग रही है. कुश्ती के मैट पर चुस्ती फुर्ती पहले से तेज नजर आ रही है और फॉर्म भी अच्छी है.

योगेश्वर ने 2012 ओलंपिक में ब्रॉन्ज जीतने के बाद 2014 कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता. अब ओलंपिक गोल्ड के लिए 65 किलो ग्राम वर्ग में 21 जुलाई को योगेश्वर का मुकाबला है. रविवार देर रात ही मेडल का भी फैसला हो जाएगा.


भारत के खाते में एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज मेडल तो आ चुका है बस अब गोल्ड का इंतजार है और उम्मीद यही है कि योगेश्वर दत्त इंडिया के इस गोल्ड का इंतजार रियो ओलंपिक के आखिरी दिन खत्म कर देंगे और सोना लेकर ही घर लौटेंगे.






सोर्स:ABPलाइव 
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रियो ओलंपिक के ऐतिहासिक मैच में जोरदार टक्कर देने के बाद भारत की पीवी सिंधू अपना गोल्ड मेडल मैच हार गई हैं और उन्हें रजत से संतोष करना पड़ा।

ओलंपिक के 14वें दिन जहां भारत का 8 साल बाद पहले गोल्ड जीतने का सपना टूट गया तो वहीं पीवी सिंधू खेलों के इस महाकुंभ में रजत पदक जीतने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी बन गईं। साथ ही देश के लिए कोई पदक जीतने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनने का तमगा हासिल कर लिया।

हैदराबाद की सिंधू ने स्वर्ण पदक के लिए शीर्ष वरीयता प्राप्त स्पेन की कैरोलिना मैरिन को जोरदार टक्कर दी लेकिन भारतीय खिलाड़ी को हार का सामना करना पड़ा। मैच में भारतीय खिलाड़ी ने पहला गेम 21-19  से जीत लिया। जबकि दूसरा गेम मैरिन ने 21-12 से जीतने के बाद निर्णायक गेम भी उन्होंने 21-15 से जीतकर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमा लिया। वह गोल्ड जीतने वाली स्पेन की पहली खिलाड़ी बन गई हैं।

21 साल की सिंधू बैडमिंटन से पदक (रजत) जीतने वाली देश की दूसरी खिलाड़ी हैं। इससे पहले 2012 के लंदन ओलंपिक में साइना नेहवाल ने महिला एकल वर्ग में कांस्य पदक जीता था।

 

एक साथ सिंधू ने हासिल किए कई मुकाम

पीवी सिंधूPC: PTI

इससे पहले महिला फाइनल शुरू होने में करीब एक घंटे की देरी हुई क्योंकि जिस कोर्ट पर मैच होना था उसी पर पहले पुरुष एकल के दोनों सेमीफाइनल मुकाबले खेले गए। दोनों का यह पहला ओलंपिक था और दोनों पहली बार ओलंपिक फाइनल खेल रही था। साथ ही 1996 के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है जब महिला फाइनल में एक भी चीनी खिलाड़ी नहीं है।

सिंधू एथलेटिक्स और निशानेबाजी को छोड़कर ओलंपिक के किसी अन्य खेल के फाइनल में पहुंचने भारत की पहली एथलीट हैं। एथलेटिक्स और निशानेबाजी ऐसे खेल हैं जिसके फाइनल में 2 से ज्यादा एथलीट पहुंचते हैं।

भारत अगर आज स्वर्ण पदक जीत जाता तो वह ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदकों की दहाई संख्या को टच कर लेता लेकिन यह सपना इस बार टूट गया है। भारत ने अब तक 9 स्वर्ण जिसमें 8 हॉकी और एक निशानेबाजी से आया है।

बृहस्पतिवार को हुए सेमीफाइनल मुकाबले में सिंधू ने जापान की नोजुमी ओकूहारा को सीधे गेमों में 21-19, 21-10 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।दूसरी ओर, दो बार की विश्व चैंपियन स्पेन की कैरोलिना मैरीन ने लंदन ओलंपिक की चैंपियन ली ज्युरेई को 21-14, 21-16 से हराते हुए फाइनल में अपनी जगह पक्की की थी।





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भारत के लंबे ओलंपिक इतिहास में पीवी सिंधू भारत की पहली ऐसी महिला खिलाड़ी हैं, जिन्होंने सिल्वर मेडल जीता है। शुक्रवार को स्पेन की कैरोलीना मैरीन से हुए महिला सिंगल्स मुकाबले में उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। इससे पहले के इतिहास में उनके अलावा 4 महिला खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक जीता है।

भारत की महिला ओलंपिक चैंपियन्स पर एक नज़र-

साक्षी मलिक



ओलंपिक में पहलवानी में पदक जीतने वाली साक्षी पहली भारतीय महिला हैं। साक्षी हरियाणा की हैं और इससे पहले 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था। एक समय था जब हरियाणा में लड़कियों को कुश्ती खेलने के लिए ज़्यादा प्रोत्साहित नहीं किया जाता था लेकिन पिछले 10 सालों में हालात बदले हैं। साक्षी ने 2002 में अपने कोच ईश्वर दहिया के साथ पहलवानी शुरु की। उन्हें शुरु में विरोध भी झेलना पड़ा। लेकिन आख़िरकर 2016 में उनका सपना पूरा हुआ।

साइना नेहवाल



साइना नेहवाल ने 2012 ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। बैडमिंडन में ओलंपिक मेडल जीतने वाली वो पहली भारतीय महिला खिलाड़ी थीं। वो 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक भी जीत चुकी हैं। ओलंपिक 2012 में कांस्य पदक के लिए साइना का मैच चीनी खिलाड़ी और उस समय की विश्व नंबर 2 ज़िंग वैंग से था। वैंग के घायल होने की वजह से साइना को विजयी घोषित किया गया था और उन्हें कांस्य पदक मिला था। साइना उसके बाद से कई बड़े ख़िताब जीत चुकी हैं। हालांकि इस बार साइना रियो ओलंपिक में पदक नहीं जीत पाईँ।

मेरी कॉम



पांच बार की विश्व चैंपियन मुक्केबाज़ एमसी मेरी कॉम रियो ओलंपिक में तो नहीं खेल पाईं। लेकिन 2012 में उन्होंने लंदन ओलंपिक में भारत को मुक्केबाज़ी में पदक दिलाया था। उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में चार बार गोल्ड मेडल और 2014 के एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था।

कर्णम मल्लेश्वरी



ओलंपिक के इतिहास में पहली भारतीय महिला विजेता होने का श्रेय कर्णम मल्लेश्वरी को जाता है। सिडनी ओलंपिक में उनके मेडल जीतने से पहले भारत की किसी महिला ने ओलंपिक मेडल नहीं जीता था। उन्होंने महिलाओं के 69 किलोवर्ग की भारोत्तोलन प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था।

इससे पहले 1988 में भारत की एथलीट पीटी ऊषा पदक के बेहद करीब आईं थीं। 1980 में वो किसी ओलंपिक वर्ग के फ़ाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं। फिर 1984 में हुए लॉस एजेंलिस ओलंपिक में 400 मीटर हर्डल्स में वो चौथे स्थान पर रही थीं और 1/100वें सैकेंड से मेडल जीतने से चूक गई थीं। वहीं 2016 के रियो ओलंपिक में जिम्नास्टिक्स में दीपा कर्मकार भी चौथे नंबर पर रही हैं।





सोर्स:न्यूज़ २४ 
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रियो ओलंपिक में कांस्य जीतक मेडल का सूखा दूर करने वाली भारतीय महिला पहलवान साक्षी मलिक पर इनामों की बरसात हो रही है. हरियाणा सरकार साक्षी को 2.5 करोड़ रुपये देगी जबकि रेलवे 50 लाख और पदोन्नति देगी. इसके अलावा साक्षी को भारत सरकार की ओर से 30 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा. साथ ही साक्षी को क्लर्क से सीधे डिविजनल कमर्शियल मैनेजर बनाने का एलान किया गया है.



साक्षी ने रचा इतिहास
साक्षी ने किर्गिजस्तान की पहलवान के सामने जबरदस्त खेल दिखाकर ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा जमाया. पहले राउंड में वो किर्गिस्‍तान की पहलवान एसुलू तिनिवेकोवा से 0-5 से हार गईं थीं. दूसरे राउंड की शुरुआत में पिछड़ने के बाद साक्षी ने जबरदस्त वापसी की और 8-5 से दूसरा सेट जीतकर मुकाबला बराबर किया, और देश को कांस्‍य पदक दिलाकर भारत का रियो ओलंपिक में खाता खुलवाया. जब 10 सेकंड का समय बचा था तब साक्षी को एक अंक की दरकार थी और उसने मैच के अंतिम क्षणों में ‘टेकडाउन’ के जरिये करीबी जीत दर्ज की.
साक्षी ने जबरदस्त खेल दिखाया
मंगोलियाई खिलाड़ी के खिलाफ साक्षी का पहले राउंड में मुकाबला 2-2 से बराबरी पर रहा, दोनों खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त जंग देखने को मिल रही थी. लेकिन मुकाबले के आखिरी क्षणों में साक्षी ने वो कर दिखाया, जो रियो में कोई भारतीय एथलीट नहीं कर पा रहा था. साक्षी की इस कामयाबी पर देश को सदा उन पर नाज रहेगा. इस मुकाबले में उन्होंने अपने जबरदस्त दांव लगाए और 12-3 से मुकाबला जीत कर इतिहास रच दिया. मेडल जीतने के बाद साक्षी ने कहा कि देश ने उन पर जो प्यार और भरोसा दिखाया है, उसकी वो हमेशा शुक्रगुजार रहेंगी.

The love and trust that the country has shown in me, I am forever grateful: to ANI after winning Bronze

पीएम मोदी ने कहा पूरा देश है खुश
पीएम मोदी ने ट्वीट कर साक्षी मलिक को इस जीत की बधाई देते हुए कहा कि आने वाले सालों में साक्षी कई खिलाड़ियों को प्रेरित करती रहेंगी. पीएम ने कहा कि इस रक्षा बंधन पर भारत की बेटी ने ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडल जीतकर हम सभी को गौरवान्वित किया है.
On this very auspicious day of Raksha Bandhan, Sakshi Malik, a daughter of India, wins a Bronze & makes all of us very proud. 
कैसे मिला साक्षी को ब्रॉन्ज मेडल ? 
साक्षी के लिए इस मेडल को हासिल करने की राह किसी भी लिहाज से आसान नहीं थी. उन्होंने पहले क्वालिफिकेशन राउंड में स्वीडन की पहलवान मलिन जोहान्ना मैटसन को 5-4 से हराया. राउंड ऑफ 16 में साक्षी ने मॉल्डोवा की मारियाना चेरडिवारा-एसानू को 3-1 से हराया. इसके बाद प्रीक्वार्टर मुकाबले में उन्होंने तकनीकी अंकों के आधार पर मारियाना चेरदिवारा को हराया. दोनों के 5-5 प्वाइंट थे, लेकिन लगातार चार अंक अर्जित करने के कारण साक्षी को विजेता घोषित किया गया. इसके बाद क्वार्टर फाइनल में साक्षी को रूस की वेलेरिया कोबलोवा ने एकतरफा मुकाबले में साक्षी को 9-2 से शिकस्त झेलनी पड़ी. जिसके बाद उन्हें गोल्ड और सिल्वर मेडल की दौड़ से बाहर होना पड़ा. फिर उन्हें रेपचेज मुकाबला खेलने का मौका मिला.
जब खुशी से झूम उठा साक्षी का परिवार
साक्षी की इस कामयाबी पर उनके घर में खुशी का माहौल है. उनके परिवार वालों ने पूरा मुकाबला देखा, जैसे ही साक्षी ने ब्रॉन्ज मेडल जीता उनके घर वाले नाचने-गाने लगे. साक्षी की मां ने कहा कि भारत की बेटी ने देश में ओलंपिक पदक के सूखे को खत्म कर दिया है.
ट्विटर पर बधाई संदेशों की आई बाढ़
साक्षी की इस कामयाबी के बाद ट्विटर पर उनके लिए बधाई संदेशों की बाढ़ सी आ गई. विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने साक्षी को ट्वीट कर बधाई दी और कहा देश को तुम पर नाज है.
वहीं सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने भी साक्षी को बधाई दी. भारतीय क्रिकेटर आर अश्विन ने भी साक्षी को बधाई दी और कहा कि साक्षी की इस कामयाबी से भारत में महिला कुश्ती को नई पहचान मिलेगी.

ओलंपिक में भारतीय कुश्ती का सफर 
भारत को कुश्ती में अबतक चार मेडल मिल चुके हैं. जिसमें साक्षी मलिक पहली महिला पहलवान हैं, जिन्होंने कुश्ती में मेडल हासिल किया है. 1952 हेलसिंकी ओलंपिक गेम्स में भारत को कुश्ती में पहला मेडल खशाबा जाधव ने दिलाया था. इसके बाद भारत को अपने अगले पदक के लिए 56 सालों तक कुश्ती में कोई मेडल नहीं मिला. 2008 बीजिंग ओलंपिक में सुशील कुमार ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारतीय कुश्ती को नई राह दिखाई. इसके बाद उन्होंने फिर 2012 लंदन ओलंपिक देश को सिल्वर मेडल दिलाकर इतिहास रच दिया था और सुशील भारतीय ओलंपिक इतिहास में व्यक्तिगत स्पर्धा में दो बार मेडल दिलाने वाले पहले एथलीट बने. 2012 लंदन ओलंपिक में योगेश्वर दत्त ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था.






सोर्स:आजतक 

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